BCCL News: अयोग्य घोषित हो चुकी कंपनी को वाशरी निर्माण का काम देने की तैयारी

एक बार अयोग्य साबित हो चुकी कंपनी दूसरी बार योग्य कैसे हो गई। इस सवाल से इन दिनों बीसीसीएल प्रबंधन दो-चार हो रहा है। मामला भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के मुनीडीह में प्रस्तावित वाशरी के निर्माण से जुड़ा है। वाशरी निर्माण के लिए जून 2020 में टेंडर किया गया था।

Atul SinghMon, 02 Aug 2021 05:39 PM (IST)
एक बार अयोग्य साबित हो चुकी कंपनी दूसरी बार योग्य कैसे हो गई। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

जागरण संवाददाता, धनबाद: एक बार अयोग्य साबित हो चुकी कंपनी दूसरी बार योग्य कैसे हो गई। इस सवाल से इन दिनों बीसीसीएल प्रबंधन दो-चार हो रहा है। मामला भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के मुनीडीह में प्रस्तावित वाशरी के निर्माण से जुड़ा है। दरअसल वाशरी निर्माण के लिए जून 2020 में टेंडर किया गया था। इसमें मेसर्स एसीबी इंडिया लिमिटेड व मेसर्स जेएमएस माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड ने बोली लगाई थी। दोनों ही कंपनियों को तकनीकी तौर पर तय मानकों के अनुरूप अयोग्य पाया गया था और निविदा रद हो गई थी।

इस वर्ष दुबारा मुनीडीह में ही 2.5 मिलियन टन पर एनम के वाशरी निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित की गई। जब इसे खोला गया तो मात्र एक कंपनी ने ही इसमें भाग लिया है। वह है मेसर्स एसीबी इंडिया लिमिटेड। फिलहाल कंपनी कार्यादेश जारी करने के पूर्व एग्रीमेंट से पहले की प्रक्रिया जारी है। हालांकि कार्यादेश अभी दिया नहीं गया है लेकिन इसको लेकर विवाद शुरू हो चुका है कि कैसे एक कंपनी जो पहले अयोग्य थी अब योग्य बताई जा रही है।

दर पर भी हो रहे सवाल

इकलौती बोली लगाने वाली कंपनी ने वाशरी निर्माण व परिचालन के लिए जो दर निर्धारित किया है उस पर भी सवाल अभी से उठने लगे हैं। बताया गया है कि यह निविदा बिल्ट आपरेट एंड ट्रांसफर (बीओटी) प्रकृति की है। इसमें जमीन भी बीसीसीएल का, निर्माण की लागत भी बीसीसीएल देगी। इसके लिए कंपनी ने निर्माण लागत 490 करोड़ रुपया बताया है। संचालन लागत प्रति टन 470.20 रुपये बताया है। वह भी तब इस मामले में अभी तक का सर्वाधिक दर 4.0 एमटीपीए क्षमता वाली तापिन वाशरी का है। यहां संचालन लागत 412 रुपया प्रति टन ही है।

नियमों की हो रही अवहेलना 

इस मामले में बीसीसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक और मुख्य सतर्कता पदाधिकारी को एक शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि सीवीसी के दिशानिर्देश के अनुसार भी गलत है। इसे तभी स्वीकार किया जाना चाहिए जब संबंधित कार्य को करने वाली वह इकलौती कंपनी हो अथवा कंपनी को वह कार्य करवाना नितांत आवश्यक हो। जबकि इस मामले में ऐसा नहीं है। शिकायतकर्ता के मुताबिक बिना प्री एनआइटी मीटिंग के ही दूसरी बार बीसीसीएल ने कंपनी की योग्यता का पैमाना भी बदल दिया और समान प्रकृति के कई कार्य उक्त कंपनी को दिया है। इससे बीसीसीएल अधिकारियों के साथ उनके अच्छे संबंधों का संदेह होना जायज है। इसी का लाभ दिया जा रहा है।

वर्जन

टेंडर खोला जा चुका है। मात्र एक कंपनी ने भाग लिया है। अभी टेंडर का तकनीकी तौर पर अध्ययन किया जा रहा है। इसके बाद वर्क आर्डर देने व एग्रीमेंट करने की प्रक्रिया होगी। इसमें अभी एक-दो महीने का समय लग सकता है। पहली बार के टेंडर में दो कंपनियों ने बोली लगाई थी लेकिन तकनीकी तौर पर उसे सही नहीं पाया गया और उसे उसे रद कर दिया गया था।

प्रदीप महतो, वाशरी महाप्रबंधक, बीसीसीएल

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