Sangeeta Soren: झारखंड में खेल प्रतिभा का सम्मान नहीं ! बकरी चरा रही यह इंटरनेशनल फुटबॉलर

Football talent Sangeeta Soren झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा प्रखंड के रेंगुनी पंचायत अंतर्गत बांसमुड़ी गांव में रहने वाली अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर संगीता कुमारी गरीबी से जूझ रही हैं। वह कभी माड़-भात चोखा तो कभी भात नमक खाकर अभ्यास करती हैं। होता है।

MritunjayMon, 17 May 2021 11:37 AM (IST)
बांसमुड़ी गांव में बकरी चराती फुटबॉलर संगीता सोरेन ( फोटो जागरण)।

धनबाद [ अमृत कुमार बाउरी ]।  Football talent Sangeeta Soren सिर्फ तीन साल पहले की ही तो बात है। संगीता कुमारी सोरेन की आंखों में फुटबॉल के खेल में भविष्य को लेकर उजाला ही उजाला चमक रहा था। धनबाद के एक छोटे से आदिवासी गांव बांसमुड़ी से निकल कर भूटान और थाईलैंड तक फुटबॉल के इंटरनेशल गेम में अपनी प्रतिभा दिखाई। इसके बाद जो कुछ हुआ वह सांप-सीढ़ी खेल जैसा है। संगीता को किसी की बैकिंग नहीं मिली और वह फिर से गांव पहुंच गई। अब बकरी चराने को मजबूर है। दिव्यांग पिता की माली स्थिति ठीक नहीं है। भाई दैनिक मजदूरी करता है। बकरी बिकने से कुछ रुपये आते हैं इससे घर का खर्च चलता है। 

माड़-भात और चोखा खाकर हो रहा अभ्यास

झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा प्रखंड के रेंगुनी पंचायत अंतर्गत बांसमुड़ी गांव में रहने वाली अंतरराष्ट्रीय फुटबॉलर संगीता कुमारी गरीबी से जूझ रही हैं। कभी माड़-भात चोखा तो कभी भात नमक पर गुजारा

होता है। नेत्रहीन होने के कारण संगीता के पिता दूबे सोरेन कोई काम करने में असमर्थ हैं। भाई दैनिक मजदूर है। घर की इतनी आमदनी नहीं है कि ठीक से घर-परिवार को गुजर-बसर हो सके। कोरोना काल में उसके भाई को मजदूरी का कोई काम भी नही मिल पा रहा है। इस विपरीत परिस्थिति में भी संगीता रोज फूटबॉल खेल का अभ्यास करती है। गरीबी व आर्थिक तंगी से जूझने के बावजूद उसे कुछ करने का जुनून जिंदा है। वह घर का सभी काम निपटा कर अभ्यास करती है।

गांव के लड़के पहले उड़ाते थे मजाक, अब साथ में लेते सेल्फी

संगीता कहती है कि गांव के मैदान में लड़के जब फुटबॉल खेलते थे तब वह उनसे फुटबॉल खेल में शामिल करने का आग्रह करती थी। लड़के उसे फुटबॉल नहीं खेलाते थे। बस मैदान के पास खड़ी रहती थी कि गेंद कब मैदान के बाहर आये और शॉट लगाने का माैका मिले। संगीता जब मैदान में फुटबॉल पर किक मारती था तब लड़कों ने उसका बहुत मजाक उड़ाया था। संगीता ने इसे चुनौती के रुप में लिया। इसके बाद उसने कड़ी मेहनत शुरू कर दी। कड़ी मेहनत के बदौलत ही संगीता ने फुटबॉल खेल में शानदान प्रदर्शन करने लगी। देखते ही देखते वह भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा बन गई। संगीता ने वर्ष 2018 में भूटान में अंडर - 18 और थाईलैंड में अंडर - 19 खेला। अभी मजाक उड़ाने वाले लड़के उसके साथ सेल्फी लेते हैं। उनकी किक पर तालियां बजाते हैं।

एक जूते के लिए ईंट भट्ठे में की मजदूरी

संगीता कहती है कि वह नंगे पाव फुटबॉल खेल का अभ्यास करती थी। माड़ भात खाकर घर से करीब आठ किमी दूर मेमको मोड़ धनबाद स्थित मैदान में फूटबॉल का अभ्यास करने जाती थी। स्कूल से आने के बाद अभ्यास़ करने जाती थी। नंगे पांव अभ्यास करने में दिक्कत होती थी। इसलिए गांव के पास के एक ईंट भट्ठा में मजदूरी कर 280 रुपये जुटाये और इस रुपये से अभ्यास के लिए जूता खरीदा। कोच अभिजीत गांगूली व संजय ने उन्हें निश्शुल्क फुटबॉल का प्रशिक्षण दिया।

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