Chaitra Navratri 2021: सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग में नवरात्रि, जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि

3 से 21 अप्रैल तक नवरात्र मनाया जाएगा।

Chaitra Navratri 2021 वर्ष में मुख्यत दो नवरात्र होते हैं जिसमें पहला वासंतिक नवरात्र और दूसरा शारदीय नवरात्र कहलाता है। चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि पर्यंत काल को वासंतिक नवरात्र कहते हैं। आइए जानिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त एवं पूजन विधि।

Rakesh RanjanSun, 11 Apr 2021 08:49 PM (IST)

जमशेदपुर, जासं। Chaitra Navratri 2021 चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा 13 अप्रैल यानी मंगलवार को है। इसी दिन से चैत्र नवरात्र का व्रत शुरू हो गया, तो इसी दिन हिंदू कैलेंडर विक्रम संवत 2078 का शुभारंभ हुआ। इस दिन घर-घर में बजरंग बली की पूजा-अर्चना हो रही, तो महावीरी झंडे भी बदले जा रहे।

इस बार वासंतिक नवरात्र पूरे नौ दिन का है। 13 से 21 अप्रैल तक नवरात्र मनाया जाएगा, जिसमें मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूप (शैलपुत्री़, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी व सिद्धिदात्री) की पूजा-अर्चना होगी। अलग-अलग दिन मां के विभिन्न रूपों की पूजा-अर्चना भी अलग-अलग व्रत-विधान से किए जाएंगे। 22 अप्रैल को व्रत का पारण होगा। इसे लेकर मंदिरों में विशेष तैयारी होगी, लेकिन कोरोना को देखते हुए कहीं भी रामनवमी अखाड़े का विसर्जन जुलूस भीड़भाड़ के साथ नहीं निकलेगा। अखाड़ा कमेटी के कुछ लोग झंडे को नदी में विसर्जित करेंगे।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

कलश स्थापन हेतु उत्तम समय प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय के उपरांत प्रात: 5.45 बजे से पूर्वाह्न 8.45 बजे तक। वर्ष में मुख्यत: दो नवरात्र होते हैं, जिसमें पहला वासंतिक नवरात्र और दूसरा शारदीय नवरात्र कहलाता है। चैत्र शुक्लपक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवमी तिथि पर्यंत काल को वासंतिक नवरात्र कहते हैं। वासंतिक नवरात्र के साथ ही नए चान्द्र संवत्सर अर्थात भारतीय विक्रम संवत का भी प्रारंभ होता है। धर्मशास्त्रीय मान्यताओं से नवरात्र का पवित्र काल पूजा पाठ के साथ धार्मिक अनुष्ठानों एवं तंत्र-मंत्र व यंत्रादि साधन के लिये पूर्णत: उपयुक्त व सिद्धि प्रद माना गया है। जगत जननी माता भगवती की कृपा प्राप्ति हेतु भक्त व साधक नवरात्र की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापन कर नवरात्र पर्यंत माता की आराधना के क्रम में विधिवत पूजन करके श्रीदुर्गा सप्तशती का नित्य पाठ करते हैं। भगवान श्रीराम के भक्तगण इस सिद्धिप्रद पुण्यकाल में श्रीरामचरित मानस का विधिवत नवाह्न पाठ कर श्रीरामजी के साथ रामभक्त हनुमानजी की भक्ति कर मन इच्छित फल हेतु प्रयासरत होते हैं। भक्ति, श्रद्धा, समर्पण व पवित्र मन के साथ की गई आराधना से सुख समृद्धि के साथ अभीष्ट फलों की प्राप्ति होती है, ऐसी धर्मशास्त्रीय मान्यता है। नवरात्र काल में भक्तगण नवरात्र व्रत भी रखते हैं।

इस नवरात्र में कोइ तिथि हानि नहीं

वासंतिक नवरात्र व नव संवत्सर-2078 मंगलवार 13 अप्रैल से प्रारंभ हो रहा है। इस नवरात्र में किसी भी तिथि की हानि नहीं है। यह नवरात्र पूरे नौ दिनों का है। प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल को सोमवार को प्रात: 6:59 बजे से लगकर मंगलवार 13 अप्रैल को दिन में 8:45 बजे तक रहेगी। आज मंगलवार को अश्विनी नक्षत्र में कलश स्थापन किया जाएगा। कलश स्थापन हेतु उत्तम समय प्रतिपदा तिथि में सूर्योदय के उपरांत प्रात: 5. 45 बजे से पूर्वाह्न 8.45 बजे तक है। अभिजित मुहूर्त दिवा 11. 35 बजे से दिवा 12. 23 बजे तक है। नवरात्र काल में ही दिनांक 14 अप्रैल बुधवार मेष संक्रांति अर्थात सत्तू संक्रांति सतुआन का पर्व भी मनाया जाएगा। मेष संक्रांति के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगा। नवरात्र काल में ही भगवान भास्कर की आराधना हेतु चैती छठ भी किया जाता है।

इस नवरात्र की शेष तिथियां निम्नवत रहेंगी

पंडित रमाशंकर तिवारी बताते हैं कि बुधवार 14 अप्रैल को नवरात्र का दूसरा दिन द्वितीया तिथि दिवा 10. 46 बजे तक उपरांत तृतीया तिथि लगेगी। गुरुवार 15 अप्रैल को नवरात्र का तीसरा दिन तृतीया तिथि दिवा 12. 52 बजे तक उपरांत चतुर्थी तिथि लगेगी। शुक्रवार 16 अप्रैल को नवरात्र का चौथा दिन, चतुर्थी तिथि दिवा 2. 49 बजे तक उपरांत पंचमी तिथि लगेगी। इसी दिन चैती छठ व्रत हेतु नहाय खाय अर्थात लौकी-भात ग्रहण किया जाएगा। शनिवार 17 अप्रैल को नवरात्र का पांचवां दिन, पंचमी तिथि दिवा 4.32 बजे तक उपरांत षष्ठी तिथि लगेगी। सायं काल में छठ व्रतधारी खरना कर प्रसाद ग्रहण करेंगे। रविवार 18 अप्रैल को नवरात्र का छठा दिन, षष्ठी तिथि सायं 5.52 बजे तक उपरांत सप्तमी तिथि। इसी दिन छठ व्रतधारी अस्ताचलगामी सूर्य देव को प्रथम अघ्र्य दान करेंगे। सोमवार 19 अप्रैल को नवरात्र का सातवां दिन, सप्तमी तिथि संध्या 6.45 बजे तक उपरांत अष्टमी तिथि। सोमवार 19 अप्रैल को ही अरुणोदय काल में भगवान भास्कर को दूसरा अर्घ्य दान करके सूर्योदय उपरांत छठ व्रत का पारण किया जाएगा। मंगलवार 20 अप्रैल को नवरात्र का आठवां दिन अष्टमी तिथि राति्र 7:07 बजे तक उपरांत नवमी तिथि लगेगी।

महाष्टमी व्रत मंगलवार 20 अप्रैल को

इस प्रकार महाष्टमी व्रत मंगलवार 20 अप्रैल को किया जाएगा। बुधवार 21 अप्रैल को नवरात्र का नवां दिन, नवमी तिथि रात्रि 6.57 बजे तक उपरांत दशमी तिथि लगेगी। इस प्रकार बुधवार 21 अप्रैल को महानवमी व्रत, दुर्गानवमी व श्रीरामनवमी व्रत, श्रीराम जन्मोत्सव, महाबीरी ध्वजा पूजन, दुर्गा सप्तशती या श्रीरामचरित मानस का नवम पाठ करके हवन व पूर्णाहुति का कार्यक्रम किया जाएगा। भगवान श्रीराम का जन्म नवमी तिथि के कर्क लग्न में अपराह्न काल में हुआ था। इस बार बुधवार नवमी तिथि को कर्क लग्न का संयोग दिवा 11.02 बजे से दिवा 1.20 बजे तक है। नवरात्र व्रत का पारण नवमी तिथि में बुधवार को करना शास्त्रोचित है। अन्य मतानुसार नवरात्र पारण गुरुवार को प्रात: काल भी किया जा सकता है। श्रीरामनवमी व्रत का पारण गुरुवार 22 अप्रैल को सूर्योदय के उपरांत दशमी तिथि में करना श्रेयस्कर रहेगा। यह नवरात्र पूरे नौ दिनों का है। नवरात्र पूजन व श्रद्धा से जगत जननी मां भगवती की कृपा समस्त ब्रह्माण्ड में व्याप्त हो। नवरात्र विश्व व सभी प्राणियों के लिए कल्याणकारी रहे। ।।

चैती छठ 16 से

इस बार चैती छठ 16 से मनाया जाएगा। चार दिनों का यह महापर्व 19 अप्रैल को संपन्न होगा। इसमें पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना का व्रत करेंगे, जबकि तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। चौथे व अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही छठ महापर्व संपन्न हो जाएगा। चैत्र नवरात्र काफी कठिन माना जाता है, क्योंकि यह प्रचंड गर्मी का समय होता है। इसके बावजूद शहर में काफी श्रद्धालु इसे मनाते हैं। स्वर्णरेखा व खरकई नदी में अच्छी-खासी भीड़ होती है।

ज्वारा महोत्सव

छत्तीसगढ़ी समाज भी मनाएगा ज्वारा महोत्सव चैत्र नवरात्र के अवसर पर छत्तीसगढ़ी समाज के लोग ज्वारा महोत्सव धूमधाम से मनाते हैं। इसमें भी 16 अप्रैल काे ज्योति कलश स्थापित किया जाएगा। श्रीश्री शीतला माता मंदिर टुइलाडुंगरी समिति के अध्यक्ष दिनेश कुमार ने बताया कि चैत्र नवरात्र ज्वारा पूजन की तैयारी के लिए पूजा समिति का गठन किया गया है। मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि पूजन के दौरान बिना मास्क के किसी भी श्रद्धालु को मंदिर में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। पहले दिन 16 अप्रैल को शाम साढ़े छह बजे आरती होगी। इसके बाद जश गीत स्थानीय जश गायन मंडली द्वारा किया जाएगा। ज्वारा पूजा सोनारी, जुगसलाई व बागबेड़ा इलाके में भी धूमधाम से मनाया जाता है।

 

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