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बंदियों को राहत दिलाने बार काउंसिल से फरियाद

बंदियों को राहत दिलाने बार काउंसिल से फरियाद

गिरिडीह कोरोना संक्रमण काल में सबसे ज्यादा प्रभावित जेल के बंदी हो रहे हैं। इसे लेकर ि

JagranSun, 09 May 2021 07:38 PM (IST)

गिरिडीह : कोरोना संक्रमण काल में सबसे ज्यादा प्रभावित जेल के बंदी हो रहे हैं। इसे लेकर जिला अधिवक्ता संघ ने स्टेट बार काउंसिल से फरियाद की है। संघ के महासचिव चुन्नूकांत ने कहा कि 14 अप्रैल से राज्य के सभी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से अलग हैं। इससे राज्य में विकट स्थिति पैदा हो गई है। न्यायिक कार्य से अलग होने का फैसला समय की मांग है। अधिवक्ता अपने पेशेवर जिम्मेदारी के लिए आगे आते हैं, तो सीधा-सीधा उनके जीवन पर खतरा है जो समाज के लिए भी परेशानी का सबब होगा। परिस्थिति के अनुसार लॉकडाउन की अवधि और आगे लंबी दिख रही है। दूसरी तरफ जेल में बंद लोगों के स्वजन व बंदियों के समक्ष भी परिस्थिति विकट हो गई है। पुलिस प्रशासन की अपनी बाध्यताएं हैं। अभियुक्तों की गिरफ्तारी एक सतत प्रकिया है, लेकिन न्यायिक कार्य नहीं होने से जेल में बंदियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में जेल प्रशासन के समक्ष भी कई व्यवहारिक परेशानी है। साथ ही बंदियों के स्वजन भी परेशान हैं। अधिवक्ता साथियों पर ऐसे बंदियों के वकालत करने का लगातार दबाव है। पूर्व में भी स्टेट बार काउंसिल को कुछ सुझाव दिया गया था। न्याय प्रशासन से भी इसी तरह की बात कही गई थी। बार काउंसिल से हाई कोर्ट को आग्रह किया जाए की छोटे-छोटे मामले में जो बंदी जेल में उनको पर्सनल बांड पर छोड़ा जा सके। पुलिस प्रशासन को भी यह निर्देशित किया जाए कि छोटे-छोटे मामलों में लोगों की अभी गिरफ्तारी नहीं हो। जेल में लगातार बंदियों की संख्या बढ़ रही है और जेल से उनके छूटने का कोई रास्ता नहीं निकाला गया तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है।

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