Maha Navami 2021: नवरात्रि के नौवें दिन बुराई और दुराचार को समाप्त करने के लिए दी जाती बलि

नवरात्रि के नौवें दिन बलि की परंपरा सदियों से चली आ रही है। देश काल व स्थान के अनुसार बलि देने की परंपरा व विधि है। भतुआ गन्ना नारियल की प्रतीकात्मक बलि के साथ ही पाठा आदि की भी बलि दी जाती है।

Atul SinghThu, 14 Oct 2021 10:45 AM (IST)
नवरात्रि के नौवें दिन बलि की परंपरा सदियों से चली आ रही है। (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

जासं, धनबादः  नवरात्रि के नौवें दिन बलि की परंपरा सदियों से चली आ रही है। देश, काल व स्थान के अनुसार बलि देने की परंपरा व विधि है। भतुआ, गन्ना, नारियल की प्रतीकात्मक बलि के साथ ही पाठा आदि की भी बलि दी जाती है। महाअष्टमी के माैके पर बुधवार को धनबाद में कई पूजा मंडपों में विशेष पूजा की गई। इसके बाद महानवमी पर बलि दी गई। पौराणिक परंपरा के अनुसार इस दुर्गा पूजा में बलि देने की प्रथा  है। ऋषिकेश, मिथिला व बंगला पंचांग के अनुसार बुधवार रात 11:48 से महानवमी शुरू हो गई है जो गुरुवार दोपहर 3:30 तक हैं। महानवमी पर दो तरह से बलि देने की प्रथा है। वैष्णवी माता के आराधक कुम्हड़े, गन्ना, नारियल आदि की बलि देते हैं। वहीं तामसी दुर्गा के आराधक माता दुर्गा को पशु बलि देते हैं। अपने अंदर की बुराई और दुराचार को समाप्त करने के लिए बलि दी जाती है। शहर के बरमसिया, सरायढ़ेला, मटकुरिया के साथ कई लोगों ने घर पर ही पूजा आराधना कर बलि देने की प्रथा पूरी की। तथा मां दुर्गा से सुख समृद्धि के लिए कामना की।  

बरमसिया में इस बार 50वां साल पूरी की जाएगी बलि सी प्रथा

बरमसिया दुर्गा मंडप आयोजक समिति के सदस्य मदन महतो ने कहा कि यहां इस बार बलि की 50वां साल हैं। मां देवी दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा का आयोजन किया गया है। पूर्वजों ने यहां बलि प्रथा शुरू की थी। अब यहां पाठा बलि के जगह कुम्हड़े की बलि दी गई। इस माैके पर बड़ी संख्या में लोग शामिल होते है।  

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