Weekly News Round Up: नए SSP साहब पूराने तेवर में; निकाला हवाला का दीवाला...ये तो ट्रेलर है, फ‍िल्‍म अभी बाकी है

हवाला कारोबार के नाम पर रांची से धनबाद तक व्यापारियों के यहां पुलिस अथवा एसीबी की छापामारी शुरू हो जाती है। पुलिस कप्तान का जवाब गोलमोल होगा। हवाला के हर छापा का दीवाला निकल जाता है। धन कुबेरों तक यह संदेश जरुर चला जाता है कि वे निगाह में हैैं।

Atul SinghMon, 19 Jul 2021 07:33 AM (IST)
धन कुबेरों तक यह संदेश जरुर चला जाता है कि वे निगाह में हैैं।

अश्‍विनी रघुवंशी, धनबाद:  झारखंड में यूपीए सरकार है। कांग्रेस विधायकों के सुर बिगड़ते हैैं तो भाजपा के राजनेता अपनी सरकार बनाने के सपने बुनने लगते हैैं। उसी वक्त कुछ गुमनाम चेहरे तेजी से हरकत में आ जाते हैैं। किसी से छिपा नहीं है कि सत्ता परिवर्तन की मुहिम में 'लक्ष्मी की भूमिका बढ़ जाती है। विधायकों के खाने-पीने, ठहरने, आने-जाने जैसी कई जरुरतें आन पड़ती है। जाहिर है, विधायकों की तमाम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धन कुबेर की भूमिका शुरू हो जाती है। ख्याल कीजिए, जब भी कांग्रेस विधायकों की नाराजगी के स्वर सुनाई देते हैैं, तब हवाला कारोबार के नाम पर रांची से धनबाद तक व्यापारियों के यहां पुलिस अथवा एसीबी की छापामारी शुरू हो जाती है। पुलिस कप्तान का जवाब गोलमोल होगा। हवाला के हर छापा का दीवाला निकल जाता है। धन कुबेरों तक यह संदेश जरूर चला जाता है कि वे निगाह में हैैं। ये तो ट्रेलर है, फ‍िल्‍म तो अभी बाकी है।

मुश्किल हुई मेयर की कुर्सी

रघुवर सरकार ने दलीय आधार पर नगर निकाय का चुनाव कराने का फैसला लिया था। शहरी इलाके में भाजपा और कांग्रेस का आधार अपेक्षाकृत मजबूत है। नगर निकायों के चुनावों की प्रक्रिया शुरू हुई तो भाजपा, कांग्रेस और आजसू पार्टी में ऐसे नेताओं की फेहरिश्त लंबी हो गई थी जो मेयर या डिप्टी मेयर की कुर्सी पर बैठने का ख्वाब देख रहे थे। उन्हें उम्मीद थी कि एनडीए एवं यूपीए गठबंधन के मतों के सहारे नैया पार हो जाएगी। सिर्फ मेयर या डिप्टी मेयर के टिकट के इंतजाम के लिए मेहनत करनी होगी। सीएम हेमंत सोरेन को भान है कि दलीय आधार पर नगर निकाय का चुनाव कराना खुशखबरी नहीं देगा। पंचायत की तरह उन्होंने नगर निकाय का चुनाव गैर दलीय आधार पर कराने की दिशा में कार्यवाही आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब चुनाव लडऩे को लालायित लोगों के हौसले टूट रहे हैैं।

साइकिल में लगा दिया झंडा

डीजल-पेट्रोल की कीमतें सौ रुपये छूने लगी तो विरोध का इजहार करने के लिए कांग्रेसी नेता साइकिल लेकर सड़क पर आ गए। जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह की हड्डियां बूढ़ी हो चुकी है। साइकिल चलाना भूल गए थे। जिलाध्यक्ष साइकिल पर थे और उनकी साइकिल को कार्यकर्ता संभाल रहे थे। रण विजय सिंह चमचमाते लक्जरी वाहन से आए तो उस पर साइकिल लदा था। खैर, उन्होंने साइकिल पर बैठ कर पसीना बहाया। कांग्रेस नेतृत्व का निर्देश था कि पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर आंदोलन कमजोर नहीं होना चाहिए। कांग्रेसी भी कम दिमागी नहीं होते। कुछ किशोर मिल गए जो साइकिल यात्रा के लिए खुशी-खुशी राजी हो गए। उनकी साइकिल पर कांग्रेस का झंडा बांध दिया गया। किशोर सड़क पर खूब मौज से साइकिल दौड़ाते रहे, नारे लगाते हुए। केंद्र सरकार की लानत मलानत खत्म हुई तो पेट पूजा हुई। किशोर दोबारा साइकिल के साथ तैयार हैैं।

बालू में तेल ही तेल

झारखंड में न बालू घाटों की नीलामी हुई है, न बंदोबस्ती। टुंडी से बहने वाली बराकर के तट पर जाइए तो लगेगा कि सरकार ने बालू को सर्वसुलभ कर दिया है। टुंडी के मंडुवा बैजरा घाट से रोजाना औसतन छोटे बड़े 15 सौ से अधिक वाहनों से बालू की ढुलाई होती है। मनियाडीह के सर्रा घाट से भी दो से तीन सौ गाडिय़ों में बालू की ढुलाई हो रही है। बेधड़क। खुलेआम। प्रति डंफर, ट्रक और ट्रैक्टर के लिए पांच से 15 सौ रुपये की दर थानेदार के लिए तय है। गश्त गाड़ी के खाकी वाले दो सौ रुपये में संतोष कर लेते हैैं। सिर्फ टुंडी के घाटों के बालू से रोजाना डेढ़ से दो करोड़ का तेल निकाल रहा है। सैकड़ों लोगों के महल बन चुके हैैं। सरकार को कुछ नहीं मिल रहा है। सरकार से जुड़े जरूर मालामाल है। सुन रहे सीएम साहब।

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