Shravani Mela 2021: कोरोना ने दूसरे साल भी बाबाधाम में रोकी कांवर यात्रा, घर बैठे दर्शन-पूजन के लिए नई व्यवस्था

कोरोना की तीसरी लहर के आने की आहट से श्रावणी मेला नहीं लगेगा लेकिन दुनियाभर के बाबा के भक्तों के लिए यह सुकून भरी खबर है कि वह सावन शुरू होने के दिन से ही आनलाइन पूजा कर सकेंगे। जिला प्रशासन ने इसके लिए साफ्टवेयर तैयार कर लिया है।

MritunjayMon, 19 Jul 2021 05:10 PM (IST)
देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ का मंदिर और कांवर यात्रा में शामिल श्रद्धालु ( फाइल फोटो)।

आरसी सिन्हा, देवघर। कोरोना की तीसरी लहर के आने की आहट से श्रावणी मेला नहीं लगेगा , लेकिन दुनियाभर के बाबा के भक्तों के लिए यह सुकून भरी खबर है कि वह सावन शुरू होने के दिन से ही आनलाइन पूजा कर सकेंगे। जिला प्रशासन ने इसके लिए साफ्टवेयर तैयार कर लिया है। उसका ट्रायल चल रहा है। तैयारी यह है कि मुख्यमंत्री से इस वेबसाइट का उद्घाटन कराया जाए। कोई भी भक्त आनलाइन पूजा, आनलाइन विल्वपत्र अर्पण, रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान कर पाएंगे। इसके लिए दो शर्त होगी पहला तो उनको वेबसाइट पर पूजा की तिथि व टाइम का स्लाट बुक करना होगा। बुकिंग के समय उनको एक आप्शन मिलेगा कि वह अपने पंडा का नाम बताएं जिनसे पूजा कराना चाहते हैं। यजमान के मन के मुताबिक उनके पंडा अनुष्ठान करेंगे। सभी तरह की आनलाइन पूजा के लिए एक शुल्क होगा जिसके अंतिम निर्णय पर मंथन चल रहा है। आनलाइन पूजा शुल्क में भक्त को उनके पते पर स्पीड पोस्ट से प्रसाद भी भेजने की व्यवस्था होगी। भक्त आनलाइन शुल्क का भुगतान करेंगे।

108 किलोमीटर में लगता रहा है श्रावणी मेला

हर साल सावन महीने में देवघर में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला लगता रहा है। इस मेले का आयोजन झारखंड और बिहार सरकार द्वारा संयुक्त रूप से होता है। बिहार के सुलतानगंज गंगा घाट से श्रद्धालु गंगाजल लेकर कावंर यात्रा शुरू करते हैं। 108 किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ के मंदिर में पहुंचते हैं। इसके बाद जलाभिषेक करते हैं। श्रावणी मेला के दाैरान प्रतिदिन करीब एक लाख श्रद्धालु देवघर पहुंचते हैं। लेकिन कोरोना के कारण इस साल मेला का आयोजन नहीं होगा। बिहार की तरफ बिहार सरकार और देवघर में झारखंड सरकार ने श्रावणी मेला पर रोक लगा दी है। साल 2020 में भी कोरोना के कारण श्रावणी मेला का आयोजन नहीं हुआ था। 

बाबा बैद्यनाथ ऑनलाइन देंगे दर्शन

बाबा बैद्यनाथ के दरबार की एक सबसे बड़ी खासियत है कि यहां से कोई निराश नहीं लौटा है। भोलेनाथ के भक्तों आप निराश नहीं हों। आपको बाबा बैद्यनाथ का दर्शन का अवसर सावन में मिलेगा। जलार्पण नहीं कर पाएंगे, आनलाइन पूजा कर लेंगे। इसकी सारी तैयारी जिला प्रशासन ने कर ली है। इंतजार का काउंट डाउन शुरू हो गया है। 25 जुलाई को सावन के पहले दिन से ही आनलाइन पूजा शुरू होगी। एक दिन पहले वेबसाइट की सारी सूचना दुनियां को पता हो जाएगा। कोरोना के तीसरी लहर के आने की आहट से श्रावणी मेला का नहीं लगना लगभग तय है। मेला लगेगा या नहीं लगेगा। बाबा का मंदिर आम भक्तों के लिए खुलेगा या कपाट बंद ही रहेगा। ऐसे कई सवाल भक्तों के मन को बेचैन कर रहे हैं। उनकी आंखें दर्शन को व्याकुल है। मन तड़प रहा है। दुनियां की निगाहें द्वादश ज्योतिर्लिंग में एक झारखंड के देवघर में स्थापित बाबा बैद्यनाथ मंदिर पर है। विश्व का सबसे ख्याति प्राप्त श्रावणी मेला आषाढ़ के पूर्णिमा से शुरू हो जाता था। इस पर मेला नहीं लगेगा, मेला लगता तो अब तक देवघर की प्रशासनिक तैयारी से पूरा शहर गेरूआमय हो जाता।

साफ्टवेयर तैयार, लांचिंग का इंतजार

बाबा के भक्तों के लिए यह सुकून भरी खबर है कि वह सावन शुरू होने के दिन से ही आनलाइन पूजा कर सकेंगे। जिला प्रशासन ने इसके लिए साफ्टवेयर तैयार कर लिया है। उसका ट्रायल चल रहा है। तैयारी यह है कि मुख्यमंत्री से इस वेबसाइट का उदघाटन कराया जाए। कोई भी भक्त आनलाइन पूजा, आनलाइन विल्वपत्र अर्पण, रूद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान कर पाएंगे। इसके लिए दो बातें होगी पहला तो उनको वेबसाइट पर अपने पूजा की तिथि व टाइम का स्लाट बुक करना होगा। बुकिंग के समय उनको एक आप्सन मिलेगा कि वह अपने पंडा जी का नाम बताएं जिनसे पूजा कराना चाहते हैं। यजमान के मन के मुताबिक उनके पंडा जी उनका अनुष्ठान करेंगे। सभी तरह के आनलाइन पूजा के लिए एक शुल्क होगा जिसके अंतिम निर्णय पर मंथन चल रहा है। आनलाइन पूजा शुल्क में भक्त को उनके पता पर स्पीड पोस्ट से प्रसाद भी भेजने की व्यवस्था होगी। भक्त आनलाइन शुल्क का भुगतान करेंगे। जिसका अधिकांश हिस्सा उनकी ओर से नामित पंडा जी को और एक हिस्सा मंदिर कोष में जमा होगा।

सुबह और शाम दो-दो घंटा का होगा स्लॉट

आनलाइन पूजा का जो प्रारूप तैयार किया गया है, उसके मुताबिक सुबह की प्रात:कालीन पूजा के बाद दो घंटा आम भक्तों के आनलाइन पूजा का होगा। शाम में श्रृंगार के बाद भी श्रृंगार में आनलाइन आरती का अवसर मिलेगा। सारे प्रारूप पर अंतिम निर्णय हो जाएगा। दो दिन बाद पूजा और पूजा शुल्क की भी घोषणा प्रशासनिक स्तर पर कर दी जाएगी।

 

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