Savan 2021: कोरोना के कारण इस साल भी फीकी हुई कांवर यात्रा Dhanbad News

साल भर भगवान शिव के भक्त सावन मास में कांवड़ यात्रा का इतंजार बेसब्री से करते हैं। लेकिन इस साल भी कोरोना वायरस की वजह से इस साल भी कांवड़ यात्रा नहीं होगी। दरअसल कोरोना की दूसरी लहर के शुरुआती दौर में सरकार अतिरिक्त एहतियात बरत रही है।

Atul SinghSat, 24 Jul 2021 05:49 PM (IST)
साल भर भगवान शिव के भक्त सावन मास में कांवड़ यात्रा का इतंजार बेसब्री से करते हैं। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

जासं, धनबादः साल भर भगवान शिव के भक्त सावन मास में कांवड़ यात्रा का इतंजार बेसब्री से करते हैं। लेकिन इस साल भी कोरोना वायरस की वजह से इस साल भी कांवड़ यात्रा नहीं होगी। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर के शुरुआती दौर में सरकार अतिरिक्त एहतियात बरत रही है। कोरोना की तीसरी लहर के खतरे को भांपते हुए सरकार ने कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई हुई है। इसलिए अभी तक शहर में कंवड़ की दुकान नहीं सजाई गई है। अर्थात जब कोरोना के कारण भोले बाबा का दरबार ही सूना है तो बाजार में मायूसी छाना लाजिमी है। दुकानदारों का कहना है कि पिछले साल जो भी कावड़ बनाई गई थी। अभी तक गोदामों में पड़ी हुई है। पिछले साल कांवड़ व अन्य पूजा सामग्री में बेहद नुकसान हुई थी। उसका भरपाई अभी तक नहीं हो पाया है। सोचा था की इस साल सरकारी आदेश के अनुसार मंदिर खोलने की अनुमति दी जाएगी और पिछले वाले सभी कावड़ बिक बेचे जाएंगे पर ऐसा आभी तक नहीं हुआ है।  

1996 से बनाकर बेच रहे हैं कावड़

हीरापुर हटिया पर कावड़ व अन्य पूजा सामग्री की दुकान लगाने वाले ज्ञानी जैल सिंह बताते हैं कि इस दुकान की शुरुआत सावन माह से ही की गई थी। उस वक्त कावड़ बनाकर बेचा करते थे। जिस वक्त एक कावड़ की कीमत 30 रूपये थी। पिछले साल जो कांवड़ बनाए थे सभी गोदाम में पड़े हुए हैं। इतने सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि भगवान शिव की कावड़ यात्रा में रोक लगने के साथ कार की बिक्री में भी रोक लग गई है। 

बाजार में उपलब्ध है मार्बल के शिवलिंग

मंदिर बंद होने के कारण घरों में पूजा करने के लिए हीरापुर हटिया में लाए गए है बनारस के शिवलिंग।जो मार्बल से बनाई हुई है जिसकी किमत इस वक्त 50 से लेकर 700 रूपये तक है। 

दुकानदारों की राय

सावन महीने में प्रत्येक साल दुकानों में अच्छी खासी भीड़ होती है। परंतु पिछले साल से कांवड़ व गेरुआ वस्त्रो एक भी नहीं बिके है। करीबन 2 सालों मेंं एक लाख रूपये तक का नुकसान हो गया है। 

उमेश गोस्वामी

कोरोना के चलते इस बार वस्त्रों का आर्डर नही दिया। हर साल सावन में फुर्सत नहीं होती थी, इस बार हमलोग खाली बैठे हैं। दो सालों में 90 हजार रुपए तक का नुकसान हुआ है। 

विरजू साव 

इस महीने का पूरे साल इंतजार रहता था। क्योंकि बिक्री अधिक होती थी। दर्शन पर रोक के कारण लोग देवघर बाबा नगरी जाने वाले सामान खरीदने नहीं आ रहे हैं। 

महेश शाह

 सावन शुरू होने के दस दिन पूर्व से ही कांवड के साथ अन्य पूजा सामग्री की मांग शुरू हो जाती थी। सावन माह भर अच्छी बिक्री रहती थी। लेकिन दो सालों में करीबन लाख रूपये तक का नुकसान हो गया। 

ज्ञानी जैल सिंह

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