आदित्य बिरला समूह की लौह अयस्क कंपनी रामेश्वर जूट मिल को बड़ा झटका

आदित्‍य बिरला समूह की लौह अयस्‍क कंपनी रामेश्‍वर जूट मिल की खदान।
Publish Date:Tue, 22 Sep 2020 09:37 AM (IST) Author: Rakesh Ranjan

चाईबासा, सुधीर पांडेय। Aditya Birla Group पश्चिमी सिंहभूम जिले में लौह अयस्क खनन करने वाली आदित्य बिरला समूह की कंपनी रामेश्वर जूट मिल को सरकार से बड़ा झटका लगा है। खान सचिव के श्रीनिवासन ने कंपनी की ओर से आयरन व मैगनीज ओर के उठाव की अनुमति देने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया है।

यह कार्रवाई खान विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गयी है। खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव ने इस संबंध में जिला खान विभाग व कंपनी को पत्र जारी कर मांग खारिज करने की कार्रवाई से अवगत कराते हुए कहा कि 31 मार्च 2020 को रामेश्वर जूट मिल का खनन पट्टा की लीज अवधि समाप्त हो गयी थी। कंपनी के महाप्रबंधक एबी सिंह ने संशोधित खनिज अधिनियम 2016 के नियम 12 जीजी के अनुसार कुछ आयरन और मैंगनीज ओर को हटाने के लिए अनुरोध किया था। इस बावत आरजेएम के पट्टा क्षेत्र में उपलब्ध खनिज का आंकलन करने के लिए विभाग स्तर पर एक कमेटी का गठन किया गया था।

मैंगनीज ओर पट्टा क्षेत्र के स्टॉक में उपलब्ध नहीं

कमेटी द्वारा जांच के क्रम में यह पाया गया कि मैंगनीज ओर उनके पट्टा क्षेत्र के स्टॉक में उपलब्ध ही नहीं है। खान सचिव ने यह भी कहा कि लीजधारक खनन विभाग से संपर्क करने स्वयं अथवा नामित माइंस एजेंट के द्वारा विधिवत संपर्क कर सकते हैं लेकिन आरजेएम के मामले में अनुरोध कंपनी के महाप्रबंधक के द्वारा किया गया है। यह विधि सम्मत प्रतीत नहीं होता है। इतना ही नहीं लीजधारक ने अभी तक अपनी जियोलाजिकल रिपोर्ट भी जमा नहीं करायी है। जियोलाजिकल रिपोर्ट नहीं होने के कारण उनके द्वारा कितना उत्खनन किया गया है एवं क्या यह उत्खनन विधि सम्मत किया गया है अथवा नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। जियोलाजिकल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने के कारण रिजर्व की जानकारी सरकार को नहीं होने के कारण समय पर खनन पट्टा का निलामी करके उत्पादन प्रारंभ नहीं हो पा रहा है। इन सबको देखते हुए उनके अनुरोध जो विधिवम्मत एवं न्याय सम्मत नहीं है, उसे खारिज किया जा रहा है।

आरजेएम के महाप्रबंधक एबी सिंह ने दिया था आवेदन

रामेश्वर जूट मिल ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के बराईबुरू टाटिबा में लौह अयस्क का खनन पट्टा लिया था। संशोधित एमएमडीआर एक्ट 2015 के अनुसार आरजेएम का खनन पट्टा की अवधि 31 मार्च 2020 को समाप्त हो गयी है। आरजेएम के महाप्रबंधक एबी सिंह ने 2 अप्रैल 2020 में उच्च न्यायालय में आवेदन देकर लीज अवधि में खनन कर स्टॉक किये गये लौह अयस्क व मैंगनीज अयस्क के उठाव की अनुमति देने का अनुरोध किया था। उच्च न्यायालय ने पश्चिमी सिंहभूम के जिला खनन पदाधिकारी को उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इस बीच कोरोना काल में जिला खनन पदाधिकारी स्वयं कोरोना से पीड़ित हो गये। विभाग स्तर से निर्णय लेने के लिए 1 सितंबर को सुनवाई हुई। सुनवाई में आरजेएम की तरफ से केके दुबे उपस्थित हुए थे। सुनवाई के दौरान दुबे से अपना पक्ष लिखित रूप से प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।

सर्वश्री बिरला ग्वालियर प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर थी पहले लीज

सरकार ने सर्वश्री बिरला ग्वालियर प्राइवेट लिमिटेड को यह पट्टा दिया था। केके दुबे द्वारा बताया गया कि 1978 में ग्वालियर बिरला प्राइवेट लिमिटेड के नाम से रामेश्वर जुट मिल्स द्वारा लीज ट्रांसफर हुआ है लेकिन कोरोना काल के कारण पदाधिकारियों को जांच करने में कठिनाई हुई। आवेदक केके दुबे भी इससे संबंधित तत्कालीन बिहार सरकार के आदेश को प्रस्तुत करने में असफल रहे।

 पर्यावरण स्वीकृति में दिया बड़बिल का पता

आरजेएम का लीज रिनुवल कब हुआ था एवं इनके द्वारा रिनुवल का आवेदक कब दिया गया था, इससे संबंधित कागाजत प्रस्तुत करने में केके दुबे असमर्थ रहे। लीज में कंपनी का नाम व रजिस्टर्ड पता कोलकाता स्थित बताया गया है लेकिन उनके पर्यावरण स्वीकृति में पता ओडिशा के बड़बिल में बताया जा रहा है। वर्ष 2017 में अनुपूरक लीज का एग्रीमेंट जो रामेश्वर जूट मिल की तरफ से केके दुबे के साथ किया गया था लेकिन बोर्ड आफ डायरेक्टर की मीटिंग की प्रोसिडिंग के अनुसार केके दुबे को प्राधिकृत किया गया था अथवा नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसके बावजूद एग्रीमेंट केके दुबे द्वारा किया गया है।

 

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