बांसपानी स्टेशन प्रकरणः कोयला चोरी से करोड़ो रुपयों का होता है कारोबार

Banspani station case हर महीने चक्रधरपुर रेल मंडल के विभिन्न साइडिंग से कोयला चोरी का करोड़ों का कारोबार होता है। और इस कारोबार में आरपीएफ व रेलकर्मियों की भी मिलीभगत होती है। आरपीएफ को प्रत्येक बोरा कोयला पार करवाने के लिए 50 रूपये माफिया भुगतान करते हैं।

Rakesh RanjanWed, 13 Oct 2021 04:22 PM (IST)
बांसपानी रेलवे स्टेशन ग्रामीणों के गुस्से का शिकार बन गया।

जागरण संवाददाता, चक्रधरपुर। चक्रधरपुर रेल मंडल के बांसपानी स्टेशन में ग्रामीणों ने तोड़फोड़ कर पूरे स्टेशन को तहस- नहस कर दिया है । दरअसल, आरपीएफ के द्वारा पिटाई के बाद एक ग्रामीण की मौत हो गयी। ग्रामीण की मौत के बाद पूरे गांव में रेलवे के खिलाफ गुस्सा ऐसा फूटा कि ग्रामीणों ने बांसपानी रेलवे स्टेशन में घुसकर तोड़फोड़ मचा दी। इस तोड़फोड़ में कई रेलकर्मी घायल हैं । घटना के बाद चक्रधरपुर रेल मंडल में हडकंप मचा हुआ है ।

मंगलवार रात चक्रधरपुर रेल मंडल का बांसपानी रेलवे स्टेशन ग्रामीणों के गुस्से का शिकार बन गया। बांसपानी और आसपास के ग्रामीणों ने बांसपानी रेलवे स्टेशन में जमकर तोड़फोड़ की और हंगामा मचाया। इस दौरान ग्रामीणों ने स्टेशन में काम कर रहे कई रेलकर्मियों पर भी जानलेवा हमला किया  जिसमें कई रेलकर्मी घायल हैं और जोड़ा के टाटा हॉस्पिटल घायल रेलकर्मियों का ईलाज चल रहा है। जो गंभीर थे उन्हें रांची रिम्स ले जाया गया है । ग्रामीणों ने तोड़फोड़ के दौरान पूरे रेलवे स्टेशन के संसाधन और उपकरण को तोड़कर नष्ट कर दिया। वही दस्तावेजों को भी फेंककर पूरे स्टेशन परिसर में बिखेर दिया ।

ग्रामीणों के कब्जे में दो घंटे रहा बासपानी स्टेशन

तक़रीबन दो घंटे तक ग्रामीणों के कब्जे में स्टेशन रहा । किसी तरह कुछ रेलकर्मी अपनी जान बचाकर रेलवे स्टेशन से भाग निकलने में कामयाब रहे लेकिन जो पकड़ में आये ग्रामीणों ने उन्हें दम भर पीटा। इस घटना की सूचना मिलने के बाद ओडिशा की क्योंझर पुलिस एक्टिव हुई और प्रशासन ने वहां धारा 144 लगा दी । जिसके बाद जिला पुलिस ने ग्रामीणों को खदेड़कर स्टेशन को अपने कब्जे में ले लिया । स्टेशन और आसपास इस घटना के बाद अब भी तनाव कायम है। वही ग्रामीणों को समझाने का प्रयास जारी है।  स्टेशन में ट्रेनों का परिचालन ठप्प है। लोडिंग भी ठप्प है।

आरपीएफ के जवानों ने कोयला चोर को पकड़ कर की पिटाई

जानकारी के मुताबिक आरपीएफ के एक जवान ने देर शाम को साइडिंग में लक्ष्मण पात्रो नामक एक ग्रामीण की कोयला चोर बताकर लाठी डंडे से पिटाई कर दी । आरपीएफ जवान की इस पिटाई के बाद घटना स्थल पर ही लक्ष्मण पात्रो की मौत हो गयी । इसकी सूचना जब लक्ष्मण पात्रो के घरवालों व ग्रामीणों को हुई तो वे मौके पर पहुंचे और शव को उठाकर गांव ले गए । लक्ष्मण पात्रो का शव देख ग्रामीणों में रेलवे के खिलाफ ऐसा गुस्सा फूटा कि उन्होंने बांसपानी रेलवे स्टेशन पर ही धावा बोल दिया । सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने चुन चुन कर रेलकर्मियों और आरपीएफ जवानों पर हमले किये । वहीं स्टेशन में गुस्से के उबाल के साथ पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की।

बासपानी में धारा 144 लागू

फिलहाल इलाके में धारा 144 लागू है। स्थिति सामान्य हो रहे हैं लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा थमा नहीं है। रेलवे के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंच जिला प्रशासन की मदद से ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं। मृतक लक्ष्मण पात्रो के घरवालों का कहना है कि वह अपने परिवार का भरण पोषण करने वाला एकमात्र व्यक्ति था। सरकार अब पीड़ित परिवार को हर महीने 20 हजार रुपये का सहायता राशि व मुआवजा प्रदान करे।

कोयला चोरी में करोड़ो रुपयों का होता है कारोबार

बता दें कि घटना जिस कोयला चोरी के मामले को लेकर शुरू हुआ है वह चक्रधरपुर रेल मंडल में काफी बड़ा मामला है । हर महीने चक्रधरपुर रेल मंडल के विभिन्न साइडिंग से कोयला चोरी का करोड़ों का कारोबार होता है। और इस कारोबार में आरपीएफ व रेलकर्मियों की भी मिलीभगत होती है। कोयला चोरी के इस मामले को हमने पिछले साल अक्तूबर के महीने में ही उजागर किया था । और यह भी बताया था कि कोयला चोरी को लेकर कभी भी ग्रामीण और रेल प्रशासन आमने सामने हो सकते हैं। खूनी संघर्ष हो सकता है। कोयला चोरी को लेकर बड़ा हादसा या फिर दो गुटों में झड़प भी हो सकती है। लेकिन इसके बावजूद इस पर ध्यान नहीं दिया गया जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

इन स्टेशनों में होती है बड़े पैमाने में कोयला चोरी

चक्रधरपुर रेल मंडल के बंडामुंडा आरपीएफ थाना क्षेत्र के डूमिरता, लाठीकटा, नुआगांव, बिमलगढ़ आरपीएफ थाना क्षेत्र के बिमलगढ़, पाटासाई, रेंजड़ा, रोक्सी, बरसुआं, डागुवापोसी आरपीएफ थाना क्षेत्र के डागुवापोसी, बांसपानी, जिरुली स्टेशनों में बड़े पैमाने में कोयला चोरी होती है। इसके साथ साथ आदित्यपुर में भी रेक से कोयला की चोरी का मामला सामने आता रहा है। यही नहीं पिछले दो सालों से बड़बिल साइडिंग में भी कोयला चोरी का धंधा खूब फल फुल रहा है।

हर महीने करोडों का कारोबार

बताया जाता है कि रेलवे के रेक से कोयला चोरी का यह धंधा अब छोटा गोरखधंधा नहीं रहा । प्रत्येक महीने इस धंधे में लिप्त बड़े माफिया चक्रधरपुर रेल मंडल में ही रेलवे के रेक से कोयला चोरी कर करोड़ों का कारोबार कर रहे हैं । इस धंधे में बिना पूंजी लगाए कोयला माफिया करोड़ों कमा रहे हैं। वेगन से कोयला चोरी करने वाले को प्रत्येक बोरा कोयला का सौ रुपया मिलता है जबकि इसी कोयले को धनबाद में प्रत्येक बोरा 600 रूपये में बेचा जाता है। माफिया एक मैनेजमेंट के तौर पर कोयला चोरी करते हैं जिसमें कुछ आरपीएफ को भी शामिल किया जाता है। आरपीएफ को प्रत्येक बोरा कोयला पार करवाने के लिए 50 रूपये माफिया भुगतान करते हैं। वही जिला पुलिस को भी कुछ खर्चा दे दिया जाता है। इस धंधे में अब कब्ज़ा जमाने के लिए माफियाओं का अलग अलग गुट काम करने लगा है । जिसके कारण ग्रामीण, रेल प्रशासन, आरपीएफ और कोयला माफिया के बीच टकराव और खूनी रंजिश की स्थिति बन रही है।

आरपीएफ में चल रही गुटबाज़ी

बांसपानी स्टेशन में भी हुई घटना इसी ओर इशारा कर रही है । आरपीएफ में भी गुटबाजी चल रही है । कोयला चोरी का पैसा जिन्हें नहीं मिल रहा वो अलग गुट बनाए हुये हैं, वहीं कोयला माफिया की जिस पर मेहरबानी है उनका गुट अलग है । ऐसे में कोयला चुराने वाले आपसी टकराव और खूनी रंजिश की चपेट में आ रहे हैं।

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