रांची जेल में बंद शूटर ने बोला-चार दिन में मार डालो, शागिर्दों में मार डाला; पढ़ें-Niraj Tiwari Murder Case की कहानी

Niraj Tiwari Murder Case धनबाद के कतरास निवासी नीरज तिवारी की 2 सिंतबर की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कहा जाता है कि वह पुलिस का मुखबिर था। रांची जेल में बंद शूटर अमन सिंह के कई आदमियों को पकड़वाया था। इससे अमन नाराज था।

MritunjayWed, 15 Sep 2021 11:53 AM (IST)
शूटर अमन सिंह और नीरज तिवारी ( फाइल फोटो)।

विसं, धनबाद। कतरास थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुखबिर नीरज तिवारी की 2 सितंबर को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कहा जाता है कि नीरज ने रांची के होटवार सेंट्रल जेल में बंद शूटर अमन सिंह के कई आदमियों को पुलिस के हाथों गिरफ्तार करवाने में भूमिका निभाई थी। इससे अमन नाराज था। उसी के इशारे पर उसके शागिर्दों में हत्या कर दी। इस हत्याकांड में गिरफ्तार गिरफ्तार रौनक गुप्ता, गणेश गुप्ता एवं दिलीप कुमार यादव ने पुलिस के समक्ष कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। तीनों ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा है कि अमन सिंह के आदेश देने के बाद रौनक ने नीरज को शराब पिलाने के नाम पर बुला लिया। करीब 8:15 बजे नीरज, रौनक और रोहित ने शराब पी। इस दौरान नीरज तिवारी को विश्वास में ले लिया। फिर वे चंद्रमा यादव के चाय दुकान पर गुटखा और सिगरेट लेने के लिए आ गए। दुकान के बाहर बेंच पर बैठकर सिगरेट पीते हुए वे बातचीत कर रहे थे। इस बीच दुकानदार अपना दुकान बंद कर घर चला गया। बेंच दुकान के बाहर ही रहता है। उसी पर तीनों बैठकर बातचीत कर रहे थे। इन लोगों को देखकर वहां प्रिंस एवं सुजल ने आशीष रंजन को फोन कर दिया कि चंद्रमा यादव के चाय दुकान पर नीरज तिवारी, रौनक गुप्ता एवं रोहित गुप्ता बैठे हुए हैं।

शुभम चला रहा था बाइक, पीछे था आशीष

फोन पर जानकारी मिलते ही आशीष रंजन और शुभम दोनों वहां बाइक से पहुंच गए। शुभम बाइक चला रहा था और शूटर आशीष रंजन पीछे बैठा था। शुभम ने नीरज तिवारी के सामने बाइक रोक दी। फिर तुरंत आशीष रंजन अपने पास से पिस्टल निकालने लगा तो नीरज तिवारी ने देख लिया। वह बचने के लिए भागने की कोशिश करने लगा। आशीष रंजन ने उसे कोई मौका नहीं दिया और ताबड़तोड़ गोली चलाने लगा। इसी भागम-भाग में दो गोली रोहित को लग गई तथा रौनक के हाथ में एक गोली लग गई। गोली चलाकर आशीष और शुभम भाग निकले। आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी तो रौनक घबरा गया। पकड़े जाने के भय से रौनक भी अपनी पिस्टल वहीं फेंकना चाह रहा था, पर उसी समय भीड़ में दिलीप यादव भी पहुंच गया। रौनक ने चुपके से छिपाकर अपना पिस्टल दिलीप यादव को दे दिया। रोहित गुप्ता गोली लगने से घबरा गया और पास की गली की ओर भाग गया। भीड़ देखकर रौनक और रोहित भी नाटक करने लगे कि हम सबको गोली मार दिया। भीड़ उन्हेंं सहानुभूति देने लगी। इसी दौरान कतरास थाना की पुलिस भी पहुंच गई और इलाज के लिए उन्हें अस्पताल ले गई।

बस स्टैंड के पीछे पी थी शराब

घटना से पूर्व नीरज, रौनक और रोहित शराब पीने के लिए कतरास बस स्टैंड के पीछे गए थे। वहां से कभी रौनक तो कभी सुजल गुप्ता जलेबी दुकान के पास खड़े प्रिंस व आशीष रंजन को मोबाइल से सूचना दे रहे थे। रौनक भी अपने पास कमर के पीछे की तरफ एक लोडेड पिस्टल रखे हुए था ताकि जरूरत पडऩे पर वह भी गोली चला सके।

अमन से किया वादा तोड़ा, इसलिए हुई हत्या

रौनक गुप्ता करीब आठ दस माह पूर्व जेल गया था। वहां उसकी मुलाकात पूर्व से अमन सिंह गैंग के रवि ठाकुर, शुभम यादव, चंदन यादव और दिलीप यादव से हुई थी। वहां उनके साथ मिलकर काम करने की सहमति बनी थी। जेल में ही नीरज तिवारी एवं अमन सिंह से परिचय हुआ था। एक साथ जेल में रहने के दौरान तीनों लोग अमन सिंह गैंग का हिस्सा बन गए। अमन सिंह को नीरज तिवारी ने कहा था कि वह उसके गैंग का हिस्सा बनेगा। बड़े व्यापारियों का मोबाइल नंबर देगा। साथ ही उनकी रेकी भी करेगा, लेकिन नीरज तिवारी जेल से बाहर आने के बाद वादे के अनुसार काम नहीं करने लगा। उसने किसी व्यवसायी का मोबाइल नंबर उपलब्ध नहीं कराया। उसने गैंग के बहुत सारे सदस्यों का नंबर भी ब्लाक कर दिया। इसके बाद जेल में ही इन लोगों ने इस बात की योजना बना ली कि जो जेल से पहले छूटेगा वह अमन सिंह से संपर्क कर उसके शूटर आशीष रंजन उर्फ छोटू एवं अमर रवानी को लोकेशन देगा तथा वे नीरज को जान से मार देगा।

सुजल, गणेश, प्रिंस व रोहित ने किया सहयोग

कतरास का सुजल गुप्ता, प्रिंस स्वर्णकार, गणेश गुप्ता, रोहित गुप्ता एवं अन्य लोग इनके मददगार थे। चार-पांच माह पहले जब दिलीप यादव जेल से बाहर निकला तभी से वह रौनक को जेल के अंदर ही नीरज तिवारी की गतिविधि की जानकारी देता था। 

28 अगस्त को अमन ने दिया था मर्डर का आदेश

चार-पांच दिन पहले जब रौनक जेल से छूटा तो अपने गैंग के लोगों को पार्टी दी। 28 अगस्त को धनबाद जेल से रवि ठाकुर ने वाट्सएप पर रौनक के मोबाइल नंबर पर काल कर बताया कि रांची जेल से अमन भैया फोन किए थे कि नीरज तिवारी को भी चार दिन में खत्म कर देना है। इसके बाद अमन भाई द्वारा रांची जेल में ही प्लान बनाया गया।

बनारस से आए शूटर आशीष व अमर

दो सितंबर को दो शूटर आशीष रंजन और अमर रवानी बनारस से धनबाद आए। उन्हें दिलीप यादव एवं शुभम यादव स्काॢपयो से लाकर अपने घर में रखा। अन्य लोग नीरज तिवारी पर 24 घंटे निगरानी रखने लगे। अमन के बताए अनुसार रौनक, नीरज तिवारी को अपने विश्वास में लेने लगा। साथ में दो-चार दिन खूब पार्टी किया। जब नीरज तिवारी रौनक पर पूरा विश्वास करने लगा तथा उसके बुलाने पर कहीं भी आ-जा रहा था तो रौनक ने उसके बारे में अमन सिंह को रवि ठाकुर के माध्यम से सूचना भिजवाया।

दिलीप, शुभम के घर रुके थे शूटर

योजना के अनुसार दिनांक 2 सितंबर को अमन के दो शूटर आशीष रंजन एवं अमर रवानी इनोवा गाड़ी से राजगंज डिग्री कालेज के पास आए। उन्हें लाने के लिए रौनक ने शुभम यादव एवं दिलीप यादव को स्काॢपयो से राजगंज भेजा। उन दोनों को दिलीप यादव और शुभम यादव अपने घर सोनारडीह लेकर आया। कुछ ही देर में रौनक, गणेश गुप्ता, सुजल गुप्ता, रोहित गुप्ता, प्रिंस स्वर्णकार, सुनील पासी, विनय चौहान, दिलीप यादव एवं राहुल नोनिया वहां पहुंचे। वहां नीरज की हत्या की पूरी तैयारी की गई। तय हुआ कि जहां पर नीरज तिवारी को मारना है उस जगह की ठीक से रेकी हो जाना चाहिए। योजना बनी कि रौनक और रोहित गुप्ता नीरज तिवारी को किसी तरह चंद्रमा यादव की चाय दुकान पर लेकर आएंगे। सुजल गुप्ता व प्रिंस अपने मोबाइल से जलेबी के ठेला के पास खड़ा होकर आशीष रंजन और अमर रवानी को बताएंगे। आशीष रंजन ने बोला कि सुजल गुप्ता का घर नीरज तिवारी के घर के बगल में है, इसलिए वह उसकी पूरी खबर देगा। गणेश गुप्ता ने अपना मोबाइल सुजल को दे दिया और उसको बोला कि तुम नीरज तिवारी के घर के पास से उसका लोकेशन देते रहना। शाम को घटना को अंजाम देते समय सुजल गुप्ता ही वाट्सएप काल करके आशीष रंजन एवं अमर रवानी को सूचना देगा।

घटना के पहले आशीष और अमर रवानी ने की थी रेकी

अमर रवानी एवं शुभम दोनों बोले कि काम को अंजाम देने से पहले एक बार हम लोगों को शाम में ही हल्का अंधेरा होने पर उस जगह पर जाकर रेकी कर लेना है। आशीष रंजन और अमर रवानी अपने साथ लाए तीन पिस्टल, एक कट्टा एवं गोली भी दिखाया। अमर रवानी पूरी तरह रास्ता नहीं देखा था, इसीलिए अमर रवानी और आशीष रंजन पल्सर मोटरसाइकिल एवं दिलीप यादव के पैशन प्रो मोटरसाइकिल जो बिना नंबर का है, उससे कतरास बाजार के लिए निकले। निकलते समय आशीष रंजन ने शुभम का मोबाइल प्रयोग करने के लिए ले लिया। सभी चंद्रमा यादव के चाय दुकान पर गए और आने एवं भागने का रास्ता देखा। फिर सभी शुभम यादव के घर आ गए।  इसके बाद रौनक और रोहित गुप्ता दोनों अपनी स्कूटी से चंद्रमा यादव के चाय दुकान के पास बैठ गए। नीरज तिवारी अपने घर पर नहीं था, इसलिए उसको साथ लेकर नहीं आए। नीरज तिवारी से फोन पर बात किए तो पता चला है नीरज तिवारी कांको मोड पर अपने काम से गया है। किसी तरह उसे बार-बार फोन कर रौनक गुप्ता ने बुलाया और फिर घटना को अंजाम दिया गया।

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