सोती संवेदनाओं के आगे सिसक रही जिंदगी, कोरोना से जान गंवाने वाले अधिकतर लोगों के स्वजनों को नहीं मिली सरकारी मदद

कोरोना के कारण बरवाअड्डा के कल्याणपुर के रहने वाले 55 वर्षीय दिलीप कुमार की मौत 28 सितंबर 2020 को हो गई थी। घटना को याद कर परिवार के सदस्य आज भी भावुक हो जा रहे हैं। पुत्र मनोज बताते हैं कि किसी भी व्यक्ति ने सहयोग नहीं किया।

MritunjayTue, 06 Jul 2021 11:51 AM (IST)
धनबाद में कोरोना से मरने वालों को सरकारी मदद का इंतजार ( सांकेतिक फोटो)।

मोहन गोप, धनबाद। छह जुलाई 2020। आज से ठीक एक साल पहले। कोरोना ने धनबाद के लोगों के जीवन में कोहराम मचाना शुरू कर दिया था। देश-दुनिया में कोहराम मचा रही जानलेवा बीमारी कोरोना ने इसी दिन धनबाद में अपना पहला शिकार बनाया था। जिले में 6 जुलाई 2020 को ही कोरोना से संक्रमित भूली आजाद नगर की महिला की मौत हुई थी। तब से लेकर अब तक एक साल के अंतराल में धनबाद के 379 लोग कोरोना का निवाला बन चुके हैं। साल बीतने के बाद भी कोरोना में अपनों को खो चुके लोग उबर नहीं पाए हैं। इस वायरस ने कई ऐसे लोगों को भी शिकार बनाया जो अपने घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। ऐसे परिवारों की स्थिति बेहद दयनीय है। ज्यादातर लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जहां पहली मौत वहां भी नहीं पहुंची मदद

भूली के आजाद नगर की रहने वाली 55 वर्षीय महिला की मौत धनबाद में सबसे पहले कोरोना से हुई थी। मौत के बाद महिला को वासेपुर के कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया गया था। स्वजनों के अनुसार अब तक इनके घर पर भी प्रशासन अथवा स्वास्थ्य विभाग का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है। घर के बच्चे रोजी रोटी के लिए बाहर में काम कर रहे हैं।

पिता चले गए, मैं इंजीनियर होकर भी घर बैठा हूं

कोरोना के कारण बरवाअड्डा के कल्याणपुर के रहने वाले 55 वर्षीय दिलीप कुमार की मौत 28 सितंबर 2020 को हो गई थी। घटना को याद कर परिवार के सदस्य आज भी भावुक हो जा रहे हैं। पुत्र मनोज बताते हैं कि पिता की तबीयत खराब होने पर किसी भी व्यक्ति ने सहयोग नहीं किया। वे खुद किसी तरीके पिता को लेकर एक निजी अस्पताल ले गए। वहां से उन्हें रांची रेफर कर दिया गया। कुछ दिन रांची के एक निजी अस्पताल में थे। वहां काफी पैसा खर्च होने के बाद रिम्स में भर्ती कराया गया। आखिरकर 28 सितंबर को उनकी मौत हो गई। पिता डीएवी अलकुसा में कर्मचारी थे। स्कूल की ओर से कुछ सहयोग मिला, लेकिन अब तक सकारर के स्तर से कोई सहयोग नहीं मिला है। स्थिति ऐसी हो गई है कि घर चलाना मुश्किल हो गया है। मनोज ने बताया वे इंजीनियर हैं। उन्हें अभी नौकरी मिली ही थी कि लाकडाउन लग गया। अब इसकी वजह से घर में ही बैठे हैं। दो बहनों की शादी करनी है।

साड़ी बेच कर चलाते थे परिवार, अब खाने को भी लाले

धनसार थाना अंतर्गत बरमसिया के रहने वाले 30 वर्षीय उमेश वर्मा की मौत 18 जनवरी 2021 को कोरोना से हो गई। पत्नी पार्वती देवी बताती हैं कि घर का एकमात्र कमाऊ सदस्य को कोरोना ने लील लिया। साड़ी का कारोबार करते थे। घर में तीन बच्चे हैं। उनकी परवरिश कैसे करूं। बरमसिया के पास एक छोटा सा क्वार्टर है, जहां किसी तरीके से ङ्क्षजदगी गुजार रही हूं। घर में खाने पीने की मुश्किल हो जाती है। विधवा पेंशन के लिए भी चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई है। पार्वती कहती हैं उन्हें मदद नहीं मिली तो पूरा परिवार के समक्ष भुखमरी की स्थिति आ जाएगी।

मौत के बाद झांकने भी नहीं आया प्रशासन का अमला

बैंक मोड़ की रहने वाली 50 वर्षीय सुशीला देवी की मौत जनवरी 2021 में कोरोना से हो गई। लेकिन अभी तक घर वालों का हाल चाल जानने के लिए प्रशासन अथवा स्वास्थ्य विभाग की कोई टीम उनके पास नहीं पहुंची। स्वजन बताते हैं कि संक्रमित होने के बाद उन्हें इलाज के लिए काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बेहतर इलाज सरकारी अस्पताल अथवा निजी अस्पताल में भी नहीं हो पा रहा था। ऐसे में प्रशासन को चाहिए कि मरीजों को बेहतर इलाज दिया जा सके। जिन लोगों ने अपनों को खोया है, उनके घर जाकर उनका हालचाल लिया जाए।

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