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मदद की बात तो दूर, किसानों को कर्ज देने में भी शिथिलता

मदद की बात तो दूर, किसानों को कर्ज देने में भी शिथिलता
Publish Date:Tue, 11 Aug 2020 09:36 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता,गुमला : गुमला जिला में धान मुख्य फसल है। धान रोपनी का काम अब समाप्ति पर है। किसान लागत पूंजी नहीं होने के कारण खाद की खरीदारी करने और धान की फसल से आशातीत उत्पादन लेने के लिए छटपटा रहे हैं। मुख्यमंत्री कृषि आशीर्वाद योजना के बंद हो जाने से राज्य के किसानों को अब किसान क्रेडिट कार्ड ही सहारा रह गया है। केसीसी से ऋण निकाल कर किसान खेती करने की चाहत में हैं। लेकिन बैंकों की शिथिलता किसानों की सफलता में गतिरोध पैदा कर रहा है।

केसीसी से संबंधित प्रगति प्रतिवदेन की हुई मांग

जिला कृषि पदाधिकारी एसएन महतो भी महसूस करते हैं कि अब किसानों के लिए केसीसी ऋण ही सहारा रह गया है। वे बताते हैं कि सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी, प्रभारी कृषि पदाधिकारी, सभी तकनीकी एवं सभी सहायक तकनीकी प्रबंधक को कृषि ऋण की प्रगति प्रतिवदेन की मांग की है। गुमला के उपायुक्त ने अधिकतम किसानों को केसीसी उपलब्ध कराने और ऋण मुहैया कराए जाने पर बल दिया है। उपायुक्त ने केसीसी से संबंधित प्रगति पर असंतोष व्यक्त किया था और 24 जून की बैठक में त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। उसी आलोक में जिला कृषि पदाधिकारी ने अपने अधीनस्थ कर्मियों को प्रगति प्रतिवेदन जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। केसीसी के लिए अधिक से अधिक आवेदन पत्र भरवाने और उसे बैंकों से स्वीकृति दिलाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा है। जिला कृषि पदाधिकारी ने अपने अधीनस्थों के खिलाफ क्षोभ प्रकट करते हुए कहा है कि दूरभाष पर दिए गए निर्देश के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा है कि पीएम किसान के वैसे लाभूक जो केसीसी से आच्छादित नहीं है और सामान्य कृषक भी समूह का आवेदन बैंकों में भेजना सुनिश्चित करने और बैंक प्रबंधकों से संपर्क कर आवेदन पत्रों को स्वीकृति दिलाने को कहा गया है। 14 अगस्त तक साप्ताहिक प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया गया है। क्या है स्थिति

भरे गए फार्म की संख्या बैंकों को भेजे गए फार्म स्वीकृत फार्म की संख्या

पूर्व में 1089 1089 530

वर्तमान में 1016 908 42

कुल 2105 1997 572

किसानों की मिली ऋण राशि एक करोड़ 32 लाख 50 हजार कोट

बैंकों से समन्वय बनाने का काम किया जा रहा है। अग्रणी जिला प्रबंधक से बात की गई है। अधिक से अधिक किसानों को केसीसी उपलब्ध कराने और कृषि कार्य के लिए ऋण मुहैया कराए जाने की दिशा में त्वरित कार्रवाई की गई है। हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द किसानों को कृषि ऋण मिले जिससे किसान उत्पादन का लाभ उठा सकें।

एस एन महतो, जिला कृषि पदाधिकारी,गुमला।

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