तीन साल की उम्र में पिता को खोया, अब बेटे को दे रहा हूं मुखाग्नि

लीड के साथ श्मशान घाट पर मुखागिन देते समय भाव विह्वल हो गए जज के पिता हे भगवान किस पाप क

JagranThu, 29 Jul 2021 08:23 PM (IST)
तीन साल की उम्र में पिता को खोया, अब बेटे को दे रहा हूं मुखाग्नि

लीड के साथ

श्मशान घाट पर मुखागिन देते समय भाव विह्वल हो गए जज के पिता

हे भगवान किस पाप की सजा आप मुझे दे रहे हैं, ऐसा दिन क्यों दिखाया

संवाद सहयोगी, हजारीबाग : मिलन सार और सबके सुखदुख में शामिल होने वाले दिवंगत जिला जज उत्तम आनंद के पिता खीरगांव श्मसान घाट में मुखाग्नि देते समय भाव विह्वल हो गए। अपनी दर्द बयां करते हुए कहा कि जब मैं तीन साल का था तो मेरे पिता का निधन हो गया। मैं उनका केवल मुंह देख सका था। मेरा कोई भाई बहन नहीं है। यह मेरा दुर्भाग्य की मैं अपने जीते जी अपने बेटे को मुखाग्नि दे रहा हूं। पता नहीं कौन सा पाप किया था, मेरे बच्चों का और मेरे बेटे का क्या दोष था। उसने तो अपनी ड्यूटी ईमानदारी से निभाया। 70 वर्षीय सदानंद अपने पोते क्रिशु तो अभी अपने आप को संभाल रहे थे। दोनों ने एक साथ दिवंगत आनंद को मुखाग्नि दी।

मैं चाहती थी नीट, पर अब पिता का सपना पूरा करने के लिए करूंगी क्लाइट

पिता की साजिश के तहत हत्या का आरोप लगाती हुई छोटी बेटी बरखा भावुक थी। दादा के साथ अपने छोटे भाई को संभाल रही बरखा बेहद व्यथित थी। खिरगांव शमसान घाट पर अपने पिता को अंतिम विदाई देने पहुंची बरखा तीन भाई बहनों में दूसरे नंबर पर है। श्मशान घाट पर उपस्थित न्यायिक पदाधिकारियों के समझ मार्मिक शब्दों में घटना की जानकारी दी। बताया कि मेरे पिता चाहते थे कि मैं न्यायिक सेवा में जाऊं और तैयारी शुरू कर दू, जबकि मैं नीट की तैयारी करना चाहती थी। परंतु इस घटना के बाद अब मैं पिता का सपना पूरा करूंगी और न्यायिक सेवा में जाने के लिए तैयारी करुंगी।

पापा के साथ क्रिकेट खेलता था, अब मैं किसके साथ खेलेगें : क्रिशु

10 साल का क्रिशु अपने 3 भाई बहनों में सबसे छोटा है। खिरगांव श्मसान घाट में क्रिशू ने बताया कि वह पापा के साथ क्रिकेट खेलता है और उस क्रिकेट बहुत पसंद है । वह बॉलिग और बैटिग दोनों करता है। कोर्ट से आने के बाद वह पिता के साथ क्रिकेट खेलता था। अब वह चितित है कि क्रिकेट किसके साथ खेलेगा।

छोटे भाई सुमन के पुत्र को भी साथ रखते थे उत्तम आनंद

दिवंगत हो चुके उत्तम आनंद अपने छोटे भाई सुमन का बेटे को भी अपने साथ रख रहे थे। छोटा भाई सुमन बहुत ही मार्मिक शब्दों में अपनी भाई और परिवार के बारे में जानकारी दी। बताया कि एक माह पूर्व एक दुर्घटना में उनके पैर में चोट लगी थी। उनके बड़े भाई प्रतिदिन पैर ठीक हुआ है कि नहीं की चिता कर रहे थे। कहां की भैया भले ही हमारे साथ नहीं रहते थे ,परंतु हर दिन पूरे परिवार की चिता करते थे । उन्हें इस बात का दुख है कि अपने भाई को दुख की घड़ी में साथ खड़ा हो पाए ,ना ही उन्हें एक बूंद पानी दे सके । अब उन्हें एक ही आशा है कि घटना में शामिल सभी लोगों को फांसी हो।

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