भुखमरी के कगार पर BCCL वित्त पोषित विद्यालयों के शिक्षक, 20 माह से वेतन लंबित

कोयला खदान शिक्षक मोर्चा भाकोकोलि यूनिट के सचिव व नार्थ तिसरा मीडिल स्कूल लोदना क्षेत्र के प्राध्यापक अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कोल इंडिया व बीसीसीएल के सीएमडी वरीय अधिकारियों को समस्याओं से अवगत करा शिक्षकों के बकाया वेतन का जल्द भुगतान करने की मांग की है।

MritunjayThu, 22 Jul 2021 01:29 PM (IST)
वेतन भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन करते शिक्षक ( फाइल फोटो)।

जासं, झरिया-तिसरा। भारत कोकिंग कोल लिमिटेड प्रबंधन ने कोलियरी क्षेत्रों में मजदूरों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए लगभग चार दशक पूर्व अनेक विद्यालय खोला था। वर्षों तक विद्यालयों का ठीक-ठाक से संचालन होता रहा पिछले एक दशक से बीसीसीएल प्रबंधन की लापरवाही के कारण शिक्षकों के वेतन में अनियमितता बरती जाने लगी। शिक्षकों की आर्थिक हालत चरमरा गई है। इसके कारण विद्यालय अब जैसे-तैसे चल रहे हैं। आज हालत यह है कि एक और जहां शिक्षक 20 माह से वेतन को तरस रहे हैं। वहीं दूसरी ओर विद्यालयों में बच्चों की संख्या काफी घट गई है।

कोल इंडिया की अन्य इकाइयों में वेतन जारी

कोयला खदान शिक्षक मोर्चा भाकोकोलि यूनिट के सचिव व नार्थ तिसरा मीडिल स्कूल लोदना क्षेत्र के प्राध्यापक अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कोल इंडिया व बीसीसीएल के सीएमडी, वरीय अधिकारियों को समस्याओं से अवगत करा शिक्षकों के बकाया वेतन का जल्द भुगतान करने की मांग की है। कहा कि केवल बीसीसीएल के विद्यालयों के शिक्षकों को ही अक्टूबर 2019 से जून 2021 तक अनुदानित राशि नहीं मिलने से शिक्षकों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। कोल इंडिया की अन्य कंपनी के विद्यालयों के शिक्षकों को वेतन मिल रहा है।

सांसदों को भी समस्याओं से कराया गया अवगत

कोयला खदान शिक्षक मोर्चा के महामंत्री बीके सिंह व बीसीसीएल यूनिट के सचिव अशोक कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पूर्व में कोयला मंत्रालय, कोल इंडिया प्रबंधन, सांसदों विधायकों को भी समस्याओं से अवगत कराया गया था। विद्यालयों के साथ शिक्षकों की दशा सुधारने के लिए ठोस पहल कर एक पालिसी बनाने की मांग की गई थी। किसी ने ध्यान नहीं दिया।

विद्यालयों व विद्यार्थियों का भौतिक सत्यापन के बाद भी स्थिति में नहीं हुआ सुधार

मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि बीसीसीएल कोयला भवन के कार्मिक निदेशक के आदेश पर लगभग सभी विद्यालयों व विद्यार्थियों का भौतिक सत्यापन किया गया। बाद में मात्र छह माह की अनुदानित राशि आवंटित की गई। करोना महामारी को लेकर एक वर्ष से भी अधिक समय से सभी विद्यालय बंद हैं।

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