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निविदा रद कर तय दर से अधिक पर पहले की कंपनी को दे दिया ठेका

निविदा रद कर तय दर से अधिक पर पहले की कंपनी को दे दिया ठेका

बीसीसीएल के क्षेत्र संख्या दो की ओर से कंपनी विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में फेरबदल कर निविदा निकालने का मामला प्रकाश में आया है। इस पर विरोध होने पर तत्काल निविदा रद कर पुरानी कंपनी को ही फिर से काम करने का निर्देश बिना किसी नई निविदा के कर दिया गया। वह भी रद की गई निविदा से अधिक दर पर। इससे कंपनी को प्रति टन कोयला ढुलाई पर 33 रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

JagranMon, 10 May 2021 06:20 AM (IST)

रोहित कर्ण, धनबाद : बीसीसीएल के क्षेत्र संख्या दो की ओर से कंपनी विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों में फेरबदल कर निविदा निकालने का मामला प्रकाश में आया है। इस पर विरोध होने पर तत्काल निविदा रद कर पुरानी कंपनी को ही फिर से काम करने का निर्देश बिना किसी नई निविदा के कर दिया गया। वह भी रद की गई निविदा से अधिक दर पर। इससे कंपनी को प्रति टन कोयला ढुलाई पर 33 रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। लाखों का नुकसान होने की बात कही जा रही है। क्या थी निविदा :

बीसीसीएल के ब्लॉक-2 से 13 अप्रैल को निविदा निकाली गई थी। इसके मुताबिक दो लाख टन कोयला का ट्रांसपोर्टिग किया जाना था। कोयला नदखुरकी के अमलगमेटेड ब्लॉक-2 ओसीपी कोल डंप से नदखुरकी फीडर ब्रेकर होते हुए केकेसी मेन साइडिग तक ले जाना था। निविदा 28 अप्रैल को खोली जानी थी। काम 60 दिन में पूरा किया जाना था। कंपनी की शर्तों के मुताबिक डीजल का बेस प्राइस 72.50 रुपये प्रति लीटर रखा गया था। 115.60 रुपये प्रति टन कोयला ढुलाई की कीमत रखी गई थी। शर्तों के मुताबिक कोयला ढुलाई में 1.75 क्यूबिक मीटर क्षमता के चार पेलोडर व 10 टन क्षमता के 11 टिपर से कोयला की ढुलाई 3333.33 ट्रिप में किया जाना था। क्या थी अलग शर्तें :

ट्रांसपोर्टर किरण मंडल व संजय चौहान के मुताबिक कई ऐसी शर्तें थीं, जो अन्य कोलियरियों में नहीं है। प्रत्येक पेलोडर में वेटो मीटर लगा होना चाहिए। इस वक्त जबकि अन्य कोलियरियां 87.57 रुपये प्रति लीटर डीजल की कीमत दे रही हैं, ब्लॉक-2 ने मात्र 75.50 रुपये कीमत रखी। ट्रांसपोर्टर्स की आपत्ति :

ट्रांसपोर्टर्स ने आपत्ति जताई कि जब डीजल की बाजार दर 85-86 रुपये चल रहा है तो ब्लॉक-2 ने 75.50 रुपये बेस प्राइस क्यों रखा। साथ ही वेटो मीटर लगाने की बात भी अन्य कोलियरियों के एसओआर टेंडर में नहीं फिर यहां क्यों। इसकी कीमत कंपनी देगी अथवा कोल ट्रांसपोर्टिग में ही इसकी दर समाहित की गई है। और सबसे बड़ा सवाल रेलवे के वैगन में कोयला लोड होने के बाद उसके वजन से हिसाब से भुगतान होता है। अगर वेटोमीटर पेलोडर में लगाकर कोयला लोड किया गया तो भुगतान किस हिसाब से होगा। वेटोमीटर के हिसाब से या रेलवे वैगन के हिसाब से। यह अतिरिक्त शर्तें क्यों। ..और कंपनी ने अधिक कीमत पर पुरानी कंपनी को दी निविदा

ट्रांसपोर्टर्स की आपत्ति के बाद प्रबंधन ने निविदा रद कर दी। इससे बड़ा मामला यह कि कोयला ट्रांसपोर्टिग के लिए बिना किसी अन्य प्रक्रिया के पहले से ट्रांसपोर्टिंग कर रही कंपनी को ही ठेका दे दिया। वह भी अधिक कीमत पर। निविदा जहां 115.60 रुपये प्रति टन के हिसाब से निकाली गई थी वहीं पूर्व से काम कर रही कंपनी को तकरीबन 148 रुपये प्रति टन के हिसाब से ठेका दिया गया है। इससे कंपनी को 33 रुपये प्रति टन अधिक का भुगतान करना पड़ रहा है। प्रति टन 33 रुपये के हिसाब से दो लाख टन कोयला के लिए कंपनी को 66,00000 रुपये अधिक का भुगतान करना पड़ेगा। ट्रांसपोर्टर्स ने की शिकायत :

ट्रांसपोर्टर्स ने इसकी शिकायत ब्लॉक-2 के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर की है। आरोप लगाया है कि यह पूर्व की कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। पहले से संजय उद्योग व स्वास्तिक की ओर से किया जा रहा था। इन्हें पहले भी 144 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान किया जाता था। फिर नई निविदा मात्र 115.60 रुपये प्रति टन के हिसाब से क्यों निकाली गई। ट्रांसपोर्टर्स का आरोप है कि नई कंपनियां निविदा में भाग न लें इस लिहाज से ही नई शर्तें व कम दर पर निविदा निकाली गईं। उन्होंने शिकायत की कॉपी मुख्यालय के निदेशक मंडल व सीएमडी को भी भेजी है। वर्जन

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इस मुद्दे पर दूरभाष पर मैं आपको कुछ नहीं कह सकता।

धर्मेंद्र मित्तल, महाप्रबंधक, एरिया-2, बीसीसीएल

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