CAIT ने ई-फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ खोला मोर्चा, केंद्रीय वाणिज्य मंत्री को सौंपा ज्ञापन, की ये मांग

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल। फाइल फोटो

Jharkhand Business. कंफडेरशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कैट का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से दिल्ली में मिला और उन्हें एक ज्ञापन भी सौंपा। ये रही पूरी जानकारी।

Rakesh RanjanSat, 03 Apr 2021 09:29 AM (IST)

जमशेदपुर, जासं। कंफडेरशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कैट का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से दिल्ली में मिला और उन्हें एक ज्ञापन भी सौपा। जिसमें अमेजन, फ्लिपकार्ड, रिलायंस सहित दूसरी फार्मेसी कंपनियों पर ई-फार्मेसी व्यापार में ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के प्रावधानों का उल्लधंन करने का आरोप लगाया। साथ ही ऑनलाइन दवाओं के व्यापार पर रोक लगाने की मांग की।

कैट ने पीयूष गोयल को सौंपे गए ज्ञापन में कहा है कि ई-कॉमर्स कंपनी फार्मा ईजी, मेड लाइऊ, अमेजन, फ्लिपकार्ट, रिलायंस, वन एमजी, नेट मैड जैसी कंपनियां खुलेआम अवैध रूप से ई-फार्मेसी कंपनियों का संचालन करती है और 30 से 40 प्रतशित से छूट देकर खुदरा व्यापार को भी प्रभावित कर रहे हैं। इससे लाखों केमिस्ट व दवा विक्रेता जो सभी नियम कानून का पालन करते हुए व्यापार कर रहे हैं उनके समक्ष अब अपना परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।

नया प्रेस नोट जारी करने की मांग

कैट के राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोंथालिया का कहना है कि पूंजी डंपिंग की यह प्रथा उद्याेग के निर्वाह और भविष्य के लिए बेहतर हानिकारक साबित हो सकती है क्योंकि ई-फार्मेसी कंपनियों की अपनी सीमा है वे आपात स्थिति में दवाएं नहीं पहुंचा सकती है। ये जरूरत केवल शहर के गली-मोहल्ला में संचालित दवा दुकानें ही कर सकती है। लेकिन ये दवा दुकानें बंद हो गई तो आम जनता को काफी नुकसान होगा। इसलिए कैट के प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय ई-कॉमर्स व्यापार को सभी खामियों से मुक्त राने के लिए एफडीआई नीति के प्रेस नोट 2 के साथ नया प्रेस नोट जारी करने की मांग एक बार फिर दोहराई।

खुदरा व्यापारियों और वितरकों को समस्या

सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के महासचिव भरत वसानी का कहना है कि ई-फ़ार्मेसी के बढ़ते व्यापार के चलते खुदरा व्यापारियों और वितरकों को भारी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। जिसका मुख्य कारण इनके द्वारा अपनाई जा रही कुप्रथाएं हैं जैसे कि पूंजी डंपिंग और भारी डिस्काउंट तथा लागत से भी क़म कीमत पर दवा बेचना शामिल है। देश भर में जरूरतमंद मरीजों के लिए रिटेल केमिस्ट और डिस्ट्रीब्यूटर्स सहित दवा विक्रेता संपर्क के पहले बिंदु है। बड़े विदेशी खिलाड़ियों द्वारा अपने वित्तीय समर्थन के कारण इन ई-फार्मेसियों ने अस्थिर मूल्य निर्धारण की प्रथा शुरू की है जिसके कारण खुदरा विक्रेताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। जबकि यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ड्रग्स एंड कैमिस्ट एक्ट 1940 के तहत बिना डाक्टरों की पर्ची के दवाओं की होम डिलीवरी की अनुमति नहीं देती। सुरेश सोंथालिया ने आरोप लगाया कि विदेशी कंपनियां देश के केमिस्ट व्यापार को प्रभावित करने के लिए एक साजिश के तहत ई-फार्मेसी को गैर कानूनी तरीके से बढ़ावा दे रही है। सरकार को तत्काल इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत है।

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