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प्रभु दामोदर नाथ की 1008 दीपों से महाआरती

चासनाला : चासनाला रिवर साइड दामोदर नदी तट स्थित सूर्यधाम प्रांगण में श्री सूर्य नारायण महायज्ञ के छठे दिन महायज्ञ के इस अवसर पर शाम को प्रभु दामोदर नाथ की 1008 दीपों से महाआरती की गई। महाआरती के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। भक्त हाथों में आरती की थाली लेकर भक्ति भाव से अनुष्ठान में शामिल हुए। काफी संख्या में महिलाएं भी थीं। इस अवसर पर काशी से पधारे आचार्य पंडित ओंकारनाथ उपाध्याय ने अपने प्रवचन में कहा की परमात्मा को प्राप्त करने का सबसे सुगम साधन निर्मल मन है। इसका प्रमाण है कि यह मन निर्मल है। परंतु किसी लोभ में आपका मन चंचल हो जाता है। चंचलता अमल नहीं है। बल्कि चंचलता ही मन का मल है। कहा कि चंचलता तब तक बनी रहेगी जब तक मनुष्य दुनिया के भोग पदार्थों की महत्ता स्वीकार करते रहेंगे। महायज्ञ के दौरान वैदिक मंत्रोच्चारण हवन, पूजन से माहौल भक्तिमय हो गया। यज्ञ मंडप परिक्रमा के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है।

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