ये कैसी चूक ! यहां कोरोना वैक्सीन के ल‍िए खर्च करने पड़ रहे सैकड़ोंं रुपये Dhanbad News

कोरोना वैक्सीन के लिए स्लॉट बुकिंग की आपाधापी में लोगों के हजारों रुपए भी खर्च हो जा रहे हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लिए कोई अलग पैरामीटर नहीं है। जहां जिस एरिया का स्लॉट खाली रहता है। वही वही वैक्सीन के लिए लोग बुकिंग कर लेते हैं।

Atul SinghTue, 22 Jun 2021 01:58 PM (IST)
कोरोना वैक्सीन के लिए लोगों के हजारों रुपए भी खर्च हो जा रहे हैं। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

धनबाद, जेएनएन: कोरोना वैक्सीन के लिए स्लॉट बुकिंग की आपाधापी में लोगों के सैकड़ोंं रुपये भी खर्च हो जा रहे हैं। शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के लिए कोई अलग पैरामीटर नहीं है। जहां जिस एरिया का स्लॉट खाली रहता है। वहीं वैक्सीन के लिए लोग बुकिंग कर लेते हैं। ऐसे में कई लोगों को वैक्सीन के लिए ग्रामीण इलाके में भी भटकना पड़ रहा है।

हाल में ही अपने पर पूरे परिवार को वैक्सीन दिलाने वाले एक शख्स की पीड़ा जानकर आप सभी दंग रह जाएंगे। वैक्सीन के लिए मारामारी में उस शख्स को खुद तथा अपने परिवार को वैक्सीन दिलाने में 1700 रुपये केवल ऑटो किराया के लिए खर्च करने पड़े। पीड़ित व्यक्ति लाहबनी बस्ती के मोहन कुमार का कहना है कि परिवार के आधा दर्जन सदस्यों को कोरोना टीका दिलाने में उन्हें 1700 रुपये ऑटो भाड़ा देना पड़ा। ऐसे में गांव में कई लोग हैं, जो हर दिन कमाते और परिवार का पेट भरते है, उनके लिए इतना किराया खर्च कर टीका लेना आसान नहीं होगा।

मोहन ने पीड़ा सुनाया कि वह परिवार के आधा दर्जन सदस्यों को टीका लगवाने के लिए तीन दिनों तक भागदौड़ करते रहे। मोबाइल से टीका लेने के लिए निबंधन कराया था। पहली बार टीका दिलाने के लिए वह परिवार के सभी सदस्यों को लेकर टुंडी गए तो टुंडी के एक केंद्र पर जहां टीका दिया जा रहा था। वहां महज दो लोगों की ही टीका दिया गया। बाकी चार लोगों को गोविदपुर साहेबगंज रोड में टीका केंद्र पर जाने की सलाह देकर स्वास्थ्य कर्मियों ने अपना पिंड छूड़ा लिए।

इसके बाद वह गोविंदपुर साहेबगंज रो़ड स्थित एक टीका केंद्र पर जाने के लिए निकले लेकिन समय नहीं बचा तो घर आ गए। अब बाकी सदस्यों के लिए दूसरे दिन का स्लॉट मोबाइल पर बुक कराया। इस बार उन्हें एक को चासनाला में टीका केंद्र तो दूसरा जोगता थाना क्षेत्र में स्थित टीका केंद्र पर टीका लगाने का निबंधन हुआ। मोहन ने हार नहीं मानी और सुबह ऑटो में परिवार को लेकर पहले चासनला गया फिर वहां से जोगता पहुंचकर परिवार को टीका दिलवाया। लाहबनी बस्ती के मोहन के इस जुनून को इसलिए सराहा जा रहा है कि उसने अपने परिवार को टीका दिलाने के लिए इतनी मशक्कत की लेकिन अब भी ऐसे लोग हैं, जो टीका लगाने के लिए दूर दराज जाने से परहेज करते हैं। ऐसे में स्थिति में संपूर्ण झारखंड के लोगों को टीका कब तक मिल पाएगा। यह विचारणीय सवाल है.

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