Nabj-E-Sehat: कोरोना, कोविड, क्वारंटीना... इस काल में इससे यादगार नाम और क्या हो सकता; पढ़ें नामकरण की रोचक स्टोरी

जब कोरोना का संक्रमण चरम पर था तब लोग टीका लेने के लिए खूब हाय-तौबा मचा रहे थे। तब बस एक ही ख्वाहिश थी कि बस किसी तरह टीका लग जाए। अब कोरोना का प्रकोप कम हुआ तो लोग टीका को भी भूल गए। तरह-तरह की टीका-टिप्पणी भी कर रहे।

MritunjaySat, 12 Jun 2021 06:31 AM (IST)
बच्चों के नए नाम, कोरोना और क्वारंटाइन।

धनबाद [ दिनेश कुमार ]। लॉकडाउन की वजह से भले दुनिया परेशान हो, लेकिन छोटे बच्चों को मानो मुंहमांगी मुराद मिल गई। एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें दो बच्चे कह रहे कि कोरोना को रोकने के लिए चाहे जितने दिन स्कूल बंद रखने पड़ें, रखो मोदीजी, हम बलिदान देने को तैयार हैं। खैर, जनवरी-फरवरी में कोरोना की रफ्तार कम होते देख मां-बाप ने बच्चों की कॉपी-किताबें ढूंढ़नी शुरू ही की थी कि दूसरी लहर आ गई। अब एक ओर जहां पहले से बच्चे घर में हैं, वहीं सैकड़ों घरों में किलकारियां भी गूंजीं। वह भी जिले के उसी मेडिकल कॉलेज के रास्ते, जहां कोरोना संक्रमित भर्ती थे। धनबाद में कोरोना की दूसरी लहर में ६९६ बच्चे इस दुनिया में आए। लोगों ने इसमें भी नयापन ढूंढ लिया। बच्चों के नाम च्कोविडज् और च्क्वारंटीनाज् रखे गए हैं। अब कोरोना की तमाम कड़वी यादों के बीच यही तो खुशियों के चंद लम्हे हैं।

टीका पर न कीजिए टिप्पणी

जब कोरोना का संक्रमण चरम पर था, तब लोग टीका लेने के लिए खूब हाय-तौबा मचा रहे थे। तब बस एक ही ख्वाहिश थी कि बस किसी तरह टीका लग जाए। अब कोरोना का प्रकोप कम हुआ तो लोग टीका को भी भूल गए। तरह-तरह की टीका-टिप्पणी भी कर रहे। इनमें भी सबसे अलहदा हैं कि ग्रामीण इलाकों के जनप्रतिनिधि। बिना टीका लिये क्षेत्र भ्रमण कर रहे हैं। ऊपर से निर्देश आने पर ग्रामीणों को भी इशारा करते हुए टीका लेने की सलाह दे देते हैं, लेकिन ग्रामीण भी समझदार। इशारा समझ जाते हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य कर्मचारी पूरे दिन टीकाकरण केंद्रों पर मक्खियां मार रहे। अब ऐसी स्थिति भला प्रशासन को कैसे मंजूर हो सकती है। बीते सप्ताह उपायुक्त खुद गांव पहुंचे और सबसे पहले ऐसे प्रधानों को ही टीका लगवा दिया। अब बाकी लोगों को भी तमाम तरीके से समझाया-बुझाया जा रहा है।

फेफड़ों को भाया जुंबा डांस

कोरोना से बचने को लोगों ने क्या-क्या जतन नहीं किए। हल्दी-दूध के साथ काढ़ा पीया। हर दो घंटे पर भाप लिया, योग-प्राणायाम भी किया। कई लोगों ने इससे कोरोना को हराया भी, लेकिन अब धनबाद में एक और नया प्रयोग शुरू हुआ है। यहां कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बने एसएनएमएमसीएच के पीजी ब्लॉक में जुंबा डांस क्लास की शुरुआत की गई है। यहां भर्ती २० कोरोना संक्रमित तेज म्यूजिक की धुन पर खूब झूमते नजर आए। स्वास्थ्यकर्मियों के अनुसार, जुंबा डांस स्वस्थ रहने के लिए काफी कारगर है। इस डांस को करते वक्त खूब कूदना होता है, जिससे फेफड़ों की सक्रियता काफी बढ़ जाती है। इससे सांस से जुड़ी परेशानी दूर होती है और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं। कोरोना काल में और क्या चाहिए। फेफड़े ही तो मजबूत रखने हैं। मरीज मनोयोग से जुंबा डांस कर फेफड़ों को लंबी उम्र दे रहे हैं।

मरीज न मिला, मिल गई शराब

जब से बिहार में शराबबंदी हुई है, झारखंड के रास्ते होकर गुजरने वाली एंबुलेंस पर पुलिस की खास नजर रहती है। इसके कारण भी हैं। प्रशासन को चकमा देने के लिए शातिर शराब तस्करी में इसी एंबुलेंस का प्रयोग कर रहे हैं। बिहार-झारखंड में कई बार ऐसे मामले सामने आए, जिसमें पुलिस ने एंबुलेंस से अवैध शराब की खेप पकड़ी। इस बार धनबाद में भी ऐसी ही चोरी पकड़ी गई। शराब ढो रही एक एंबुलेंस पर एएसपी की नजर पड़ गई। फिल्मी स्टाइल में पीछा कर गाड़ी को रोक लिया। तलाशी ली तो एंबुलेंस में मरीज तो नहीं मिला, पर सीट के नीचे शराब की १५ बोतलें मिल गईं। पूछने पर गाड़ी वाले ने सफाई दी कि नई गाड़ी खरीदी है। दोस्त पार्टी मांग रहे हैं। इसी कारण ले जा रहे थे। तस्करी की पुष्टि नहीं हुई तो चेतावनी देकर माफ कर दिया गया।

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