बालू उठाव से गढ़वा जिले में नदियों पर संकट

लीड सहजे लो बूंद लोगो के साथ मेराल में यूरिया और सरस्वतिया नदी का अस्तित्व खतरे में यही हाल र

JagranThu, 15 Apr 2021 06:06 PM (IST)
बालू उठाव से गढ़वा जिले में नदियों पर संकट

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सहजे लो बूंद लोगो के साथ

मेराल में यूरिया और सरस्वतिया नदी का अस्तित्व खतरे में, यही हाल रहा तो मिट जाएगा वजूद ब्रजेश कुमार मिश्र , मेराल, (गढ़वा):

मानव, मानवीय सभ्यता एवं संस्कृति को अस्तित्व प्रदान करने वाली नदियों का अस्तित्व आज खुद संकट में है। सालों भर निरंतर प्रवाहित होने वाली कई नदियों का पहचान अब बरसाती नदी के रूप में बदल गई है। इसका जीता जागता उदाहरण है मेराल प्रखंड की लाइफ लाइन कही जाने वाली यूरिया एवं सरस्वती नदी। वैसे तो मेराल प्रखंड के कुछ हिस्सों में दानरो नदी भी प्रवाहित होती है लेकिन प्रखंड की 90 प्रतिशत आबादी एवं क्षेत्रफल पर यूरिया एवं सरस्वती नदी का प्रभाव पड़ता है। स्थिति यह है कि इस वर्ष फरवरी महीने में ही उक्त दोनों नदियां पूरी तरह से सूख चुकी है। इसका प्रमुख कारण इंसानों द्वारा नदियों का अंधाधुंध शोषण तथा नदी एवं जल संरक्षण के प्रति उदासीनता। बढ़ती आबादी के कारण चाहे पीने का पानी हो या कृषि कार्य के लिए सिचाई कार्य ,पानी का अनियंत्रित तरीके से दोहन किया जा रहा है ।इतना ही नहीं व्यवसाय तथा रोजी रोजगार के लिए बालू तथा नदी की मिटटी का अंधाधुंध कटाई किया जा रहा है। बालू माफियाओं द्वारा न सिर्फ बालू बल्कि बालू के नाम पर नदी तल की मिट्टी की भी खुदाई कर दी जा रही है। इसका सबसे बड़ा दुष्प्रभाव यह हुआ कि मेराल से हासनदाग की ओर जाने वाली सड़क की यूरिया नदी पर बनी करोड़ों रुपए की पुल करीब 3 वर्ष पहले ध्वस्त हो चुकी है। देव गाना पंचायत के पूर्व मुखिया वाल्मीकि चौबे करकोमा निवासी देव बली तिवारी हासन दाग निवासी सुरेंद्र नाथ चौबे इत्यादि का कहना है कि करीब दो दशक पूर्व यूरिया नदी सालों भर प्रवाहित होती थी। नदी किनारे गांव के लोग पीने का पानी से लेकर नहाने धोने एवं साग सब्जी की उत्पादन के लिए सालों भर नदी का पानी का उपयोग किया करते थे। लोगों का कहना है कि बदलता पर्यावरण के कारण जहां अपेक्षाकृत वर्षा भी कम हो रही है वही बढ़ती आबादी के कारण लोग निरंकुश तरीके से नदी का पानी से लेकर बालू का दोहन कर रहे हैं। इतना ही नहीं कई जगहों पर तो लोगों द्वारा नदी का अतिक्रमण भी कर लिया गया है। विदित हो कि यूरिया नदी पर कई बालू घाट बनाए गए हैं जिनका टेंडर भी हुआ है। टेंडर के आड़ में बालू माफियाओं द्वारा बेधड़क नदी क्षेत्र का दोहन किया जा रहा है। बालू माफियाओं की अनियंत्रित गतिविधि से आक्रोशित हासन दाग, एवं करकोमा लोगों ने जनप्रतिनिधियों के साथ विरोध प्रदर्शन भी किया। हासन दाग पंचायत के मुखिया दुखन चौधरी ने बताया कि ग्रामीणों के सहयोग से काफी दिनों तक यूरिया नदी से बालू का उठाव बंद करा दिया गया था लेकिन सरकारी स्तर से टेंडर कराए जाने के बाद फिर से नदी का अतिक्रमण शुरू हो गया है। गौरतलब हो कि जल संरक्षण तथा कृषि कार्य के उद्देश्य से सरकार द्वारा नदियों में कई जगह चेक डैम तथा बीयर का निर्माण कराया गया था लेकिन बरसात के दिनों में बालू मिट्टी भर जाने तथा कम वर्षा होने के कारण चेक डैम एवं बीयर अब पूर्णत: फेल हो चुके हैं।

मेराल प्रखंड की दूसरी प्रमुख नदी सरस्वती है जिसका उद्गम स्थल मेराल थाना के गोंदा गांव है। यह नदी मेराल तथा गढ़वा प्रखंड के गई गांव से प्रवाहित होते हुए दानरो नदी में मिलती है। हालांकि इस नदी का प्रवाह क्षेत्र कम है लेकिन नदी किनारे के सैकड़ों गांव के लोगों की क्रियाकलाप प्रभावित होती है। नदी से गर्मी के दिनों में भी लोग पीने का पानी से लेकर खेती-बाड़ी एवं साग सब्जी का उत्पादन किया करते थे। लेकिन यह नदी भी अब बमुश्किल साल के 6 महीने ही प्रवाहित होती है। कई जगह पर नदी का अतिक्रमण भी कर लिया गया है। यूरिया तथा सरस्वती या नदी के और समय सुख जाने से जहां इस क्षेत्र में जल संकट उत्पन्न हो गया है वही हजारों लोगों की रोजी रोजगार भी बंद हो चुकी है। खाद्यान्न के अलावे किसान सब्जी की खेती कर अपना जीविकोपार्जन किया करते थे जो अब लगभग बंद हो चुका है। दोनों नदियों के साल के 6 महीने सूखे होने का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव इस क्षेत्र का जिला स्तर पर पड़ा है ।गर्मी के दिनों में क्षेत्र के अधिकांश कुआं तथा चापाकल सुख गए हैं फलस्वरूप गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। अन्य प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ नदियों का भी दोहन एवं अतिक्रमण धड़ल्ले से जारी है जो भविष्य में गंभीर संकट उत्पन्न करेगी।

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