रेल हादसे रोकने के लिए धनबाद के युवक ने बनाया एप, रेलवे ने किया आत्मसात Dhanbad News

धनबाद[तापस बनर्जी]। धनबाद के जोड़ा फाटक रोड में रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर उज्ज्वल कुमार ने तीन महीने की कसरत के बाद एक ऐसा मोबाइल एप विकसित किया है, जिससे रेलवे ट्रैक के प्वाइंट की मॉनीट¨रग हो सकेगी। मोबाइल ऐप क्यूआर यानी क्विक रिस्पांस कोड के साथ वेब पोर्टल आधारित है। इससे न सिर्फ प्वाइंट की मॉनीट¨रग की जा सकेगी बल्कि निरीक्षण रिपोर्ट का डाटाबेस तैयार करने में भी मदद मिलेगी। रेल अधिकारी जब चाहें अपने दफ्तर में बैठकर अलग-अलग जगहों के प्वाइंट की जानकारी हासिल कर सकेंगे। इससे यह आसानी से पता चल जाएगा कि संबंधित अधिकारी ने प्वाइंट की जांच की थी या नहीं। इससे हादसे रोकने में काफी मदद मिलेगी।

मोबाइल एप को पूर्व रेलवे के आसनसोल डिवीजन ने अपनाया है। इसकी मदद लेना भी शुरू कर दिया गया है। 1300 में से 1000 प्वाइंट्स अब मोबाइल पर आसनसोल रेल मंडल के अलग-अलग हिस्से में 1300 प्वाइंट्स हैं जिनमें से एक हजार को मोबाइल ऐप से कनेक्ट कर दिया गया है। यानी इन एक हजार प्वाइंट्स की मॉनीट¨रग मोबाइल ऐप से हो सकेगी। ए प बताएगा मेंटीनेंस रिकॉर्ड और निरीक्षण की तिथियां प्वाइंट के निरीक्षण के दौरान रिपोर्ट तैयार की जाती है। इसके लिए अलग-अलग तिथियां निर्धारित होती हैं। उन तिथियों में रेलवे सीनियर सेक्शन इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर सरीखे अधिकारी अलग-अलग जगहों पर निरीक्षण करते हैं। कई बार तय तिथियों में निरीक्षण नहीं हो पाता है। अब एप की मदद की मदद से तय तिथि में निरीक्षण में मदद मिलेगी। सिग्नल एंड टेलीकॉम विभाग के अधिकारी यह आसानी से जान सकेंगे कि पिछली बार निरीक्षण कब हुआ और अगली तारीख क्या है। क्यों जरूरी है प्वाइंट का समय पर मेंटीनेंस यात्री ट्रेनों और मालगाड़ी के पटरी से उतरने की घटनाओं के ज्यादातर मामले प्वाइंट में गड़बड़ी से जुडे़ होते हैं। दुर्घटना के बाद इंक्वायरी में यही पाया जाता है कि प्वाइंट का समय पर मेंटीनेंस न होने या अन्य किसी तकनीकी खराबी की वजह से दुर्घटना हुई। अब एप की मदद से यह प्रक्रिया आसान हो जाएगी। धनबाद जिले के प्रधानखंता से कुमारधुबी तक के सभी स्टेशन आसनसोल रेल मंडल के अधीन। प्रधानखंता से कुमारधुबी तक के सभी प्वाइंट्स मोबाइल ऐप से जुड़े।

रेलवे की डिमांड क मुताबिक क्यूआर कोड आधारित एप तैयार किया है। इससे विभागीय कर्मियों को मैनुअली काम नहीं करना होगा। रेलवे चाहे तो भविष्य में इस एप को और अपडेट किया जा सकता है।

- उज्ज्वल कुमार, निदेशक यूइंफोटेक्नोलॉजी

दूसरे जोन में ऐसा एप विकसित हुआ है या नहीं, इस बारे नहीं कह सकते हैं। पर पूर्व रेलवे में पहली बार ऐप विकसित किया गया है। इससे प्वाइंट मॉनीटरिंग में काफी मदद मिलेगी।

-निखिल चक्रवर्ती,सीपीआरओ पूर्व रेलवे

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