कोरोना काल में एचआइवी जांच हुआ प्रभावित

कोरोना काल में एचआइवी जांच हुआ प्रभावित

निर्मल सिंहगुमला एड्स संक्रमण के लिहाज से सी श्रेणी में शामिल गुमला जिला में कोरोना संक्रमण

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 10:31 PM (IST) Author: Jagran

निर्मल सिंह,गुमला : एड्स संक्रमण के लिहाज से सी श्रेणी में शामिल गुमला जिला में कोरोना संक्रमण के कारण जांच कार्य आंशिक रूप से प्रभावित हुआ है। पांच माह तक जांच कार्य प्रभावित रहने से सदर अस्पताल और प्रखंडों में लक्ष्य के ²ष्टिकोण से यह जिला पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है। मई माह तक इस जिले में मात्र 1885 लोगों को एड्स जांच संभव हो सका। सामान्य कोटि के लोगों की जांच का लक्ष्य चालू वित्तीय वर्ष में 11 हजार और गर्भवती महिला के जांच का लक्ष्य 30 हजार निर्धारित किया गया था। अप्रैल मई में 187 सामान्य मरीजों की जांच हुई जिसमें एक मरीज संक्रमित पाया गया। जिला और प्रखंड में कुल 1698 गर्भवती महिलाओं की जांच हुई जिसमें एक गर्भवती महिला एड्स संकमित पाई गई। वित्तीय वर्ष 2019-20 में 16447 लोगों की जांच की गई। सामान्य जांच के लक्ष्य 11 हजार के विरूद्ध 5447 अधिक लोगों की जांच हुई थी। जांच का प्रतिशत 149 रहा। एचआईवी पॉजिटिव मरीज 17 मिले। महिलाओं के जांच का लक्ष्य 29792 था। जांच हुई 33 हजार की। उपलब्धि 103 फीसद रहा। कुल 13 गर्भवती महिलाएं पॉजिटिव पाई गई थी। पिछले वर्ष हुई जांच और निकले परिणाम की अपेक्षा इस साल कोरोना के कारण जांच और परिणाम कम है। वैसे इस जिला में कुछ एचआईवी मरीजों की संख्या 201 है। नगर क्षेत्र में मरीजो की संख्या 40 है। सर्वाधिक मरीज गुमला प्रखंड में पाए गए हैं। इस जिला में पहला एचआईवी पाजिटिव मरीज वर्ष 2006 में पाया गया था। गुमला में जल्द खुलेगा एआरटी सेंटर

गुमला सदर अस्पताल में एंटी रेक्टरो वायरल ट्रीटमेंट केन्द्र खोलने का प्रस्ताव पारित हो चुका है। लेकिन अभी तक यह केन्द्र नहीं खुला है। इस केन्द्र के खुल जाने से एचआईवी मरीजों का इलाज यहां संभव हो सकेगा। केन्द्र में रेक्टरों वायरल थेरेपी की सुविधा मिलेगी वैसे गुमला जिला एचआईवी जांच के मामले में पूरे राज्य में अब्बल रहा है। डुमरी और बिशुनपुर में कम हो रही है जांच

जारी प्रखंड को छोड़कर जिले के सभी सामुदायिक केन्द्रों में एचआईवी जांच की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन डुमरी और बिशुनपुर में जांच बहुत कम हो रहा है इसका कारण लोगों में जागरूकता की कमी है। जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। गर्भवती और यक्ष्मा रोगी मरीजों की निश्चित रूप से जांच कराई जा रही है। सृजन फाउंडेशन नामक स्वयं सेवी संस्था को तारगेट इन्वेंशन प्रोगाम के तहत प्रचार प्रसार का जिम्मा दिया गया है। यह सरकार महिला सेक्स वर्करों के बीच काम कर रही है और लोगों को जागरूक कर रही है। विशेष कार्यक्रम का नहीं है निर्देश

पराशर्मी युगांत दूबे का कहना है कि विश्व एड्स दिवस पर राज्य से विशेष कार्यक्रम का निर्देश नहीं है। कार्यक्रम के लिए आवंटन भी नहीं मिला है। सदर अस्पताल में चिकित्सकों और कर्मचारियों को रेड रिबन लगाने का काम किया जाएगा। उसके बाद दिन के 11 बजे से केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन के आनलाइन कार्यक्रम में भाग लेंगे। परामर्शी के अनुसार 25 से 35 वर्ष आयु के अधिसंख्य रोगी पाए गए हैं। जागरूकता के माध्यम से इस बीमारी के बारे में लोगों को बताया जा रहा है।

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