लंबे समय बाद सिंदरी में शुरू हुई औद्योगिक सुगबुगाहट, लेकिन हिंसा से कहीं फिर न आ जाए कड़वाहट

औद्योगिक पुनरुद्धार के लिए इसे शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है।

लंबे अरसे के बाद सिंदरी में औद्योगिक सुगबुगाहट दोबारा शुरू हुई है लेकिन अब जिला प्रशासन को भी इस बात की फिक्र है कि कहीं हिंसा औद्योगिक रिश्ते में कड़वाहट न घोल दे। सिंदरी के औद्योगिक पुनरुद्धार के लिए इसे शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है।

Publish Date:Wed, 02 Dec 2020 01:07 PM (IST) Author: Deepak Kumar Pandey

संस, सिंदरी: सिंदरी में एसीसी कारखाना परिसर के बाहर 30 नवंबर को स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग को लेकर हुई हिंसा ने यहां दोबारा अपने पांव जमाने के प्रयास में लगी कई अन्य कंपनियों को भी डरा दिया है। लंबे अरसे के बाद सिंदरी में औद्योगिक सुगबुगाहट दोबारा शुरू हुई है, लेकिन अब जिला प्रशासन को भी इस बात की फिक्र है कि कहीं हिंसा औद्योगिक रिश्ते में कड़वाहट न घोल दे। सिंदरी के औद्योगिक पुनरुद्धार के लिए इसे शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है।

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कई कंपनियां निवेश की तैयारी में: मालूम हो कि सिंदरी में एसीसी लिमिटेड प्रबंधन 15 लाख टन क्षमता के विस्तारीकरण प्रोजेक्ट का निर्माण कर रहा है। फरवरी तक एसीसी कारखाने की सालाना उत्पादन क्षमता 45 लाख टन हो जाएगी। हिंदुस्तान उर्वरक और रसायन लिमिटेड (हर्ल) द्वारा भी 11.75 क्षमता के नए उर्वरक संयंत्र की स्थापना की जा रही है। नवंबर 2021 तक निर्माणाधीन हर्ल के उर्वरक संयंत्र में उत्पादन शुरू हो जाने की संभावना है। हर्ल के उर्वरक प्रोजेक्ट की सफलता के बाद सेल द्वारा 1000 मेगा वाट के थर्मल पावर प्लांट का निर्माण भी प्रस्तावित है। सेल का टासरा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट तथा टासरा ओपन कास्ट प्रोजेक्ट द्वारा उत्पादित कोयले को देश के इस्पात संयंत्रों के लिए वाश कोल तैयार करने के लिए कोलवाशरी का निर्माण भी प्रस्तावित है।

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2002 में खाद कारखाना पर लगा था ताला: 2002 में सिंदरी खाद कारखाना को बंद कर दिए जाने के लंबे समय के बाद सिंदरी का औद्यौगिकीकरण शुरू हुआ है। जाहिर है उद्योगों के निर्माण और संचालन के लिए औद्योगिक माहौल का शांत रहना सबसे बड़ी शर्त है, लेकिन 30 नवंबर को एसीसी कारखाना परिसर में जो हिंसा हुई, उसे आदर्श औद्योगिक माहौल नहीं कहा जा सकता है। एसीसी लिमिटेड प्रबंधन ने जिला प्रशासन से माहौल को शांत बनाए रखने में मदद की गुहार लगाई है। प्रबंधन का कहना है कि हिंसा के माहौल में लंबे समय तक कारखाने का संचालन कर पाना संभव नहीं है।

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हर्ल बड़े भाई की भूमिका में: सिंदरी में आने वाले समय में हर्ल प्रबंधन को बिग बॉस की भूमिका निभानी है। एसीसी सीमेंट कारखाना परिसर में 30 नवंबर को हुई हिंसा को लेकर हर्ल प्रबंधन भी चिंतित है। जाहिर है, सिंदरी के औद्योगिकीकरण पर हिंसा का अच्छा प्रभाव नहीं पड़ेगा। हिंसा को समाप्त करने के लिए अब एसीसी प्रबंधन, हर्ल प्रबंधन, तथा सेल प्रबंधन भी अपने स्तर से सामूहिक पहल कर रहा है। कंपनियों ने लोगों से अपील की कि समस्या रोजगार से जुड़ी हो, स्थानांतरण रद करवाने से या फिर व्यवसाय से संबंधित, सभी पक्षों को धैर्य रखते हुए मिलजुल कर ही रास्ता निकालना होगा। 

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