बालमुकुंद फैक्ट्री में मिक्सर में फंसकर दो श्रमिकों की मौत

गिरिडीह गिरिडीह-टुंडी मार्ग पर चतरो इलाके में स्थित लोहे की सरिया बनाने वाली बालमुकुंद फ

JagranSat, 31 Jul 2021 11:41 PM (IST)
बालमुकुंद फैक्ट्री में मिक्सर में फंसकर दो श्रमिकों की मौत

गिरिडीह : गिरिडीह-टुंडी मार्ग पर चतरो इलाके में स्थित लोहे की सरिया बनाने वाली बालमुकुंद फैक्ट्री में शुक्रवार की देर रात हादसा हो गया। मिक्सर मशीन की चपेट में आने से दो श्रमिकों की मौत हो गई। मरने वालों में ताराटांड़ थाना क्षेत्र के जोधपुर गांव के 52 वर्षीय टेंटू यादव व गांडेय थाना क्षेत्र के रकसकुट्टो गांव के 55 वर्षीय कीनू तूरी शामिल हैं। सूचना पाकर महतोडीह पुलिस पिकेट व मुफस्सिल थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और अधिकारियों व कर्मियों से पूछताछ की। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

श्रमिकों ने बताया कि शुक्रवार रात दो बज रहे थे। दोनों कर्मी मिक्सर मशीन पर काम कर रहे थे। ये दोनों अनुभवी थे व उनको 10 साल से अधिक काम करते हो गया था। इसी दौरान दोनों मिक्सर मशीन में फंसकर बुरी तरह जख्मी हो गए। उनको तत्काल इलाज के लिए अधिकारी निजी नर्सिंग होम ले गए। वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम के बाद शवों को स्वजनों को सौंप दिया गया है। पीड़ित परिवार व अन्य लोगों के साथ फैक्ट्री प्रबंधन ने वार्ता की है। इसमें नियमानुसार मुआवजा देने पर प्रबंधन ने सहमति जताई है।

मजदूरों की मौत मामले में फैक्ट्री प्रबंधन पर दर्ज हो हत्या की प्राथमिकी : भाकपा माले ने बालमुकुंद फैक्ट्री में ड्यूटी करने के दौरान मारे गए गांडेय तथा ताराटांड़ थाना क्षेत्र के दो मजदूर क्रमश: किनू तुरी व टेटू यादव को लेकर फैक्ट्री प्रबंधन के ऊपर लापरवाही बरतने तथा मजदूरों की सुरक्षा के मानकों का उल्लंघन करने के कारण हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है। कहा है कि सिर्फ मुआवजा देने से काम नहीं चलेगा। दोनों के आश्रितों को पेंशन और फैक्ट्री में रोजगार भी दिया जाए।

पार्टी के राज्य कमेटी सदस्य राजेश कुमार यादव तथा माले के गिरिडीह विधानसभा प्रभारी राजेश सिन्हा ने बताया कि जब भी इस तरह की कोई घटना होती है तो सिर्फ मुआवजा देकर मामले को रफा-दफा कर दिया जाता है। बड़़ा सवाल फैक्ट्रियों में मजदूरों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ के कारण लगातार हो रही मौतों पर रोक लगाने को लेकर है।

माले नेताओं ने इस संबंध में आवश्यक जांच पड़ताल के बाद कहा कि दोनों से संबंधित कोई कागजी दस्तावेज भी शायद फैक्ट्री के पास नहीं है। नियमानुसार फैक्ट्री के कामगारों के लिए उपरोक्त कागजात होना जरूरी है ताकि किसी कामगार की मौत होने पर उनकी पत्नी को आजीवन पेंशन तथा एक स्वजन को फैक्ट्री में रोजगार भी दिया जा सके। कहा कि झारखंड में शासन बदलने के बावजूद फैक्ट्रियों की मनमानी और मजदूरों का शोषण लगातार जारी है। उन्होंने जिला प्रशासन तथा झारखंड सरकार से इस मामले को संज्ञान में लेकर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

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