कल बारिश होगी या खिलेगी धूप, किसानों को सब होगा पता

मासूम अहमद हजारीबाग झारखंड में जलवायु परिवर्तन और अचानक होने वाले मौसमी बदलावों का कृ

JagranMon, 26 Jul 2021 07:23 PM (IST)
कल बारिश होगी या खिलेगी धूप, किसानों को सब होगा पता

मासूम अहमद, हजारीबाग : झारखंड में जलवायु परिवर्तन और अचानक होने वाले मौसमी बदलावों का कृषि पर काफी बुरा असर पड़ता है। ऐसे में जरूरी है कि किसानों को यह पता हो कि आगामी दिनों में मौसम में क्या बदलाव आने वाला है। इन सब बातों को देखते हुए भारत सरकार (विज्ञान एवं प्रौद्योगिक विभाग एवं राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केंद्र, नई दिल्ली) की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसमें किसानों को आगामी पांच दिन में मौसम में होने वाले बदलाव तथा इसके अनुकूल विभिन्न कृषि कार्यों को करने की सलाह दी जाती है। हजारीबाग में होली क्रास कृषि विज्ञान केंद्र मौसम आधारित कृषि परामर्श सेवा किसान को सलाहकार बुलेटिन के रूप में विशेष इनपुट प्रदान करता है। केंद्र से जुडे किसान निश्चित रहते हैं कि आगामी पांच दिनों में यहां का मौसम कैसा रहेगा।

केंद्र के वॉट्सएप ग्रुप से जिले भर के 1700 किसान जुडे हुए हैं। साथ ही साथ इस सुविधा का लाभ जिले के 7000 किसानों को कृषक जागरूकता के माध्यम से दिया जा रहा है। इतना ही नहीं एम किसान पोर्टल का लाभ भी 60 हजार किसानों को मिल रहा है। मौसमीय तत्वों जैसे तापमान, वर्षा, हवा, प्रकाश, वाष्पीकरण, पाला, ओस तथा तूफान की जानकारी के आधार पर किसान कृषि कार्य करते हैं। पूर्वानुमान प्राप्त होने से किसान अपनी फसलों को नुकसान होने से पहले ही बचाते हैं साथ ही यह भी पता चलता है की बुआई करने का सही समय है या नहीं, सिचाई करना है या नहीं, उर्वरक डालना है या नहीं, कटाई कार्य शुरू करना है या नहीं, खाद्यान्न का परिवहन तथा भण्डारण का उचित समय क्या होगा, आदि बातों की जानकारी प्राप्त होती है। किसानों को मौसम आधारित कृषि संबंधित परामर्श का प्रसार हॉली क्रॉस कृषि विज्ञान केंद्र की निदेशिका सिस्टर सजीता और वरीय वैज्ञानिक सह नोडल ऑफिसर डॉ. आरके सिंह के निर्देशन से मौसम विभाग के वैज्ञानिक डॉ. सीमा कुमारी के द्वारा बुलेटिन बना कर किसानों को व्हाट्सप्प, रेडियो, अखबार, सोशल मीडिया, कृषक जागरूकता अभियान, लघु संदेश सेवा के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है। किसानों को सही समय पर खरीफ फसलों की बुआई करने से रबी फसल के लिए मिट्टी में नमी की उपलब्धता को लाभ लेते हुए दलहनी तथा तेलहनी फसल की बुआई के सुझाव देते रहते हैं। कौन सा बीज किसानों को लगान चाहिए कितनी दूरी पे लगाना चाहिए, इन सब की जानकारी देते रहते हैं। समय समय पर किसान गोष्ठी, किसान मेला के तहत भी किसानों को जागरूक किया जाता है। केंद्र मुख्य रूप से मौसम वैज्ञानिक डॉ. सीमा कुमारी और उसके टीम सदस्य अभय कुमार के अतिरिक्त केंद्र के अन्य वैज्ञानिक डॉ. प्रशांत कुमार वर्मा, मनोज कुमार सिंह, डॉ. संजीव कुमार सिंह, डॉ. एसएल. यादव, डॉ. पीके.धाकड़, जिला के कृषि पदाधिकारी एवं मत्स्य पदाघिकारी का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

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