सरकार बदलते साहब को दिव्यज्ञान की प्राप्ति, करने लगे खनिज संपदा की सुरक्षा Dhanbad News

विधानसभा क्षेत्रों के बदले समीकरण की तपिश नगर निगम कार्यालय तक भी पहुंच चुकी है। अचानक से कई नए चेहरे सक्रिय हो गए हैं।

MritunjayMon, 06 Jan 2020 07:48 AM (IST)
सरकार बदलते साहब को दिव्यज्ञान की प्राप्ति, करने लगे खनिज संपदा की सुरक्षा Dhanbad News

धनबाद, जेएनएन। अधिकारी भी कम नहीं होते हैं। रंग बदलना तो कोई इनसे सीखे। सरकार बदलने के साथ नई सरकार की नजरों में चढऩे और खुद को पाक-साफ साबित करने के लिए क्या-क्या जतन नहीं करते हैं? अब इन साहब को ही लीजिए। सरकार बदलने के बाद इन्हें दिव्यज्ञान की प्राप्ति हुई है कि कहां-कहां खनिज संपदा की लूट हो रही है। और छापेमारी में जुट गए हैं। खुद को ईमानदार और कर्मठ साबित करने में जुटे हैं। वैसे यह साहब जब यहां आए थे तो उस समय भी इन्हें दिव्यज्ञान की प्राप्ति हुई थी। नदियों के किनारे खनिज संपदा की लूट पर छापा मारा था। कुछ दिनों बाद सब कुछ सामान्य हो गया। कहने की आवश्यता नहीं कि छापामारी के बाद सामान्य क्यों हो गए? बदलाव के बाद फिर छापेमारी कर रहे हैं। आप भी मतलब निकाल सकते हैं। निकालिए। 

अध्यक्ष जी का बॉयकॉट

आप राष्ट्रीय पार्टी के मंडल अध्यक्ष हैं। चुनाव संगठन का हो या लोकसभा विधानसभा का, पार्टी में इनका बड़ा महत्व होता है। अध्यक्ष महोदय को भी अपना महत्व पता था सो उसे भुनाने की कोशिश में दगाबाजी की हद तक चले गए। यह भी नहीं सोचा कि चुनाव बाद क्या होगा। मनाने की तमाम कोशिशें विफल साबित हुईं। विधानसभा चुनाव के चाणक्य की भी बात नहीं सुनी। पार्टी छोड़ चुके प्रत्याशी के साथ जा मिले। अब औंधे मुंह गिरे हैं। विरोध के बावजूद पार्टी प्रत्याशी चुनाव जीत गए। विजय जुलूस निकालते नहीं थक रहे। इधर अध्यक्ष जी अलग-थलग पड़ गए। डैमेज कंट्रोल के लिए दो दिन पहले वनभोज का आयोजन किया। राष्ट्रीय पंचायत से स्थानीय तक के प्रतिनिधियों को बुलाया। लेकिन गया कोई नहीं। अध्यक्ष जी बाट जोहते रहे। फोन करते रहे। किसी ने फोन भी रिसीव नहीं किया। टोटली बॉयकॉट। युवाध्यक्ष भूले भटके पहुंच गए। जैसे ही बॉयकॉट की सूचना मिली उल्टे पैर भागे। दिग्गज नेताओं के अभाव में कार्यकर्ताओं ने भी साथ छोड़ दिया। चाल उल्टी पड़ी है।

रूलिंग पार्टी के हैं...

चुनाव खत्म हुआ। सरकार का गठन भी हो गया। पुरानी सरकार की विदाई भी हो गई। सरकार भले नई बनी हो लेकिन पदाधिकारी तो पुरानी सरकार के ही लाए हुए हैं, सो नए चुने गए जनप्रतिनिधियों को पहचान बनाना जरूरी है। पैरवी-पैकारी करना है न। सो यह काम त्वरित गति से शुरू हो चुका है। एक साहब को दो दिन पहले एक नवनिर्वाचित का फोन आया। हलो विधायक बोल रहा हूं। अधिकारी ने अभिवादन किया। जनप्रतिनिधि को इतने से संतोष नहीं हुआ। उन्होंने फरमाया रूलिंग पार्टी से बोल रहा हूं। अब अधिकारी महोदय परेशान। निपटाते ही बोले, यह क्या बात हुई। हम तो सरकार का ही काम कर रहे। पिछले वर्षों में किसी सरकारी काम में किसी सांसद-विधायक की दखलंदाजी नहीं हुई। यहां तो अभी से...। चैंबर में बैठे ही सज्जन ने फरमाया सर, गठबंधन की सरकार है। कई दल शामिल हैं। अभी अध्यक्षों की पैरवी तो आनी बाकी है। 

भइया कहे हैं टैंकर भिजवाइए

विधानसभा क्षेत्रों के बदले समीकरण की तपिश नगर निगम कार्यालय तक भी पहुंच चुकी है। अचानक से कई नए चेहरे सक्रिय हो गए हैं। कहां तो हाल तक डीएम साहब तक का कार्यालय आना कभी कभार ही होता था और कहां तो अब शागिर्दों ने अड्डा जमाना ही शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं निगम कर्मियों को निर्देश भी देने लगे हैं। वह भी अजीबोगरीब। अभी कुछ दिनों पहले एक भइया की पैरवी लेकर कुछ शार्गिर्दों ने धमाचौकड़ी मचाई। कहा झरिया में पानी की किल्लत है। टैंकर भिजवाइये। तुंरत उन्हें बताया गया कि वहां के जितने टैंकर हैं जलापूर्ति में लगे हैं। तत्काल अगला निर्देश मिला, भइया कहे हैं धनबाद-कतरास जहां से हो टैंकर मंगवाइये और झरिया भिजवाइये। पानी की कमी न हो। अब निगम के अधिकारी-कर्मी हैरान इनकी सुनें तो परेशानी न सुनें तो और परेशानी। करें तो करें क्या?

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