World Blood Donor Day 2021: बेटियां हैं तो क्या हुआ, इन्हें भी है खून देने का जुनून

World Blood Donor Day 2021 महिला कोई अबला नहीं हाेती। जरूरत पड़ने पर वह शेरनी बन जाती है तो मानवता की भलाई के लिए वह मदर टेरेसा का भी रूप धारण करने से नहीं हिचकती। इन्हीं अल्फाजों से एडीएम चंदन कुमार ने रक्तदान करने वाली महिलाओं की हौसलाअफजाई की।

MritunjayMon, 14 Jun 2021 05:14 PM (IST)
रक्तदान करती एसएसएलएनटी महिला महाविद्यालय की छात्रा ( फोटो जागरण)।

धनबाद, जेएनएन। World Blood Donor Day 2021 बेटियां हैं तो क्या हुआ, हम में भी है खून देने का जुनून। हम भी खून दे सकते हैं और दूसरों की जिंदगी बचा सकते हैं। कुछ इसी जज्बे के साथ एसएसएलएनटी महिला कॉलेज धनबाद की छात्राओं ने सोमवार को रक्तदान किया। मौका था विश्व रक्तदाता दिवस का। एनएसएस यूनिट की अगुवाई में आयोजित रक्तदान शिविर में एनएसएस से जुड़ी कई छात्राओं ने रक्तदान किया। इससे पहले एसएनएमएमसीएच के डॉक्टर और नर्स की टीम ने छात्राओं की स्वास्थ्य जांच भी की। स्वास्थ्य छात्राओं को रक्तदान की अनुमति दी गई। छात्राओं की हौसला अफजाई करने प्राचार्य डॉ. शर्मिला रानी समेत अन्य शिक्षक भी पहुंचे।

प्राचार्य ने कहा-आज का दिन खास

प्राचार्य ने कहा कि दूसरे की जान बचाने के लिए कॉलेज छात्राओं का रक्तदान करना समाज के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। रक्तदान करने वाली छात्राओं ने कहा कि जब लड़कियां हर क्षेत्र में अपने हौसले से कामयाबी का परचम लहरा रही है तो रक्तदान करने में क्यों नहीं। कहा कि आज का दिन उनके लिए बेहद खास है। उन्हें इस बात की खुशी है कि उनके खून से किसी जरूरतमंद की जान बचाई जा सके।

20 से ज्यादा महिलाओं ने किया रक्तदान

महिला कोई अबला नहीं हाेती। जरूरत पड़ने पर वह शेरनी बन जाती है तो मानवता की भलाई के लिए वह मदर टेरेसा का भी रूप धारण करने से नहीं हिचकती, इन्हीं अल्फाजों के साथ एडीएम लॉ एन्ड ऑर्डर चंदन कुमार ने साेमवार को अपने उद्गार व्यक्त किये। मौका था मारवाड़ी युवा मंच द्वारा शंभु जी धर्मशाला में मारवाड़ी युवा मंच के शक्ति शाखा द्वारा विश्व रक्तदाता दिवस पर आयाेजित रक्त दान शिविर का। इस आयोजन का उद्धाटन करने के बाद कुमार ने कहा कि रक्तदान से बड़ा दान कोई नहीं। सभी लोगों को इसके लिए आगे आकर अपना रक्त दान करना चाहिए। रक्तदान से जुड़ी गलतफहमियों पर उन्होंने कहा कि वैसे तो कई तरह की भ्राँतियाँ इस समाज में फैली हैं। लेकिन उन सबका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

खून की कमी दूर करने को आगे आ रही महिलाएं

महिलाओं द्वारा बड़ी संख्या में रक्तदान करने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इतनी तादाद में औरताें को रक्तदान करते देख सुखद आश्चर्य हो रहा है। जिस समाज में औरतें इतनी जागरूक हैं, उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। वहीं रक्तदान करनेवाली शक्ति शाखा की संरक्षक सदस्य रश्मि सांवरिया ने कहा कि वे साल में एक बार अपना रक्त जरूर दान करती हैं। साथ ही लोगों को भी यह संदेश देना चाहती हैं कि रक्तदान करने से किसी तरह की कमजोरी या बिमारी नहीं होती। इसके विपरीत रक्तदान करने से होनेवाले फायदे की बात लोगों को बताती हैं। सांवरिया ने कहा कि उनकी संस्था साल में दो से तीन बार इस तरह का शिविर लगाती है। इस बार का शिविर लगाने का उद्देश्य कोरोना काल में हुई खून की कमी को दूर करने के लिए किया गया है। ताकि आनेवाले दिनों में इसकी कमी से किसी की मौत ना हो।

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