टीजीएस यूनियन कोष में 35 लाख, राकेश्वर को है गबन की आशंका Jamshedpur News

किसी भी राज्य में एक नाम की दो यूनियनें नहीं हो सकती।
Publish Date:Sat, 31 Oct 2020 08:04 AM (IST) Author: Rakesh Ranjan

जमशेदपुर, जासं। टाटा स्टील ग्रोथ शॉप की मान्यता प्राप्त टिस्को मजदूर यूनियन में अध्यक्ष पद को लेकर घमासान मचा हुआ है। यूनियन अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय को अब अपनी पद से ज्यादा मजदूरों के पैसे की ज्यादा चिंता जता रही है।

यूनियन कोष में मजदूरों का चंदा का करीब 35 लाख जमा है। उन्हें भय है कि अगर फर्जी यूनियन बनाकर श्रम विभाग  से मान्यता ली जा सकती है तो कहीं फर्जी हस्ताक्षर से मजदूरों का पैसे का गबन भी संभव है। ऐसे में राकेश्वर पांडेय यूनियन के बैंक  खाते को फिलहाल सिल कराने का काम करेंगे ताकि गलत तरीके से यूनियन बनाने वाले पैसे की निकासी नहीं कर सके। 

जाली दस्तावेज बनाकर कराया यूनियन का निबंधन : राकेश्वर

किसी भी राज्य में एक नाम की दो यूनियनें नहीं हो सकती। जानकारी देते हुए राकेश्वर पांडेय ने कहा है कि टिस्को मजदूर यूनियन का पिछला चुनाव नवंबर 2018 में कराया गया था। ऐसे में अब तीन साल बाद नवंबर 2021  में ही चुनाव होगा। इस बीच टिस्को मजदूर यूनियन का कोई चुनाव नहीं कराया गया है। कंपनी की मान्यता प्राप्त  यूनियन टिस्को मजदूर यूनियन है जिसका निबंधन 1976 में हुआ है, उसका संख्या 1583 है। यह यूनियन कंपनी  प्रबंधन व इंटक से मान्यता प्राप्त है।

कैसे मिली मान्यता श्रमायुक्त से होगी शिकायत

राकेश्वर पांडेय ने कहा है कि एक ही नाम की यूनियन का दो निबंधन होना असंभव है। बावजूद यूनियन को श्रम विभाग  ने कैसे मान्यता दी इसकी शिकायत पहले श्रमायुक्त से की जाएगी। वहां अगर बात नहीं बनी हो मामले को कोर्ट तक पहुंचाया जाएगा। कारण कि फर्जी तरीके से कागज बनाकर श्रम विभाग को गुमराह करने का काम हुआ है। जिस तिथि में यूनियन का निबंधन हुआ है, उस दिन विभागीय अवकाश था। इन सभी बातों को न्यायाधिकरण में उठाया जाएगा।

शिवलखन का अंतिम कार्यदिवस आज, होगी कमेटी मीटिंग

शिवलखन सिंह का कंपनी में शनिवार को अंतिम कार्य दिवस है। रविवार से वे कंपनी के पूर्व कर्मचारी कहे जाएंगे। ऐसे में शनिवार को शिवलखन सिंह की अध्यक्षता में एक कमेटी मीटिंग भी होने वाली है। इसमें यूनियन की रणनीति से लेकर शिवलखन को अध्यक्ष बनाने पर चर्चा होगी। शिवलखन सिंह ने कहा कि यूनियन के संविधान में परिवर्तन किया गया है। नए संविधान में यूनियन के पूर्व पदाधिकारी आगे भी अपने पद पर बने रहेंगे। आम सभा में उस पर मुहर लगानी रहती है।

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.