जहां चाह वहां राह... इस कहावत को बोकारो की सुनीता ने कर दिखाया सच, शादी के 19 साल बाद बिहार में बनेंगी रेवेन्यू ऑफिसर

BPSC बकौल सुनीता परीक्षा में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है। गृहस्थ जीवन में गृहिणी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हम उन चुनौतियों से भागे नहीं सामना किया पढ़ाई भी शिद्दत से की। लक्ष्य मिल गया। हालांकि अभी भी परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं हूं।

MritunjaySun, 13 Jun 2021 11:53 AM (IST)
बोकारो की सुनीता कुमारी ( फोटो जागरण)।

बोकारो [ राममूर्ति ]। बोकारो के सेक्टर दो बी की सुनीता कुमारी। उम्र करीब 41 साल। बचपन से ही जो सपना देखा था वह इस उम्र में आकर साकार कर लिया। वह कर दिखाया, जिससे वे आज सभी के लिए प्रेरणास्रोत बन गईं। जी हां, शादी के 19 वर्ष बाद बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में 1267 वां स्थान हासिल कर सफलता पाई। गृहस्थ जीवन के साथ ही पढ़ाई के लिए भी वक्त निकाला और लक्ष्य पाया। अब वे रेवेन्यू ऑफिसर के पद पर योगदान करेंगी। सुनीता की सफलता की कहानी सुनकर हर कोई सराहना कर रहा है।

विवाह के सात साल बाद पास की स्नातक की परीक्षा 

सुनीता ने बताया कि प्लस टू उच्च विद्यालय सेक्टर नौ ए से 1998 में इंटरमीडिएट की परीक्षा विज्ञान विषयों से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। बचपन से सपना देखा था कि बड़ी होकर अधिकारी बन समाज की सेवा करूंगी। इसी बीच 2002 में बीएसएल कर्मी रवि शंकर से शादी हो गई। गृहस्थ जीवन में आईं तो पढ़ाई छूट गई। इस बीच पुत्री खुशी भारती व पुत्र रूपेश कुमार का जन्म हुआ। उनके साथ स्वजनों की देखभाल की जिम्मेदारी थी। इस फर्ज को निभाया। मगर सपना टूटा नहीं था, सो फिर हिम्मत की। सोच लिया था कि उम्र को बाधा न बनने देंगे। सास फूलमती देवी एवं पति ने हौसला बढ़ाया। विवाह के सात वर्ष बाद फिर कला वर्ग से स्नातक की पढ़ाई शुरू की। 2011 में स्नातक हो गईं। अब इस काबिल हो गई थीं कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ सकें। बस बीपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। घर का चूल्हा चौका करते थे। बच्चों व स्वजनों की देखभाल के बाद हर दिन सात घंटे पढ़ाई करते थे। पढ़ाई के लिए न दिन देखा न रात। जब आंख खुली तो पढ़ाई शुरू।

बेटी-बेटा ने बढ़ाया उत्साह

17 साल की बेटी इंटरमीडिएट की छात्रा भारती व 14 वर्षीय पुत्र नौवीं का छात्र रूपेश कुमार ने भी खूब उत्साह बढ़ाया। अपनी मां को पढ़ते देख दोनों बच्चे भी पढ़ाई में जुटे रहते हैं। उनमें भी मां की तरह अफसर बनने का जज्बा है। बकौल सुनीता अनुभव यही रहा कि किसी काम की ठान लें और लगन से मेहनत करें तो सफलता कदम चूम लेगी। बस पढ़ते समय विषय को समझें और तारतम्यता के साथ उसका अध्ययन करें। शनिवार को संत गाडगे संस्थान बोकारो के अध्यक्ष प्रमोद रजक, महासचिव पारिख राज, प्रवीण कुमार एवं सोनू कुमार ने उनको सम्मानित किया। 

सफलता के लिए अभ्यास जरूरी

बकौल सुनीता परीक्षा में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है। गृहस्थ जीवन में गृहिणी को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हम उन चुनौतियों से भागे नहीं, सामना किया, पढ़ाई भी शिद्दत से की। लक्ष्य मिल गया। हालांकि अभी भी परीक्षा परिणाम से संतुष्ट नहीं हूं। 65वीं बीपीएससी की मुख्य परीक्षा में भी शामिल हो चुकी हूं। इसका परिणाम और बेहतर आने की पूरी उम्मीद है।

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