सूर्यकुंड में बेकार पड़ा है करोड़ों का भवन

बाटम देखरेख के अभाव में जर्जर हुआ नवनिर्मित भवन गायब हो रहे नलके व बिजली उपकरण सुरे

JagranSat, 19 Jun 2021 09:33 PM (IST)
सूर्यकुंड में बेकार पड़ा है करोड़ों का भवन

बाटम

देखरेख के अभाव में जर्जर हुआ नवनिर्मित भवन, गायब हो रहे नलके व बिजली उपकरण

सुरेश पांडेय,

बरकट्ठा (हजारीबाग) : बरकट्ठा प्रखंड क्षेत्र के मशहूर धार्मिक पर्यटन स्थल सूर्यकुण्ड परिसर में तत्कालीन विधायक प्रो.जानकी प्रसाद यादव के प्रयास से करोड़ों रुपये का लागत से विकास कार्य को धरातल पर उतारा गया। कार्य धरातल पर उतरा भी मगर उचित देखरेख के अभाव में करोड़ों रुपए की लागत से बना भवन बेकार पड़ा है। रखरखाव की स्थिति यह है कि परिसर में झाडू लगाने वाला कोई नहीं है। बताते चलें कि पर्यटन विभाग झारखंड सरकार के द्वारा एशिया के उष्णतम कुंडों मे से एक सूर्यकुण्ड में आने वाले दूसरे राज्यों के पर्यटकों एवं स्थानीय सैलानियों को सुख-सुविधा उपलब्ध कराने के ख्याल से आधुनिक सुविधाओं से लैस भवनों का निर्माण कार्य किया गया। लगभग चार करोड़ 68 लाख रूपये की लागत से गेस्ट हाउस, कॉटेज, स्नानागार एवं शेड का निर्माण पूरा किया गया है। मगर दुर्भाग्य है कि इसका सदुपयोग नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में हालत यह हेै इसे देखने वाला कोई नहीं है और इन भवनों में शादी-विवाह व अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम किया जा रहा है। इससे सरकार का लाखों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है। इधर भवन में लगे बिजली उपकरण व पानी के नलके देखभाल के अभाव में गायब हो रहे हैं। पूरे भवन सहित बिल्डिग में लगे पानी टंकी से लेकर सामग्रियों की हालत जर्जर हो गई है। बताते चलें कि विगत दिनों पर्यटकों के यात्रा को सुलभ बनाने के ख्याल से डिजिटल बोर्ड प्रवेश द्वार का निर्माण कार्य किया गया था, जो आंधी-तूफान के पहले बारिश में ही उखड़ गया था। सूर्यकुण्ड में प्रत्येक वर्ष सैकड़ों जोडे का विवाह होता है, परंतु व्यवस्था रहने के बाद भी व्यवस्था नहीं मिल पाने से आने वाले सैलानियों में असंतुष्टि साफ नजर दिखाई देती है। व्यवस्था के नाम पर दर्जनों शौचालय का निर्माण कार्य किया गया है, परंतू पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण सभी नवनिर्मित शौचालय के दरवाजों पर ताले लटका हुआ है। धार्मिक स्थल सूर्यकुण्ड में झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों सहित सैकड़ों की संख्या में लोग दूसरे प्रदेशों से जैसे आंध्रप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उतरप्रदेश, बिहार से लोग भ्रमण के लिए आते हैं। मगर व्यवस्था होने के वावजूद सुविधा नहीं मिलने पर स्थानीय सरकार को कोसते नजर आते हैं। स्थानीय लोगों में भी इस कुव्यवस्था को लेकर आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि संवेदक के द्वारा भवन निर्माण कार्य कर दिया गया है। परंतू इसका देखरेख करने वाला कोई नहीं है। विगत महीने सूर्यकुण्ड विकास समिति का भी गठन किया गया था परंतू कोरोना काल के चलते समिति का भी कार्य शिथिल हो गया है।

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