Dhanbad: आजादी के बाद से नहीं बनी निचितपुर रेलवे स्टेशन जाने वाली मार्ग, लोग होते रहते हैं दुर्घटना के शिकार

कमोवेश यही स्थिति इसके दूसरे मार्ग की भी हिरक मार्ग से निचितपुर जाने वालीमार्ग की है। इस मार्ग को तो अभी हाल में ही बीसीसीएल ने लाखों रुपए खर्च कर बनाया है लेकिन संवेदक द्बारा घटिया सामग्री से निर्माण करवाने के कारण यह सड़क एक वर्ष भी नहीं चल सकी।

Atul SinghTue, 30 Nov 2021 05:50 PM (IST)
संवेदक द्बारा घटिया सामग्री से निर्माण करवाने के कारण यह सड़क एक वर्ष भी नहीं चल सकी।

संवाद सहयोगी, कतरास: श्यामडीह-गोपालपुर से निचितपुर रेलवे स्टेशन जाने वाली मार्ग आजादी के बाद से कभी नहीं बनी है, आलम यह है कि आज यह रोड राहगीरों का खूंखार बन गया है। इस मार्ग पर आए दिन ट्रेन पकड़ने की आपाधापी व अस्पताल जल्दी पहुंचे के चक्कर लोग इस पथरीले कच्चे रास्ते को पार करने के दौरान दुर्घटना का शिकार होते रहते हैं। उबड़ खाबड़ रास्तों को पार करते टोटो, ओटो, मोटरसाइकिल वाहन कब पलटी मार दे इसकी कोई गारंटी नहीं है। कमोवेश यही स्थिति इसके दूसरे मार्ग की भी हिरक मार्ग से निचितपुर जाने वालीमार्ग की है। इस मार्ग को तो अभी हाल में ही बीसीसीएल ने लाखों रुपए खर्च कर बनाया है, लेकिन संवेदक द्बारा घटिया सामग्री से निर्माण करवाने के कारण यह सड़क एक वर्ष भी नहीं चल सकी।

आज सड़क जहां तहां से उखड़ गई है, गिट्टी और बालू सड़क पर बिखरे पड़े हैं जहां तहां गढ्ढे पड़े हैं। बरसात में यह सड़क तलाब का रूप ले लेता है जबकि यह सड़क रेलवे स्टेशन व अस्पताल जाने के लिए लोग उपयोग करते हैं। स्थानीय लोगों का माने तो निचितपुर स्टेशन आसपास के सैकड़ो गांव का एकमात्र रेल मार्ग है। इस स्टेशन से लोग आस पड़ोस के ग्रमीण व कोलियरी इलाकों से अपने गांव जाते हैं। या यूं कहे कि इस सड़क से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग आवागमन करते हैं लेकिन मेन रोड से स्टेशन जाने की रास्ता आजादी के बाद से अभी तक उसकी पक्कीकरण नहीं हो पाई है । इस विषय को लेकर हजारों बार ग्रामीणों के अलावा कई बार यूथ फ़ोर्स के प्रतिनिधियों ने मौखिक , लिखित और विभिन्न माध्यमों से अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित करते रहा है लेकिन आज तक ना ही किसी अधिकारी ने और ना ही किसी जनप्रतिनिधि ने इस पर कोई ठोस पहल की है। कुछ दिन पूर्व युथ फोर्स के संयोजक दीप नारायण सिंह के नेतृत्व में स्टेशन पर एक दिवसीय धरना दिया गया था जिसमे सड़क की बदहाली को दुरूस्त कराने की मांग की गई थी। देखना यह है कि कब तक इन समस्याओं पर तंत्र का ध्यान जाता है।

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