जिसका गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं : विशुद्ध सागर

पारसनाथ (गिरिडीह) आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ सम्म

JagranSun, 25 Jul 2021 12:43 AM (IST)
जिसका गुरु नहीं, उसका जीवन शुरू नहीं : विशुद्ध सागर

पारसनाथ (गिरिडीह) : आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर जी स्थित 13 पंथी कोठी में आयोजित समारोह में शनिवार को कहा कि जिसके जीवन में गुरु नहीं उसका जीवन शुरू नहीं। जितनी योग्यता गुरु के अंदर होनी चाहिए उतनी योग्यता शिष्य के अंदर भी होनी चाहिए। जब तक पात्र नहीं होता है तब तक भगवान की वाणी नहीं खिरती है।

आचार्य ने कहा कि माला फेरकर मुनि बनना सरल है लेकिन जिनवाणी को झेल कर मुनि बनना बहुत कठिन है। धरती पर कोई क्षमा की मूर्ति कोई होती है उसका नाम दिगबर मुनि है।

उन्होंने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि दिगम्बर मुनि कभी उपसर्ग करने वाले पर भी उपसर्ग नहीं करता है। वह उसे दया से देखता है। जिसका संसार दीर्घ है वह क्षमा का भाव नहीं ला सकता है। जिसकी जड़े सुखी है वे क्षमा नहीं कर सकता है लेकिन जिसकी लताएं ही गीली वह ही क्षमा को धारण कर पाता है। तिलक और माला के राग में किसी को भी गुरु मत चुन लेना।

जैन दर्शन नाम को नहीं पूजता है जैन दर्शन तो मात्र गुण को पूजता है। नि‌र्ग्रन्थ मुनि का मार्ग मांगने का मार्ग नहीं है। गुरु के प्रति असीम श्रद्धा होकर ही गुरु बनाना चाहिए। जो महावीर की चर्या से जो मिले उनसे मिलकर ही मन मिल पाता है। ये भिखारियों का मार्ग नहीं है ये भिक्षुओं मार्ग है। पूजा-अर्चना में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इससे मधुबन का माहौल भक्तिमय बना हुआ है। यह कार्यक्रम लगातार चलता रहेगा।

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