दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के बैंक खाता में जमा है 100 करोड़ रुपये, नहीं हो पा रहा खर्च

दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को जमीन के ऐवज में स्वर्णरेखा परियोजना की ओर से 30 करोड़ तथा एनएचएआइ की ओर से 25 करोड़ रुपये मिले थे। उक्त राशि को 2007-8 से ही बैंक में जमा करा दिया गया है जो आज बढ़कर लगभग 100 करोड़ रुपये हो गया है।

By Rakesh RanjanEdited By: Publish:Mon, 20 Sep 2021 05:42 PM (IST) Updated:Mon, 20 Sep 2021 05:42 PM (IST)
दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के बैंक खाता में जमा है 100 करोड़ रुपये, नहीं हो पा रहा खर्च
आधा दर्जन से अधिक डीएफओ बदल गए, लेकिन किसी ने नहीं दिखाई तत्परता

मनोज सिंह, जमशेदपुर : हाथियों के लिए विश्व विख्यात दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के खाते में 100 करोड़ रुपये जमा हो गया है, लेकिन उक्त राशि का उपयोग आम जनता के विकास के लिए नहीं हो पा रहा है। जानकारी हो कि दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी की जमीन के ऐवज में स्वर्णरेखा परियोजना व नेशनल हाईवे अथॉरिटी आफ इंडिया ने 55 करोड़ रुपये दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को उपलब्ध कराया था।

उस समय निर्णय हुआ था कि रकम बैंक में जमा रहेगी, और उसके ब्याज की रकम से दलमा के 85 गांवों का विकास होगा, लेकिन यह योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। इस संबंध में डीएफओ डा. अभिषेक कुमार ने विभाग के साथ ही पीसीसीएफ को पत्र भी लिखा है।

2007-8 से ही बैंक में जमा है राशि

जानकारी हो कि दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी को जमीन के ऐवज में स्वर्णरेखा परियोजना की ओर से 30 करोड़ तथा एनएचएआइ की ओर से 25 करोड़ रुपये मिले थे। उक्त राशि को 2007-8 से ही बैंक में जमा करा दिया गया है, जो आज बढ़कर लगभग 100 करोड़ रुपये हो गया है। उस समय तत्कालीन सरकार ने आदेश दिया कि मूल राशि बैंक में जमा रहेगी और जमा राशि से मिलने वाले ब्याज की राशि (लगभग दो करोड़) से गांवों का विकास होगा, लेकिन अब तक विकास की रूपरेखा नहीं बन पाई।

क्या कहते हैं ग्रामीण

बैंक में जमा राशि के ब्याज से जब गांव का विकास करना था, तो वन विभाग को कोरोना के कारण लगाए गए लॉकडाउन में स्वरोजगार का साधन उपलब्ध कराना था। सामूहिक रोजगार, कुटीर उद्योग को समिति बनाकर चालू कराना चाहिए था। ग्रामीण के साथ एक-दो बार बैठक हुयी, लेकिन ग्रामीणों के विकास के लिए बैंक में रखी राशि का उपयोग नहीं हो सका। -प्रबोध उरांव, उप प्रमुख, आसनबनी

दलमा के अंदर बसे 85 गांवों के विकास के लिए राशि बैंक में जमा है, जो वन विभाग की लापरवाही से है। यदि उक्त राशि का उपयोग गांवों का विकास के लिए किया जाता तो आज गांव में सड़क नहीं है, पीने का पानी नहीं है, तालाब नहीं है। जिसके कारण गांव के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

-जाेगेंद्र किस्कू, मिर्जाडीह

आधा दर्जन से अधिक डीएफओ बदल गए, लेकिन किसी ने नहीं दिखाई तत्परता दलमा के 85 गांवों के विकास के लिए बैंक में जमा किए गए राशि 55 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ तक पहुंच गई। इस बीच आधा दर्जन से अधिक डीएफओ आए और चले गए, लेकिन किसी ने बैंक में जमा राशि को खर्च करने की जहमत नहीं उठाई। अब तक दलमा में आए डीएफओ में दिनेश कुमार, स्मिता पंकज, एटी मिश्रा, कमलेश पांडेय, सीपी सिन्हा अब डा. अभिषेक कुमार हैं।

राशि खर्च नहीं करने का प्रमुख कारण

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार का जो गाइड लाइन था। उसमें कहा गया था कि ब्याज की रकम से ही 85 गांवों का विकास होगा। लेकिन इसमें शर्त यह थी कि राशि को खर्च करने के लिए गांवों के लिए समिति बनेगा।

समिति का अध्यक्ष होगा

इक्को विकास समित के अध्यक्ष तथा सचिव होगा संबंधित क्षेत्र के फारेस्ट गार्ड। गांव का विकास के लिए जो भी राशि खर्च होना था, उसके चेक पर दस्तखत फारेस्ट गार्ड व इको विकास समिति के अध्यक्ष दोनों को करना था। चूकि खर्च करने वाले समिति में रेंजर, एसीएफ व डीएफओ को दूर रखा गया था, यही प्रमुख कारण था कि किसी भी अधिकारी ने राशि को खर्च करने में अपनी रूचि नहीं दिखाई।

इनकी सुनें

दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के खाते में लगभग 100 करोड़ रुपये जमा हो गया है। किसी भी राशि को खर्च करने के लिए उन्होंने विभाग को पत्र लिखा है। विभाग को पत्र लिखकर राशि को कैंपा खाते में जमा करने की मांग की गयी है। यदि कैंपा खाते में राशि को जमा कर दिया जाए तो, उक्त राशि का उपयोग डीएफओ के स्तर से किया जा सकेगा।

-डा. अभिषेक कुमार, डीएफओ, दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी

विकास के लिए चयनित किए गए दलमा के 85

वन्य प्राणी आश्रयणी के अंतर्गत इन गांवों का विकास के लिए चयन किया गया था। इसमें बोंटा, कुटिमाकुली, भादूडीह, सालदह, हलुदबनी, पातिपानी, मिजाडीह, गेरुवा, ब्रजपुर, पुनसा, नुतनडीह, बाटालुका, आमदा पहाड़ी, ओपो, सारी, लायलम, पगदा, कुमारी, चिमटी, कुकड़, घोड़ाबांधा, जामडीह, झुंझका, खोकरो, बाघरा, कुईयानी, गोबरधुसी, कुंदरुकोचा, बामनी, गागीबुरु, बेलडीहा, बारुडीह, धुसरा, रापाचा, अंधारझोर, डांगडुग, धोबनी, तुगबुरु, जोड़सा, डांगरडीह, कोचरा, सोमाडीह, सुकलाड़ा, डालापानी, झाटीपहाड़ी, कुदलुंग, बेको, कालाझोर, छोटाबांकी, पलाशबनी, भिलाईपहाड़़ी, देवघर, बालिगुमा, बचकामकोचा, तनकोचा, उगडीह, गुरुडुंगरी, टेंगाडीह, झारीडीह, तेतलो, लुपुंगडीह, कितकी, चेलामा, बांधडीह, डाहुबेड़ा, माकुलाकोंचा, कदमडीह, शहरबेड़ा, शिकली, बरालाखा, चिलगु, चाकुलिया, शहरबेड़ा-2, तुलिन, काटझारे, हमंशदा, जराईडीह, हुमिद, कदमझोर, आसनबनी, रामगढ़, कान्दरबेड़ा, पारडीह, डिमना तथा पाटा शामिल हैं।

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