SAIL: प्रबंधन ने की 80 करोड़ रुपये की व्यवस्था, अब दूरी होगी जूनियर अधिकारियों की वेतन विसंगति

SAIL साल 2008 व 2010 में आंतरिक पदोन्नति योजना द्वारा कर्मचारी से अधिकारी बने अफसरों का वेतन कर्मचारियों से कम हो गया था। चूंकि कर्मचारियों का पिछला पे रिवीजन एक जनवरी 2012 को हुआ था इसलिए उनका मूल वेतन व महंगाई भत्ता जूनियर अफसरों से अधिक हो गया था।

MritunjaySat, 20 Nov 2021 08:21 AM (IST)
स्टील अथोरिटी आफ इंडिया लिमिटेड आफिस ( फाइल फोटो)।

जागरण संवाददाता, बोकारो। महारत्न कंपनी सेल में कर्मचारी से अधिकारी बने साल 2008-10 बैच के अधिकारियों के वेतनमान की विसंगति अब दूर हो जाएगी। प्रबंधन ने कंपनी में पे रिवीजन को लागू करने के साथ ही इसके लिए 80 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रबंध कर लिया है। यह राशि इसी माह तक उनके वेतन में इंक्रीमेंट के आधार पर दे दी जाएगी। इससे बोकारो इस्पात संयंत्र सहित सेल की अन्य इकाई में कार्यरत लगभग 16 सौ अधिकारी लाभान्वित होंगे।

कर्मचारियों से कम हो गया था अधिकारियों का वेतन

सेल में साल 2008 व 2010 में आंतरिक पदोन्नति योजना द्वारा कर्मचारी से अधिकारी बने अफसरों का वेतन कर्मचारियों से कम हो गया था। चूंकि कर्मचारियों का पिछला पे रिवीजन एक जनवरी 2012 को हुआ था, इसलिए उनका मूल वेतन व महंगाई भत्ता जूनियर अफसरों से अधिक हो गया था। वहीं अधिकारियों का पिछला पे रिवीजन एक जनवरी 2007 को हुआ था। इस राशि में संतुलन बनाए रखने के लिए प्रबंधन ने एक कमेटी का गठन किया था, जिसमें बीएसएल के अधिशासी निदेशक कार्मिक व प्रशासन समीर स्वरूप भी बतौर सदस्य शामिल हैं। कमेटी के चेयरमैन भिलाई इस्पात संयंत्र के अधिशासी निदेशक कार्मिक-प्रशासन सुरेश दूबे हैं। वे अगले माह रिटायर होने वाले हैं। इससे पूर्व ही कमेटी की ओर से मामले पर अपनी रिपोर्ट गुरुवार को सेल मुख्यालय को सौंप दी गई है। इससे यह साफ हो गया है कि साल 2008-10 बैच के ई-जीरो बने अधिकारियों की वेतन विसंगति अब दूर हो जाएगी।

सेल-सेफी की बैठक में जमकर हंगामा

बीते 13 नवंबर को हुई सेल-सेफी की बैठक में जूनियर अधिकारियों के वेतनमान को लेकर जमकर हंगामा हुआ था। इसके बाद सभी इस्पात संयंत्र के अधिकारी संगठन मसले के निदान के लिए प्रबंधन पर दबाव बना रहे थे। इसका एक प्रमुख कारण यह बताया जाता है कि सेल की बोकारो, राउरकेला आदि इकाई में दिसंबर माह में आफिसर एसोसिएशन का चुनाव होना है। ऐसे में वर्तमान कमेटी अपनी साख को बरकरार रखने के लिए जूनियर अधिकारियों के पक्ष में खुल कर सामने आ गई है। चूंकि 2008-10 बैच के अधिकरियों की संख्या लगभग 16 सौ है, इसलिए उनका वोट चुनावी समीकरण में बड़ा फेरबदल कर सकता है।

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