Akshaya Tritiya & Parshuram Jayanti 2021: बाबाधाम और बासुकीनाथ में नहीं होगा भव्य आयोजन, घरों में पंडा करेंगे अनुष्ठान

Akshaya Tritiya Parshuram Jayanti 2021 परशुराम जयंती व अक्षय तृतीया का धार्मिक अनुष्ठान बासुकीनाथ के तीर्थ पुरोहित व पंडा समाज घरों में ही पूर्ण निष्ठा के साथ करेंगे। बैशाख मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि दिन शुक्रवार 14 मई को अक्षय तृतीया सह परशुराम जयंती है।

MritunjayThu, 13 May 2021 12:41 PM (IST)
बाबा बैद्यनाथ मंदिर देवघर और बाबा बासुकीनाथ मंदिर बासुकीनाथ ( फाइल फोटो)।

देवघर/  बासुकीनाथ, जेएनएन। Akshaya Tritiya & Parshuram Jayanti 2021  कोरोना काल में भव्य धार्मिक अनुष्ठानों पर भी रोक है। इसका असर इस साल अक्षय तृतीया और भगवान परशुराम जंयती पर भी देखने को मिलेगा। 14 मई को अक्षय तृतीया है। यह दिन भगवान परशुराम की जयंती भी है। देवघर के बाबा बैद्यनाथ मंदिर और बासुनाथ के बाबा बासुकीनाथ मंदिर में भव्यतापूर्वक धार्मिक अनुष्ठान होता रहा है। पंडा समाज की तरफ से भव्य अनुष्ठान का आयोजन किया जाता रहा है जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते रहे हैं। इस साल ऐसा नहीं होगा। हालांकि पूर्व निष्ठा के साथ धार्मिक अनुष्ठान होगा। इसमें श्रद्धालुओं की भीड़ नहीं होगी। पंडा समाज के लोग अपने-अपने घरों में विशेष अनुष्ठान करेंगे। 

 

हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया का बहुत अधिक महत्व

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 मई को पड़ रही है। इस तिथि का हिंदू धर्म में बहुत अधिक महत्व है जोकि सालभर में पड़ रहे है अबूझ मुहूर्तों में से एक मानी जाती है।  अक्षय तृतीया ( Akshaya Tritiya) एक संस्कृत शब्द है। 'अक्षय' का अर्थ है -'शाश्वत, सुख, सफलता और आनंद की कभी कम न होने वाली भावना' और 'तृतीया' का अर्थ है 'तीसरा'। अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त माना गया है। इस तिथि पर सूर्य और चंद्र अपनी उच्च राशि में होते हैं। इसलिए इस दिन शादी, कारोबार की शुरूआत और गृह प्रवेश करने जैसे- मांगलिक काम बहुत शुभ रहते हैं। शादी के लिए जिन लोगों के ग्रह-नक्षत्रों का मिलान नहीं होता या मुहूर्त नहीं निकल पाता, उनको इस शुभ तिथि पर दोष नहीं लगता व निर्विघ्न विवाह कर सकते हैं।

 

प्रदोश काल में मनाई जाती पशुराम जंयती

भगवान पशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। भगवान पशुराम के जन्म दिवस को हर साल परशुराम जयंती (Parshuram Jayanti) के रूप में मनाया जाता है। हिंदू मान्यतओं के अनुसार यह जंयती वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाएगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में तृतीया तिथि में हुआ था। ऐसे में परशुराम जयंती का उत्सव प्रदोष काल में ही मनाया जाता है। इस दिन सोना खरीदना बहुत शुभ होता है। पंचाग के अनुसार इस साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि की शुरूआत 14 अप्रैल दिन शुक्रवार को सुबह 05 बजकर 38 मिनट पर हो रहा है और समापन 15  अप्रैल दिन शनिवार को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर होगा। तृतीया तिथि का प्रदोष काल 14 मई है, इसलिए इस साल परशुराम जयंती 14 मई को मनाई जाएगी। 

कोरोना के कारण विशेष धार्मिक अनुष्ठान पर रोक

बासुकीनाथ में इस बार परशुराम जयंती व अक्षय तृतीया का धार्मिक अनुष्ठान बासुकीनाथ के तीर्थ पुरोहित व पंडा समाज घरों में ही पूर्ण निष्ठा के साथ करेंगे। बैशाख मास शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि दिन शुक्रवार 14 मई को अक्षय तृतीया सह परशुराम जयंती है। बासुकीनाथ मंदिर के पंडा-पुरोहितों ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष अक्षय तृतीया सह परशुराम जयंती का धार्मिक अनुष्ठान सादगी पूर्ण तरीके से मनाएंगे। पूर्व के वर्षों में बासुकीनाथ के पंडा-पुरोहितों के द्वारा इस धार्मिक अनुष्ठान का काफी भव्यतापूर्वक आयोजन किया जाता था। इस मौके पर बाबा बासुकीनाथ की भव्य श्रृंगार पूजा, परशुराम भगवान की पूजा के अलावा सामूहिक उपनयन व अन्य धार्मिक अनुष्ठान का भी कार्यक्रम आयोजित होता था। लेकिन इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव को लेकर चल रहे लॉकडाउन की स्थिति के कारण बासुकीनाथ मंदिर में आम श्रद्धालुओं के दर्शन पूजन पर रोक है।

 

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