Surya Grahan 2021: आज साल का पहला सूर्य ग्रहण, 148 साल बाद बन रहा है अद्भुत संयोग; जानें इसका धार्मिक महत्व

Surya Grahan 2021 पंडित रमाशंंकर तिवारी के अनुलाप धर्म शास्त्रीय मतानुसार ग्रहण का सूतक वहीं लगता है जहां वह दृश्य होता है। चूंकि यह सूर्यग्रहण भारत में कहीं भी दृष्टिगोचर नहीं होगा अत इस ग्र्रहण का सूतक भारत भूमि पर नहीं लगेगा।

MritunjayWed, 09 Jun 2021 09:04 PM (IST)
दस जून को लगेगा सूर्यग्रहण ( फाइल फोटो)।

धनबाद, जेएनएन। सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण खगोलीय घटनाएं हैं। ये सूर्य, पृथ्वी व चंद्रमा की गोचरीय गति व स्थिति के कारण होते हैं। ग्रहण के लिए तिथि भी निर्धारित है, अर्थात् चंद्र ग्रहण पूर्णिमा और सूर्य ग्रहण अमावस्या को होता है। इस ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या गुरुवार 10 जून, 2021 को वृष राशि में कंकणाकृति खंड सूर्य ग्रहण लग रहा है, जो भारत में कहीं भी पूर्ण रूप से दिखाई नहीं पड़ेगा। आंशिक रूप से भारत के दो स्थानों पर दिख सकता है। यह ग्रहण उत्तरी अमेरिका, कनाडा, उत्तरी एशिया, यूरोप, उत्तरी अटलांटिक महासागर, चीन, मंगोलिया, ग्रीनलैण्ड, रुस आदि क्षेत्रों में दृश्य होगा।

साल का पहला सूर्यग्रहण

10, जून 2021 को इस साल का पहला सूर्यग्रहण लग रहा है। हालांकि यह इस साल का दूसरा ग्रहण होगा, क्योंकि वर्ष 2021 का पहला ग्रहण 26 मई को चंद्रग्रहण के रूप में लगा थाो। यह सूर्य ग्रहण भारत में केवल अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में सूर्यास्त के कुछ समय पहले देखा जा सकेगा। इसके अलावा भारत के अन्य भागों से यह सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई पड़ेगा। यद्दपि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा परन्तु भारत में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में होगा।

जहां दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण

यह सूर्य ग्रहण उत्तरी अमेरिका, उत्तरी कनाडा, यूरोप और एशिया, ग्रीनलैंड, रूस के बड़े हिस्‍से में दिखाई देगा. हालांकि कनाडा, ग्रीनलैंड तथा रूस में वलयाकार जबकि उत्तर अमेरिका के अधिकांश हिस्सों, यूरोप और उत्तर एशिया में आंशिक सूर्य ग्रहण ही दिखाई देगा.

148 साल बाद बन रहा है अद्भुत संयोग

ज्योतिष शास्त्र की गणना के मुताबिक या सूर्य ग्रहण करीब 148 साल बाद शनि जयंती के दिन लग रहा हैं। 10 जून को ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि है। पंचांग के अनुसार हर साल ज्येष्ठ की अमावस्या तिथि को शनि जयंती मनाई जाती है। ज्योतिष गणना के अनुसार शनि जयंती पर सूर्य ग्रहण का योग करीब 148 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 26 मई 1873 को शनि जयंती के दिन सूर्य ग्रहण पड़ा था। हालांकि धार्मिक दृष्टि से इस तरह की घटना को शुभ नहीं माना जाता है। 

गर्भवती महिलाओं पर सूर्यग्रहण का प्रभाव 

भारत में धार्मिक मान्यताओं और पंरपराओं को काफी महत्व दिया जाता है। ग्रहण-सूर्यग्रहण हो या चंद्रग्रहण, दोनों के दाैरान गर्भवर्ती महिलाओं को लेकर काफी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक कारण नहीं है। यह सूर्यग्रहण धनबाद, झारखंड समेत पूरे भारत में नहीं स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई देगा। इसलिए इसका सूतक नहीं है। गर्भवती महिलाओं को चिंतित होने की कोई बात नहीं है। इसका भारत में कोई प्रभाव नहीं है।

इस ग्रहण का भारत में सूतक दोष नहीं 

धर्म शास्त्रीय मतानुसार ग्रहण का सूतक वहीं लगता है, जहां वह दृश्य होता है। चूंकि यह सूर्यग्रहण  भारत में कहीं भी दृष्टिगोचर नहीं होगा, अत: इस ग्र्रहण का सूतक भारत भूमि पर नहीं  लगेगा। इस प्रकार इस सूर्यग्रहण के कारण पूजा पाठ व धर्म कर्म में किसी प्रकार की बाधा या व्यवधान नहीं है। धनबाद के पंडित रमाशंकर तिवारी के अनुलार भारत में दृश्य नहीं होने से इस सूर्यग्रहण की हमारे देश में कोई धार्मिक मान्यता ही नहीं है। यह ग्रहण हमारे यहां है ही नहीं तो धार्मिक मतानुसार किसी प्रकार का कार्यावरोध, परहेज या विशेष स्नान दान व सफाई की भी कोई आवश्यकता नहीं है। भारतीय मानक समय के अनुसार ग्रहण का स्पर्श गुरुवार को अपराह्न 1:43 बजे तथा ग्रहण का मोक्ष संध्या 6:41 बजे होगा।

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