DMC Election: सामान्य की राजनीति के लिए खुल सकता दरवाजा ! सरकार के फैसले पर टिकी दावेदारों की नजर

DMC Election चुनाव मई 2020 में होना था। कोरोना के कारण चुनाव स्थगित कर दिया गया। उम्मीद की जा रही थी कि एक साल बाद मई 2021 में चुनाव होगा। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर के कारण चुनाव नहीं हो सका। अब एक बार फिर से तैयारी हो रही है।

MritunjaySun, 20 Jun 2021 04:58 PM (IST)
धनबाद नगर निगम चुनाव की प्रशासनिक तैयारी ( सांकेतिक फोटो)।

धनबाद, जेएनएन। कोरोना की दूसरी लहर के शांत होने के बाद एक बार फिर से झारखंड में नगर निकाय चुनाैव की तैयारी शुरू हो गई है। धनबाद, चास और देवघर नगर निगम समेत 27 नगर निकायों में चुनाव होना है। हालांकि चुनाव कब होगा कहना मुश्किल है। अगर कोरोना की तीसरी लहर उठी तो साल 2021 में चुनाव होना मुश्किल है। चुनाव का समय मई 2020 था। कोरोना के आगमन के बाद चुनाव स्थगित कर दिया गया। अब चुनाव की तैयारी शुरू हुई है तो धनबाद नगर निगम की राजनीति करने वालों के पंख लग गए हैं। सामान्य वर्ग के लोग कुछ ज्यादा की उतावले हैं। उन्हें लग रहा है कि अबकी चुनाव में मेयर का पद सामान्य वर्ग के लिए हो सकता है। पिछले दो बार से मेयर का पद क्रमशः महिला और ओबीसी के लिए आरक्षित रहा है। 

2010 के चुनाव में महिला के लिए था आरक्षित

धनबाद नगर निगम के पहले चुनाव में मेयर का पद सामान्य श्रेणी में महिलाओं के लिए आरक्षित था। वर्ष 2015 में मेयर पद अन्य पिछड़ा वर्ग ओबीसी के लिए आरक्षित हुआ। 2010 में इंदु देवी और 2015 के चुनाव में चंद्रशेखर अग्रवाल ने जीत दर्ज की। लेकिन ऐसी संभावनाएं जताई जा रही है की आरक्षण के चक्रानुक्रम फार्मूला के तहत इस बार मेयर पद एससी, एसटी या सामान्य कोटि में जा सकता है। झारखंड राज्य नगर पालिका अधिनियम के तहत निकाय चुनाव में विभिन्न पदों के आरक्षण को लेकर चक्रानुक्रम मे विशेष प्रक्रिया अपनाई जाती है। जिससे सभी वर्गों को सम्मान और समुचित प्रतिनिधित्व मिले तथा सामाजिक व्यवस्था का संतुलन भी बरकरार रहे। आरक्षण का निर्धारण समाज के सबसे कमजोर वर्ग के शुरू होता है, जो सामाजिक व्यवस्था के तहत ऊपर की श्रेणी में क्रमवार पहुंचता है कोरोना वायरस के कारण लंबित त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू कर दी गई है।

त्रिस्तरी पंचायत चुनाव के लिए भी तैयारी

जिला प्रशासन ने त्रिस्तरीय पंचायत क्षेत्र में आरक्षण का निर्धारण शुरू कर दिया है। तीन जुलाई तक जिला परिषद सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य तथा वार्ड सदस्यों की आरक्षण श्रेणी निर्धारित कर रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग के निर्देश पर जिला पंचायती राज विभाग ने जिले के सभी प्रखंडों के वीडियो को आरक्षण श्रेणी तय करने का निर्देश दिया है। विभाग के अनुसार पंचायती राज अधिनियम के तहत सभी पदों के लिए चक्रानुक्रम में आरक्षण श्रेणी निर्धारित किया जाना है।

29 जिला परिषद और 256 मुखिया के पद

जिले में 29 जिला परिषद सदस्य, 256 मुखिया के साथ-साथ पंचायत समिति और वार्ड सदस्यों के पदों के लिए चक्रानुक्रम मे आरक्षण श्रेणी का निर्धारण कर राज्य निर्वाचन आयोग को भेजना है। चक्रानुक्रम फार्मूला के तहत प्रत्येक चुनाव में सामाजिक क्रम में क्रमवार सीट आरक्षित होती जाती है, और इसी के तरह प्रत्येक श्रेणी को इसका लाभ मिलता जाता है। अर्थात जो सीट पहली बार अनुसूचित जनजाति के लिए निर्धारित होती है अगली बार यह सीट अनुसूचित जाति के खाते में चली जाती है। तीसरी बार के चुनाव में वह सीट पिछड़ा वर्ग तथा चौथे चुनाव में यह सीट सामान्य कोटि के लिए हो जाती है। अर्थात जिस सीट पर किसी श्रेणी को एक बार आरक्षण का लाभ मिल गया है तो अगले 3 चुनाव तक उस श्रेणी के लिए सीट आरक्षित होने की संभावना बहुत रहती है।

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