लाकडाउन के बाद बढ़ी एचआइवी मरीजों की संख्या, 20 दिन में मिले 25 संक्रमित

लाकडाउन के बाद धनबाद में एचआइवी से ग्रसित मरीजों की संख्या अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। 20 दिन में ही एसएलएनएमसीएच के एंटी रिट्रो वायरल थेरेपी (एआरवी) सेंटर में 25 मरीजों की पहचान हुई है। अमूमन एक महीने में धनबाद में आठ से दस एचआइवी मरीज मिलते थे।

JagranWed, 23 Jun 2021 06:05 AM (IST)
लाकडाउन के बाद बढ़ी एचआइवी मरीजों की संख्या, 20 दिन में मिले 25 संक्रमित

मोहन गोप, धनबाद : लाकडाउन के बाद धनबाद में एचआइवी से ग्रसित मरीजों की संख्या अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। 20 दिन में ही एसएलएनएमसीएच के एंटी रिट्रो वायरल थेरेपी (एआरवी) सेंटर में 25 मरीजों की पहचान हुई है। अमूमन एक महीने में धनबाद में आठ से दस एचआइवी मरीज मिलते थे। कोरोना काल की वजह से सेंटर में जांच कराने के लिए अप्रैल और मई में कोई भी संदिग्ध मरीज नहीं पहुंचे। संक्रमण के घटने के बाद एक से 20 जून के बीच जांच कराने के लिए 350 लोग आए। इसमें से 25 लोग एचआइवी संक्रमित पाए गए हैं। इन सभी की पहचान करके इन्हें संबंधित दवाई शुरू की गई है। साथ ही एचआइवी के साथ बेहतर तरीके से जीने के लिए काउंसलिंग भी की गई है। इसमें अधिकांश मरीज झरिया, कतरास और निरसा इलाके के हैं। अधिकांश मरीज बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूर

सेंटर के सीनियर काउंसलर अभय कुमार ने बताया कि मरीजों में अधिकांश प्रवासी मजदूर हैं। लाकडाउन में बाहर से काफी संख्या में यह अपने घर लौटे हैं। फिर लाकडाउन लग जाने के कारण यह जांच नहीं करवा पाए। अब इनके जांच केंद्र पहुंचने के बाद संख्या में इजाफा हो रहा है। शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता हो जाती है कम, काउंसलिंग बेहद जरूरी

एचआइवी के मरीजों में शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम हो जाती है। यही वजह है कि ऐसे मरीजों को कई गंभीर संक्रामक बीमारियां होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती हैं। इसमें कोरोना के साथ ही टीवी का संक्रमण भी काफी तेजी से हो सकता है। अभय बताते हैं कि यही वजह है कि एचआइवी मरीजों की शुगर और टीवी की जांच अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही कोरोना जांच की जा रही हैं ताकि संक्रमित होने पर ऐसे मरीजों को सही समय पर इलाज शुरू किया जा सके। केंद्र से जुड़े हैं तीन हजार एचआइवी मरीज

एआरटी केंद्र से धनबाद, बोकारो गिरिडीह आदि क्षेत्रों के तीन हजार मरीज जुड़े हुए हैं। फिलहाल 900 मरीजों की दवा केंद्र से चल रही है, बाकी के मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। मरीजों को प्रतिमाह दवा के लिए केंद्र आना पड़ता है। सरकार की तरफ से दवाएं निश्शुल्क दी जाती है।

डाउनलोड करें हमारी नई एप और पायें अपने शहर से जुड़ी हर जरुरी खबर!

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.