मरछा हो गया श्रीबंशीधर नगर का बभनीखाड़ डैम, निगल रहा लोगों को

संवाद सूत्र श्री बंशीधर नगर (गढ़वा) नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या पांच नयाखाड़ गांव स्थित ब

JagranSun, 17 Oct 2021 07:02 PM (IST)
मरछा हो गया श्रीबंशीधर नगर का बभनीखाड़ डैम, निगल रहा लोगों को

संवाद सूत्र, श्री बंशीधर नगर (गढ़वा): नगर पंचायत क्षेत्र के वार्ड संख्या पांच नयाखाड़ गांव स्थित बभनीखाड़ डैम में मछली पकड़ने गए गांव के एक किशोर सहित चार युवकों की मौत डैम के फाटक में फंस जाने के कारण शारदीय नवरात्र के महानवमी तिथि गुरुवार की रात हो गई। मौत के बाद गांव में 2 दिन बाद भी मातम छाया हुआ है। गांव के लोग अभी भी शोक व गम से उबर नहीं पाए हैं। बताते चलें कि गत माह 3 सितंबर को 11 बजे दिन में स्नान करने के दौरान जंगीपुर उरांव टोला की दो सगी नाबालिक चचेरी बहनों की मौत इसी बभनीखाड़ डैम के तेतरिया खाड़ में गहरे पानी में डूब जाने से हो गई थी। इस तरह डेढ़ माह के भीतर ही आधा दर्जन लोगों को डैम ने निगल लिया। मछली पकड़ने के दौरान बभनीखाड़ डैम के गेट के फाटक में फंसकर मरने वालों में नयाखाड़ गांव निवासी देवा उरांव के 25 वर्षीय पुत्र बबलू उरांव, स्व विष्णु उरांव के 25 वर्षीय पुत्र अनिल बाखला, नरकू उरांव के 17 वर्षीय पुत्र अमरेश उरांव व विश्वनाथ उरांव के 22 वर्षीय पुत्र नागेंद्र उरांव का नाम शामिल है।

- बभनीखाड़ डैम हो गया है मरछा: नयाखाड़ गांव निवासी उमेश उरांव, विश्वनाथ उरांव, नरकू उरांव, देवा उरांव, शांति देवी आदि ने कहा कि बभनीखाड़ डैम मरछा हो गया है। जो भी डैम में जा रहा है उसकी मौत हो जा रही है। लिहाजा ग्रामीणों को डैम के पानी में घुसकर मछली पकड़ने पर पाबंदी लगा दिया गया है। बावजूद लोग रात के अंधेरे में चुपके से मछली पकड़ने डैम के पानी में उतर जा रहे हैं। बकौल ग्रामीण गत माह 3 सितंबर को जंगीपुर के उरांव टोला निवासी श्याम बिहारी उरांव की 13 वर्षीय पुत्री सुमित्रा कुमारी व अशोक उरांव की 12 वर्षीय पुत्री मनीषा कुमारी की मौत स्नान करने के दौरान डैम के गहरे पानी में डूबने से होने के बाद डैम में उतर कर मछली पकड़ने के लिए पूरे ग्रामीणों को मना किया गया है। बावजूद लोग 2 माह से रात के अंधेरे में डैम के पानी में उतर कर मछली पकड़ रहे हैं। बभनीखाड़ डैम पूरी तरह से मरछा (खूनी दरिया) बन गया है। यह डैम अब लोगों की बलि लेने लगा है।

- बभनीखाड़ डैम के काफी निकट है मृतकों का घर: बभनीखाड़ डैम के काफी करीब है चारों मृतकों का घर। घटनास्थल से सबसे नजदीक करीब 50 गज की दूरी पर स्व बबलू उरांव का घर है। इसके बाद किशोर अमरेश उरांव का घर है। बभनीखाड़ डैम के बांध से या घटना स्थल से करीब दो सौ मीटर की दूरी पर अनिल बाखला व नागेंद्र उरांव का घर है। शारदीय नवरात्र के महानवमी तिथि की रात मछली पकड़ने के दौरान एक किशोर सहित जिन चार युवकों की मौत गहरे पानी में डूबने से हो गई वे सभी पिछले 2 माह से उसी डैम में मछली पकड़ते थे। अन्य दिनों की भांति उस रात भी मछली पकड़ने के लिए डैम के पानी में उतरे और डैम के फाटक में फंसकर पानी में ही काफी देर तक रह गए। जिसके कारण चारों की मौत हो गई।

- मृतकों के घर की माली हालत है खस्ता: बभनीखाड़ डैम में मछली पकड़ने के दौरान जिन चार युवकों की मौत हुई है उनके घर की माली हालत काफी खराब है। मृतक ही मेहनत मजदूरी व मछली बेचकर अपने-अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। स्व अनिल बाखला अपने घर का एकमात्र पुरुष सदस्य था। अनिल के पिता की मौत करीब 2 वर्ष पूर्व मेराल थाने के बाना गांव के निकट राष्ट्रीय राजमार्ग 75 पर सड़क दुर्घटना में हो गई है। अनिल के पिता स्व विष्णु उरांव की मौत के बाद परिवार के सदस्यों की भरण-पोषण की जवाबदेही अनिल के कंधों पर आ गई थी। अनिल के मौत के बाद मां शांति देवी, पत्नी पिकी देवी व 1 वर्ष की एक लड़की घर में बचे हैं। स्व नागेंद्र उरांव के तीन लड़का व एक लड़की है। घर की माली हालत खराब है। नागेंद्र मेहनत मजदूरी व मछली बेचकर घर परिवार चलाता था। मौत के बाद नागेंद्र की पत्नी इंद्रावती देवी पर स्वयं के साथ-साथ चार छोटे बच्चों की भी भरण-पोषण की जवाबदेही आ गई है। नागेंद्र के मौत के बाद पत्नी इंद्रावती की हालत खराब है। मृतक अमरेश उरांव के पिता नरकू उरांव ने बताया कि अमरेश की शादी नहीं हुई थी। अमरेश मेहनत मजदूरी कर घर का खर्चा चलाता था। मुझे सरकारी राशन भी नहीं मिलता है। घर की आर्थिक स्थिति दयनीय है। मृतक बबलू उरांव का एक लड़का व दो लड़की है। बबलू की पत्नी संगीता देवी ने रोते हुए कहा कि अब इन बच्चों का भरण-पोषण कौन करेगा। किसके सहारे मेरी जिदगी बीतेगी। कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि अब क्या करें। बबलू मेहनत मजदूरी व मछली बेचकर घर परिवार चलाता था।

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