बौद्धों के वज्रयान शाखा का साधना केंद्र रहा होगा बहोरनपुर

बौद्धों के वज्रयान शाखा का साधना केंद्र रहा होगा बहोरनपुर

अरविद राणा हजारीबाग सदर प्रखंड से महज दस किलोमीटर की दूरी पर पूर्व दिशा में स्थित बह

JagranMon, 19 Apr 2021 09:53 PM (IST)

अरविद राणा, हजारीबाग : सदर प्रखंड से महज दस किलोमीटर की दूरी पर पूर्व दिशा में स्थित बहोरनपूर आज से एक हजार साल पूर्व बौद्धों का तंत्र साधना का बड़ा केंद्र रहा होगा। एक छोटे से स्थान पर खोदाई में प्राप्त अवशेष इस बात की पुष्टि कर रही है। बहोरनपुर वज्रायन शाखा के अनुयायी का केंद्र था। बौद्ध धर्म में मूलत: तीन शाखाएं है। इनमें पहला हीनयान दूसरा महायान और तीसरा वज्रयान शाखा है। हजारीबाग का बहोरनपूर वज्रयान शाखा का महत्वपूर्ण केंद्र था। विशेषज्ञों के अनुसार यह नौवीं से 11 शताब्दी चरमोत्कर्ष पर था। यहां बुद्ध से जुड़े उच्च कोटि के संत साधना किया करते थे। वज्रयान शाखा में ही तंत्र मंत्र साधना की व्यवस्था रही है। वज्रयान शाखा के लोग मूर्ति पूजा करते थे। इस काल खंड में मूर्ति पूजा और प्रबल हुई। संत घने जंगलों में मोक्ष, महापरिनिवा्रण की प्राप्ति या गुढ़ रहस्य को जानने हेतु साधना को आधार बनाते थे। बहोरनपुर में एक छोटे स्थान पर हुए खोदाई में प्राप्त प्रतिमाएं जैसे भूमि स्पर्श मु्रदा में गौतम बुद्ध, मां तारा, अवलोकितेश्वर की प्रतिमा तथा इनके विविध स्वरुप, मंजू श्री ज्ञान के देवता, मारिची से संबंधित सप्त सुकर के उकेरे हुए प्रतिमा, साधना बैठक पात्र , ध्यान बुद्धा के पंक्तिबद्ध प्रतिमा, ध्यानी बुद्धा के अनेकों पट, आश्रम के उपर रखे जाने वाला घंट कुंट, सप्त रत्न के अवशेष आदि जो प्राप्त हुए है। यह बताने के लिए काफी है कि बहोरनपूर बौद्ध बिहार के लिए बड़ा वज्रयान केंद्र रहा होगा।

छह फुट आठ इंच की है अवलोक्तितेश्वर की प्रतिमा

खोदाई स्थल पर दो दर्जन के करीब प्रतिमा प्राप्त हुई है। इनमें एक प्रतिमा बौद्धों के देवता अवलोक्तिेश्वरी की है। यह छठ फिट आंठ इंच उंची और करीब तीन फिट व्यास की है। इसके अलावा भगवान बुद्ध का जमीन में हाथ स्पर्श करती तीन फिट उंची प्रतिमा, मंजू श्री ज्ञान के देवता की प्रतिमा प्रमुख है।

खोदाई में सामने आया साधना केंद्र का आधार

बहोरनपूर में हुए खोदाई में अबतक दो बौद्ध विहार होने की पुष्टि हुई है। इनमें एक ध्यान केंद्र तथा दूसरा आवास सह पूजा स्थली है। साधना केंद्र में जहां तीन कमरे बने है,वहीं आवास सह पूजा स्थली में अबतक सात कमरे सामने आए है, संभावना है कि यहां 21 कमरे है जो आगे खोदाई में प्राप्त होंगे।

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