शिक्षकों को सताने लगा कोरोना का भय; 19 अप्रैल के आदेश को शिथिल करने का किया आग्रह Dhanbad News

स्कूल बंद होने के बाद स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को अनिर्वाय कर दिया गया है। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

स्कूल बंद होने के बाद स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को अनिर्वाय कर दिया गया है जिसके बाद शिक्षकेां को अब कोरोना का भय सताने लगा है। शिक्षकों को अब कोरोना अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ उपस्थिति अनिवार्य करने के निर्देश का विरोध किया है।

Atul SinghTue, 20 Apr 2021 03:39 PM (IST)

धनबाद, जेएनएन : स्कूल बंद होने के बाद स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति को अनिर्वाय कर दिया गया है जिसके बाद शिक्षकेां को अब कोरोना का भय सताने लगा है। शिक्षकों को अब कोरोना अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ उपस्थिति अनिवार्य करने के निर्देश का विरोध किया है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए एक तरफ सभी शैक्षिणक संस्स्थान, स्कूल, कॉलेजों को बंद करने को आदेश दिया गया है। वहीं दूसरी ओर स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के कार्यालय एवं सभी स्कूलों में शिक्षक व कर्मियों के कुल बल का 50 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य किया गया है। यह समझे से परे है। संघ के प्रदेश महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने इस संबंध में मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है विद्यालय बंद अवधि में ही बच्चों व अभिभावकों को बीच पुस्तक वितरण करने का आदेश निर्गत किया गया है। जिससे विद्यालय, शिक्षक और अभिभवकों के बीच पब्लिक कॉटेक्ट बढ़ने से संक्रमण की प्रबल संभावना होती है। जो शिक्षकों एवं अभिभावकों के स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रतिकुल है। वर्तमान स्थिति में काफी संख्या में शिक्षक कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं। वहीं कई शिक्षकों की इससे मौत भी हो चुकी है। ऐसे में यह निर्देश मानकों के विपरीत शिक्षकों को विद्यालय आने के लिए बाध्य किया जाना उनके जीवन को जोखिम में डालने जैसा कदम प्रतीत हो रहा है। उन्होंने पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव से आग्रह किया है कि 18 अप्रैल को जारी आदेश विद्यालय बंद अवधि में शिक्षकों को विद्यालय आने की बाध्यता से मुक्त रखने हेतु विभागीय 19 अप्रैल के जारी आदेश को शिथिल करने की कृपा करें। इस अवधि का उपयोग करते हुए शिक्षक डिजीसाथ के डिजिटल कानटेंट के माध्यम से बच्चों के शिक्षण कार्य को गतिशील बनाए रख सकें।

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