Dhanbad: सावधान ! शहर में है लावारिस कत्तों का आतंक; राहगिरों को बनाते है अपना शिकार

इन दिनों सड़कों में लावारिस कुत्तों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। झरिया की सड़कों में दिन रात अपना कब्जा बना कर रखे हुए है। कुत्तों का झुंड रात के वक्त अंधेरी सड़कों पर लोगों का पीछा कर उसपर हमला कर देते है।

Atul SinghThu, 16 Sep 2021 04:21 PM (IST)
इन दिनों सड़कों में लावारिस कुत्तों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

सुमित राज अरोड़ा, झरिया: इन दिनों सड़कों में लावारिस कुत्तों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। झरिया की सड़कों में दिन रात अपना कब्जा बना कर रखे हुए है। कुत्तों का झुंड रात के वक्त अंधेरी सड़कों पर लोगों का पीछा कर उसपर हमला कर देते है। इतना ही नही रात के समय मवेशियों को भी घायल कर देते है। रात के अंधेरे में लावारिस कुत्तों से लोगों को रात के समय सड़क चलने में भी भय का माहौल बना रहता है। वही नगर निगम की और से इन लावारिस कुत्तों पर कोई ठोस कदम भी नही उठाई जा रही है।

जिसका खामियाजा आम लोगों को उठाना पढ़ रहा है। कोरोना काल में दुकानें समय से पहले ही बंद हो जाने से सड़कें सुनसान हो जाती है। इसके बाद लावारिस कुतों का राज लोगों के लिए मुसीबत का सबब बन जाता है। आलम यह है की आते जाते लोगों के साथ दो पहिया वाहनों का पीछा कर उसपर झुंड बना कर हमला कर देते है। जिससे कई बार दो पहिया वाहन चालक चोटिल हो जाते है। वही लोगों का कहना है कि रात के समय कुत्तों का झुंड देख कई बाइक सवार अपना रास्ता बद लेते है। यह लावारिस कुत्ते कब किस पर हमला कर दे कहना मुश्किल है। यदि नगर निगम चाहे तो इन लावारिस कुत्तों के आतंक से आम लोगों को निजात दिला सकते है पर एसा होता नही है।

 कुत्तों का झुंड हर गलियों में घुमते रहते है। इसकी संख्या इतनी बढ़ गई है कि आम लोगों को इसके पास जाने से भी डर बना रहता है। कई बार लावारिस कुत्ते लोगों को चोटिल कर चुके है।

- मंजीत कुमार, झरिया।

 कुत्तों का आतंक दिनों दिन बढ़ता ही जा रहा है। इन कुत्तों के आतंक से सभी डरा हुआ है। रात के अंधेरे में घर से बाहर जाने से भी लोगों को डर लगता है।

अमित साहु, झरिया।

 इन कुत्तों के आतंक से आम लोगों को बचाने के लिए ना ही जनप्रतिनिधि कोई पहल कर रही है और ना ही नगर निगम भगवान भरोसे ही लोग अपनी जान बचा रहे है।

- विनोद अग्रवाल, झरिया।

 कोरोना काल के वजह से शहर की दुकानें जल्द ही बद हो जाती है। जिस वजह से शहर की सड़क सुनसान हो जाती है। सड़क में रात के अंधेरे में कुत्तों के आतंक से हर कोई परेशान है।

- मो. सिकंदर ।

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