सूख गया पोखरा, हैदरनगर में जलसंकट गहराया

बाटम सहेज लोग बूंद लोगो सूखे पोखरे में कचरा डाल रहे हैं लोग आसपास के जलस्रोतों से पानी आना

JagranMon, 03 May 2021 06:00 PM (IST)
सूख गया पोखरा, हैदरनगर में जलसंकट गहराया

बाटम

सहेज लोग बूंद लोगो

सूखे पोखरे में कचरा डाल रहे हैं लोग, आसपास के जलस्रोतों से पानी आना हुआ बंद संवाद सूत्र, हैदरनगर (पलामू): हैदरनगर प्रखंड की लाइफ लाइन कहे जाने वाला हैदरनगर पूर्वी पंचायत का कुम्हार पट्टी स्थित पोखरा सूख गया है। गर्मी शुरू होते ही पोखरा सूख गया है। हैदरनगर के लिए जल संचय का यह एक मात्र विकल्प है। इस पोखरा के पूरी तरह से सूख जाने पूरे क्षेत्र का भू-जल स्तर गिरा है। इससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इससे पोखर के सट्टे खेत खलिहान में पटवन की समस्या पैदा हो गई। इधर सूखा पोखरा देख लोग घरों का कचड़ा इसमें डाल रहे हैं और इसके अंदर शौच कर रहे हैं। इससे आसपास के लोग में दुर्गंध व साथ साथ बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। इस पोखरा के सूखा पड़ने से जानवरों के लिए पीने के पानी का भी समस्या उत्पन्न हो गई है। इससे पशुपालक व किसान परेशान हैं। लोगों का कहना है कि सरकार की उदासीनता व अधिकारियों की उपेक्षा के कारण यह समय के पूर्व ही जलविहीन हो गया है। नहर के दूर होने के कारण इसके जल संचय का एक मात्र विकल्प वर्षा का पानी ही है। पोखरा में पानी ना होने के कारण रोज-मरा के जीवन में परेशानी हो रही है। पोखर का समय- समय पर सफाई होते रहने की जरूरत है। पोखरा में विगत तीन दशक से सफाई नहीं हुई है। इस कारण कई जलस्रोत बंद हो गए हैं। सफाई होती रहती तो यह पोखर स्वत: स्वच्छ बना रहता। कई लोगों ने कहा कि इस तालाब का सौंदर्यीकरण कर पिड पर पेड़ लगाने की आवश्यकता है। इससे अनावश्यक मिट्टी कटाव रुकेगा। पानी का संचय लंबे अवधि तक बना रहेगा। पेड़ लगाने से वातावरण भी शुद्ध रहेगा। बाक्स: ़फोटो 03 डीजीजे 03 कैप्शन: शांति देवी इस बार समय से पहले ही पोखरा का पानी सूख गया। इससे पानी संकट गहरा गया है। आसपास के हैंडपंप भी सूख गए हैं। पोखरा को बेहतर बनाने के लिए हर स्तर पर प्रयास जरूरी है। जल है तो जीवन है। शांति देवी, हैदरनगर। बाक्स: ़फोटो 03 डीजीजे 05

कैप्शन: अजीज उपाध्याय पोखरा में लोग कचरा डाल रहें हैं। इससे बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है। इसका सौंदर्यीकरण कर पिड पर पेड़ लगाने से लोग यहां सुबह शाम टहल सकते हैं। मिट्टी का कटाव भी इससे रुकेगा। अजीत उपाध्याय, हैदरनगर।

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