सिविल डिफेंस ने पेश की इंसानियत की मिसाल, मृतक के परिजनों की मदद को बढ़ाए हाथ

सिविल डिफेंस के जाबांज जवानों के दिलों में अब भी इंसानियत जिंदा है।

Civil Defense presented example of humanity कोविड 19 के कारण हर दिन बुरी व नकारात्मक खबर ही सुनने को मिल रही हैं। लेकिन सोमवार सुबह टाटानगर स्टेशन से एक खबर सुनने को मिली। जिसे सुनकर यही लगा कि इंसानियत अभी मरी नहीं है।

Rakesh RanjanMon, 19 Apr 2021 04:11 PM (IST)

जमशेदपुर, जासं। कोविड 19 के कारण हर दिन बुरी व नकारात्मक खबर ही सुनने को मिल रही है। लेकिन सोमवार सुबह टाटानगर स्टेशन से एक खबर सुनने को मिली जिसे सुनकर यही लगा कि इंसानियत अभी मरी नहीं है। वह सिविल डिफेंस के जाबांज जवानों के दिलों में अब भी जिंदा है।

आपको बता दें कि रविवार रात एक यात्री अपनी पत्नी व 10 साल के बेटे के साथ गया से 02802 नई दिल्ली पुरुषोत्तम स्पेशल ट्रेन से चढ़े। इन्हें टाटानगर स्टेशन पर उतरना था और सोमवार सुबह टाटानगर स्टेशन से खुलने वाली एर्नाकुलम स्पेशल ट्रेन से राजमुंदरी जाना था। इसके लिए इनके पास टिकट भी थी। लेकिन टाटानगर पहुंचने से पहले 45 वर्षीय यात्री को जब उसकी पत्नी ने उठाया तो नहीं उठा और अचेत रहा। ऐसे में ट्रेन में मौजूद आरपीएफ की टीम ने इसकी सूचना टाटानगर स्टेशन के मेडिकल टीम को दी तो उक्त यात्री, उनकी पत्नी व बेटे को टाटानगर स्टेशन पर उतारा गया। कोविड जांच की तो कोविड पॉजिटिव होने के कारण यात्री की मौत हो चुकी थी। रात में पत्नी की भी जांच की गई तो वो भी पॉजिटिव मिली जबकि उसका बेटा निगेटिव था। ऐसे में सिविल डिफेंस ने मृतक यात्री का शव को शीतगृह में रखवाकर इसकी सूचना उनके परिजनों को दे दी।

आपस में चंदा कर 1000 रुपये जुटाए

सोमवार सुबह मृतक की पत्नी की फिर से जांच की गई तो वह निगेटिव मिली। लेकिन उसे सुबह से ही दस्त की शिकायत हो रही थी इसके कारण उसकी स्थिति गंभीर हो गई। पीड़ित महिला के पास पैसे भी नहीं थे। ऐसे में टाटानगर स्टेशन आने वाले यात्रियों के कोविड जांच के काम में लगे सिविल डिफेंस की टीम व स्वास्थ्य कर्मचारियों ने खुद पहल की। सभी ने आपस में चंदा कर 1000 रुपये जुटाए। इसके बाद तत्काल बच्चे के खाने-पीने की व्यवस्था की गई। साथ ही महिला को भी अस्पताल में भर्ती कराया।

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