Movement Against Child Marriage: पढ़ाई के लिए सफेदा और नसरीना ने उठाई आवाज तो बन गई मिसाल, 20 बेटियों का भी बचाया बचपन

Movement Against Child Marriage सफेदा ने बताया कि 2013 में गांव के बालिका शिक्षण केंद्र में पहली कक्षा में दाखिला लिया। तब 10 वर्ष की थी। तीन साल पढ़ाई की। 2015 में तीसरी कक्षा में थी तब पिता इस्माइल शेख की बीमारी के कारण नानी ने शादी तय कर दी।

MritunjaySat, 24 Jul 2021 05:59 PM (IST)
नसमीरा खातून और सफेदा खातून ( फाइल फोटो)।

गणेश पांडेय, पाकुड़। झारखंड के पाकुड़ जिले के इलामी गांव की सफेदा खातून और रानीपुर गांव की नसमीरा खातून। दसवीं कक्षा की छात्राएं। परिवार वालों ने विवाह तय किया तो दोनों ने विरोध कर दिया। घर वालों को झुकना पड़ा और इन्होंने मां सरस्वती के मंदिर की राह पकड़ ली। इतना ही नहीं ये दोनों करीब 20 लड़कियों को बाल विवाह से बचा चुकी हैं। आज इनके काम से सफेदा के पिता इस्माइल शेख व नसमीरा के पिता इब्राहिम को अपनी बेटियों पर नाज है।

जब तीसरी कक्षा में थी तो तय हो गई सफेदा की शादी

सफेदा ने बताया कि 2013 में गांव के बालिका शिक्षण केंद्र में पहली कक्षा में दाखिला लिया। तब 10 वर्ष की थी। तीन साल पढ़ाई की। 2015 में तीसरी कक्षा में थी तब पिता इस्माइल शेख की बीमारी के कारण नानी ने शादी तय कर दी। मैं रो पड़ी। खाना-पीना छोड़ दिया। शिक्षिका तनूजा व अजीजुर को बताया। दोनों ने स्वजनों को समझाया। अंतत: घरवालों ने भी शादी से इन्कार कर दिया। अधिक उम्र और योग्यता देख 2018 में उच्च विद्यालय इलामी में सातवीं कक्षा में दाखिला हो गया। अब दसवीं में पढ़ती हूं।

फेस के प्रयास से रूकी नसमीरा की शादी

सफेदा जैसी ही कहानी नसमीरा की है। उसने रानीपुर गांव में बालिका शिक्षण केंद्र में 2013 में दाखिला लिया। तीसरी कक्षा में पहुंची तो मां-पिता ने शादी तय कर दी। उसने विरोध किया। समाजसेवी संस्था फेस की सचिव ऋतु पांडेेय को जानकारी दी। संस्था के लोगों ने माता-पिता को शादी टालने के लिए मना लिया। दोनों लड़कियों ने बताया कि खूब पढऩा हमारा सपना है। बाल विवाह रोकना व लोगों को इसके लिए जागरूक करना जीवन का मकसद। फेस संस्था की दीदी भी हम लोगों की मुहिम में साथ हैं।

इन लड़कियों को बाल विवाह से बचाया

सफेदा और नसमीरा ने नौवीं कक्षा की मोहसिना खातून, जायफा खातून, हसीबा खातून, तुहीना खातून, मुनीजा खातून, अख्तारा खातून, सेबिना खातून, तस्मीरा खातून, फहमिदा खातून, तस्लीमा खातून, फरहाना खातून, आठवीं कक्षा की शबाना, इस्मत, सबिना, अजीजा परवीन, शाहीना, करीमा, फरहाना, साजेनुर, नाजनीन का बचपन बचाया। इनकी तय शादियां रुकवा दीं। अब सभी पढ़ाई कर रही हैं।

बीड़ी बनाकर पढ़ लूंगी, शादी नहीं करूंगी

इलामी गांव की फरहाना ने बताया कि गांव में कम उम्र में बेटियों की शादी हो जाती है। हमारी शादी पिता मुकेसुद्दीन शेख और मां नजमीरा ने तय कर दी। मेरी उम्र 14 वर्ष थी। सातवीं में पढ़ रही थी। शादी का विरोध किया। सहेली सफेदा को बताया। वह बालिका शिक्षण केंद्र की शिक्षिका को लेकर घर आई। माता-पिता को समझाया। वे हमारी शादी न करने को मान गए। हमने कह दिया कि बीड़ी बांधकर पढ़-लिख लेगी। शादी नहीं करेगी। इलामी की अख्तारा खातून ने बताया कि माता-पिता ने 2019 में शादी तय कर दी। तब उम्र करीब 15 वर्ष थी। मैंने इन्कार कर दिया। सफेदा और नसरीना को बताया। दोनों घर आईं। मां रोसनारा को समझाया। मां ने पिता से कहा कि अख्तारा पढऩा चाहती है। बीड़ी बांधकर पढ़ाई कर लेगी। घर से पैसे नहीं मांगेगी। पिता मान गए। मैं बीड़ी बांधकर न सिर्फ पढ़ाई कर रही हूं बल्कि परिवार की भी मदद कर रही हूं।

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