टाटा कमिंस के एमडी समेत 12 अधिकारियों पर होगा केस, ये है कारण

आखिरकार टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन के पूर्व महामंत्री अरूण सिंह की बर्खास्तगी मामले में कंपनी अधिकारियों पर केस दायर करने का निर्देश मिल ही गया। श्रम विभाग के लाख पहल के बावजूद मामला नहीं सुलझा। विवाद बढ़ता गया।

Rakesh RanjanFri, 23 Jul 2021 05:55 PM (IST)
उप श्रमायुक्त ने भी बर्खास्ती वापसी करने की बात कही।

जमशेदपुर, जागरण संवाददाता। आखिरकार टाटा कमिंस कर्मचारी यूनियन के पूर्व महामंत्री अरूण सिंह की बर्खास्तगी मामले में कंपनी अधिकारियों पर केस दायर करने का निर्देश मिल ही गया। श्रम विभाग की लाख पहल के बावजूद मामला नहीं सुलझा। विवाद बढ़ता गया तथा अंत में झारखंड सरकार ने कंपनी के एमडी समेत 12 अधिकारियों पर सीजेएम कोर्ट में केस दायर करने का निर्देश दे दिया।

यूनियन के पूर्व महामंत्री अरुण सिंह को कंपनी से बर्खास्त करने के मामले में श्रम विभाग ने जमशेदपुर के डीएलसी को स्थानीय श्रम न्यायालय में कंपनी के एमडी अश्वथ राम, एसोसिएट निदेशक अंजली पांडेय, राजीव बत्रा, डायरेक्टर गिरीश वाग, राजेंद्र पाटेकर, असीम मुखोपाध्याय, जोनाथन व्हाइट, एचआर हेड पल्लवी देसाई, प्लांट हेड मनीष कुमार झा, सीनियर जेनरल मैनेजर दीप्ति महेश्वरी के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

क्यों हुई थी अरूण सिंह पर कार्रवाई

जमशेदपुर के टाटा कमिंस प्लांट में प्रबंधन के खिलाफ मुखर होने वाले अरूण सिंह को बर्खास्त किया गया था। यूनियन के आपसी विवाद में अरूण सिंह पर कार्रवाई हुई थी। उसके बाद श्रम विभाग में कई बार मामले को लेकर सुनवाई चली। यूनियन नेता व प्रबंधन कई बार आमने-सामने हुए। उप श्रमायुक्त ने भी बर्खास्ती वापसी करने की बात कही। लेकिन प्रबंधन अपने रवैये पर कायम रहा। प्रबंधन की ओर से साकारात्मक जवाब नहीं आने पर उप श्रमायुक्त ने राज्य सरकार को अपना रिपोर्ट बनाकर भेज दिया था और केस दर्ज करने की बात कहीं गयी थी और इजाजत मांगी थी।

कंपनी प्रबंधन को उप श्रमायुक्त ने क्या जारी किया था नोटिस

बर्खास्तगी पर नोटिस जारी कर प्रबंधन से फिर पूछा कि प्रबंधन ने औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के तहत उल्लेखित अनुचित श्रम व्यवहार करने व स्टैंडिंग आर्डर से बाहर जाकर एक कर्मचारी को बर्खास्त करने की कार्रवाई की है। एक ही मामले में दो अलग-.अलग कार्रवाई की गई है। यूनियन के चार नेताओं ने आपस में मारपीट की थी। इसकी शिकायत थाने में किसी पक्ष ने नहीं की। इस मामले में एक नेता को बर्खास्त कर दिया गया जबकि तीन नेताओं को छोड़ दिया गया। यह कार्रवाई समझ से परे है। प्रबंधन को जवाब देने का यह अंतिम मौका दिया जा रहा है।

 

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