Bokaro Steel Plant: कचरे से मुनाफा कमा बोकारो स्‍टील बना नंबर वन

सार्वज‍न‍िक क्षेत्र के उपक्रम स्‍टील आथर‍िटी आफ इंड‍िया ल‍िम‍िटेड (सेल) के हाल में जारी व‍ित्‍तीय पर‍िणाम में बाेकारो स्‍टील प्‍लांट ने नंबर वन का ताज पाया है। यह सफलता कूड़े कचरे के दम पर पाई। बोकारो स्‍टील ने कचरा प्रबंधन की ऐसी बानगी पेश की जो प्रेरणास्‍त्रोत बनी है।

Atul SinghSat, 19 Jun 2021 10:49 AM (IST)
बोकारो स्‍टील कचरा प्रबंधन उपक्रमों के ल‍िए प्रेरणास्‍त्रोत बनी है। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

 बोकारो, बीके पाण्‍डेय: सार्वज‍न‍िक क्षेत्र के उपक्रम स्‍टील आथर‍िटी आफ इंड‍िया ल‍िम‍िटेड (सेल) के हाल में जारी व‍ित्‍तीय पर‍िणाम में बाेकारो स्‍टील प्‍लांट ने नंबर वन का ताज पाया है। यह सफलता कूड़े कचरे के दम पर पाई। चौंक‍िए नहीं, यह हकीकत है। बोकारो स्‍टील ने कचरा प्रबंधन की ऐसी बानगी पेश की जो सार्वजन‍िक क्षेत्र के अन्‍य उपक्रमों के ल‍िए प्रेरणास्‍त्रोत बनी है। 

दरअसल, बीते बोकारो स्‍टील ने कचरा प्रबंधन की ऐसी बानगी पेश की जो प्रेरणास्‍त्रोत बनी है। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर) बीते व‍ित्‍तीय वर्ष में सेल ने 68 सौ कारोड़ का मुनाफा कमाया। कर सहित अन्‍य देनदारी के भुगतान के बाद कंपनी को 3850 करोड़ का मुनाफा हुआ। इसमें कर पूर्व लाभ के रूप में 2251 करोड़ की ह‍िस्‍सेदारी बोकारो स्‍टील की है। यह सवाल लाजमी है क‍ि व‍ित्‍तीय वर्ष 2019-20 में 48 करोड़ का मुनाफा कमाने वाले बोकारो इस्‍पात संयंत्र ने एक साल में 2251 करोड़ का मुनाफा कैसे कमा ल‍िया। जवाब है क‍ि संयंत्र ने 1000 करोड़ केवल स्‍लैग बेचकर कमाए। वहीं 1200 करोड़ रुपये व‍िदेश में इस्‍पात बेचकर अर्ज‍ित क‍िए। इस्‍पात की कीमतेंं बढ़ने से भी सेेल को फायदा हुआ।

बोकारो स्‍टील के पावर प्‍लांट से फ्लाई ऐश न‍िकलती है। यह पर्यावरण के ल‍िए खतरा है। इसके प्रबंधन के ल‍िए राष्‍ट्रीय उच्‍च पथ प्राध‍िकरण से समझौता कर 1.70 लाख क्‍यूब‍िक मीटर राख का न‍िपटान क‍िया गया। बेकार पड़े अपने उपकारणों की अपने ही अध‍िकार‍ि‍यों से मरम्‍मत कराई। इन्‍हें बाहर की एजेंसी से ठीक कराया जाता तो करोड़ों खर्च होते।

बोकारो इस्‍पात संयंत्र पड़ोसी देश नेपाल, भूटान, बंग्‍लादेश, श्रीलंका को इस्‍पात देता था। कोरोना काल में पहली बार चीन, इटली व व‍ियतनाम को भी इस्‍पात की आपूर्त‍ि की गई। उस समय घरेलू बाजार में मांग कम थी। गत वर्ष 1.80 लाख टन न‍िर्यात हुआ था। इस वर्ष यह आंकड़ा 3.32 लाख टन पहुंच गया है।

मुनाफे के पांच प्‍वांट

श्रम शक्‍ति का पूरी क्षमता से सटीक उपयोग। स्‍लैग व स्‍क्रैप का प्‍लांट में प्रयोग के साथ ब‍िक्री भी। व‍िदेश में प‍िछले साल के मुकाबले 68 फीसद अध‍िक न‍िर्यात। पहली बार एनएचएआई ने हाईवे में म‍िट्टी व बालू की जगह 1.70 लाख क्‍यूब‍िक मीटर फ्लाई ऐश भरी।  प्‍लांट में न‍िकले अलकतरा, खाद, फ‍िनाइल व अन्‍य उत्‍पाद की भी ब‍िक्री।    

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