Dussehra/ Vijayadashami 2021: दशहरा और विजयादशमी में क्या है अंतर, नहीं जानते तो यह जरूर पढ़ें

Dussehra/ Vijayadashami 2021 हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में दशहरा और विजयादशमी शामिल हैं। दोनों त्योहार एक ही दिन मनाए जाते हैं। इस दिन शक्ति की पूजा की जाती है। दशहरा की पाैराणिक कथा भगवान राम द्वारा रावण वध तो विजयादशमी की कथा मां दुर्गा द्वारा महिषासुर मर्दन से जुड़ी है।

MritunjayFri, 15 Oct 2021 06:18 AM (IST)
भगवान राम और शक्ति की देवी मां दुर्गा ( फाइल फोटो)।

जागरण संवाददाता, धनबाद। Happy Dussehra 2021 हर साल की तरह इस बार भी दशहरा (Dussehra 2021) और विजयादशमी ( Vijayadashami 2021) को लेकर लोगों में  काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। 15 अक्टूबर को पूरे देश के साथ ही धनबाद में भी (Dussehra 15 oct ) मनाया जा रहा है। हिंदू पंचाग (Hindu calander) के अनुसार अश्विन मास (Ashwin Month) की शुक्ल पक्ष (Shukla Paksha) की दशमी तिथि को दशहरा (Dashmi Tithi Dussehra) या विजयादशमी मनाया जाता है। बहुत सारे लोग विजयादशमी और दशहरा को लेकर भ्रम में पड़ जाते हैं। क्योंकि दोनों पर्व एक ही दिन मनाया जाता है। यहां तक की अंतर भी नहीं समझ पाते हैं।

विजयादशमी और दशहरा का अंतर

दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। अश्विन (क्वार) मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को इसका आयोजन होता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था तथा विजयादशमी पर देवी दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरान्त महिषासुर पर विजय प्राप्त किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिये इस दशमी को 'विजयादशमी' के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। पौराणिक कथा के अनुसार दशहरा के दिन श्री राम ने रावण का वध किया था। 9 दिनों तक मां दुर्गा (Maa Durga Puja) की अराधना करने के बाद श्री राम ने दशमी के दिन रावण का वध किया था और इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत हुई थी। और इसी लिए नवरात्रि के नौ दिन तक रामलीला का आयोजन किया जाता है और दसवें दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुताले जलाए जाते हैं। वहीं, दूसरी पौराणिक कथा मां दुर्गा और महिषासुर युद्ध की है।  जब महिषासुर की सेना ने देवताओं को ज्यादा परेशान कर दिया था, तो मां दुर्गा ने महिषासुर की सेना के साथ 9 दिन तक युद्ध किया और दशमी तिथि के दिन महिषासुर का वध कर दिया था। और इस तरह दशमी के दिन फिर से बुराई पर अच्छाई की जीत का परचम लहराया था। यह विजयादशमी की कथा है। 

दोनों ही रूपों में शक्ति की पूजा

दशहरा अथवा विजयदशमी राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति पूजा का पर्व है, शस्त्र पूजन की तिथि है। हर्ष और उल्लास तथा विजय का पर्व है। देश के कोने-कोने में यह विभिन्न रूपों से मनाया जाता है, बल्कि यह उतने ही जोश और उल्लास से दूसरे देशों में भी मनाया जाता जहां प्रवासी भारतीय रहते हैं। हिंदू धर्म में दशहरा का विशेष महत्व माना जाता है, क्योंकि इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के राक्षस का संहार किया था, तो वहीं प्रभु श्री राम ने रावण का वध करके लंका पर विजय प्राप्त की थी। इस तरह से बुराई पर अच्छाई की विजय का यह पर्व विजयदशमी कहलाया।

सुख-समृद्धि और शत्रुओं पर विजय के लिए दशहरा पर यह जरूर करें

मान्यता के अनुसार, यदि दशहरा पर कोई कार्य किया जाए तो वह अवश्य सफल होता है। शास्त्रों में इस तिथि को बहुत ही श्रेष्ठ बताया गया है। यह तिथि विजय प्राप्ति की तिथि मानी गयी है। यदि इस दिन कुछ उपाय कर लिए जाएं तो जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इसी के साथ शत्रु बाधा, मुकदमा आदि से मुक्ति के लिए भी इस दिन उपाय किए जा सकते हैं। विजयदशमी को घर के उत्तर-पूर्व यानी ईशान कोण में लाल रंग के फूलों या कुमकुम, गुलाल से रंगोली या अष्टकमल की आकृति बनानी चाहिए और दीप जलाना चाहिए। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में सुख-समृद्धि आती है। विजयदशमी के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें रोली व अक्षत डालकर सूर्य को जल दें और ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का उच्चारण करें। इसी के साथ सूर्य नारायण का ध्यान करते हुए तीन बार आदित्यहृदय स्तोत्र का पाठ करें। इस तरह से सूर्य की उपासना करने से सफलता व सौभाग्य की प्राप्ति होती है साथ ही आपके साहस में भी वृद्धि होती है व आपको शत्रुओं से मुक्ति प्राप्त होती है। सूर्य की उपासना करने से उच्च अधिकारियों का सहयोग भी मिलता है जिससे कानूनी मामलों में भी सफलता प्राप्त होती है।

शस्त्र पूजन की परंपरा

दशहरा को विजय का प्रतीक माना गया है। यह विजय तिथि है। पहले के समय में राजाओं के द्वारा विजयप्राप्ति के लिए दशमी तिथि पर शस्त्र पूजन किया जाता था जो परंपरा आज चली आ रही है। माना जाता है कि शहरा पर शस्त्र पूजन अवश्य करना चाहिए। इससे भी शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। इस कार्य को विजयदशमी से आंरभ करके प्रतिदिन करना चाहिए, यदि प्रतिदिन नहीं कर सकते तो हर रविवार को यह उपाय करना चाहिए। इससे मान-प्रतिष्ठा व पद में बढ़ोत्तरी होती है।

दशहरा पूजन विधि

विजयादशमी के दिन शुभ मुहूर्त में शमी के पौधे के पास जाकर सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शमी पूजन मंत्र पढ़ें। इसके बाद सभी दिशाओं में आप विजय की प्रार्थना करें। यदि आपके घर में अस्त्र शस्त्र की पूजा की जाती है तो एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर सभी शस्त्रों को उसके ऊपर रखें। फिर गंगाजल छिड़क कर पुष्प अर्पित करें। विजयदशमी के दिन भगवान राम, मां दुर्गा, मां सरस्वती, भगवान गणेश और हनुमान जी आराधना करें। इस दिन गाय के गोबर से दस गोले य कंडे बनाएं, इन कंडों में नवरात्रि के दिन बोये गए जौ को लगायें। इसके बाद धूप और दीप जलाकर पूजा करें।

रावण-दहन का मुहूर्त: दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक रावण-दहन का शुभ मुहूर्त है।

घर में पूजन का मुहूर्त:  प्रात: 6.00 बजे से 7.30 तक घर में पूजा कर सकते हैं ।

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