कभी खिड़की से देखती थी रामलीला, आज अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक रहा नाम

कभी खिड़की से देखती थी रामलीला, आज अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक रहा नाम

संस्कार भारती के कथक कार्यशाला में पहुंची श्रुति ने कहा कि उनके परिवार में ज्यादातर लोग डॉक्टर हैं। मां भी सेवानिवृत्त डॉक्टर हैं। घरवाले चाहते थे कि मैं भी डॉक्टर बनूं।

Publish Date:Mon, 11 Jun 2018 12:46 PM (IST) Author:

जागरण संवाददाता, धनबाद: उन दिनों मैं चार-पांच साल की थी। पटना में घर के समीप मैदान में जब भी रामलीला होता, मैं खिड़की के सामने बैठ जाती। घरवाले मना करते, पर नहीं मानती और पूरी रात बैठकर देखती रहती थी। एक दिन मेरे चाचा ने मंच पर चढ़ा दिया। छोटी सी थी, डांस करने लगी। उस दिन के बाद से ही नृत्य मेरे लिए साधना बन गया और मैं साध्वी। यह कहना है अंतरराष्ट्रीय कथक नृत्यांगना श्रुति सिन्हा का। संस्कार भारती के कथक कार्यशाला में पहुंची श्रुति ने कहा कि उनके परिवार में ज्यादातर लोग डॉक्टर हैं। मां भी सेवानिवृत्त डॉक्टर हैं। घरवाले चाहते थे कि मैं भी डॉक्टर बनूं पर मैंने नृत्य को चुना।

कहा- आज नृत्य कला में कई बदलाव आए हैं। कई चीजें विलुप्त भी हुई। अब नए सिरे से भारतीय नृत्य कला को युवा पीढ़ी से जोड़ रही हैं और इसके लिए जन जागरण अभियान चला रही हैं। चीन के शघाई में आयोजित नृत्य कला महोत्सव में उन्हें गोल्डन ट्रॉफी से नवाजा जा चुका है। रियलिटी शो में जाएं, पर नृत्य का रियाज न भूलें: रियलिटी शो के माध्यम से नेम-फेम मिल सकता है पर शास्त्रीय नृत्य के लिए रियाज जरूरी है। कलाकार को स्वयं में ठहराव लाना होगा जो उन्हें दर्शकों से जोड़ेगा। मौजूदा पीढ़ी सबकुछ शॉर्ट कट करना चाहती है जो मुमकिन नहीं है।

सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग जरूरी: फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम के जमाने में युवा पीढ़ी को नृत्य कला से जोड़े रखना बड़ी चुनौती है। युवाओं को यह समझना होगा कि कला-संस्कृति में अपने देश को नंबर वन के पायदान पर बनाए रखने के लिए उन्हें सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग करना होगा। पश्चिमी संस्कृति अपनाने के बजाय अपनी संस्कृति को प्राथमिकता देनी होगी।

श्रुति सिन्हा का संक्षिप्त परिचय: रवींद्र बालिका विद्यालय से स्कूली शिक्षा के बाद मगध महिला से इंटर और रसायनशास्त्र में पटना साइंस कॉलेज पीजी की पढ़ाई पूरी है। संगीत समिति इलाहाबाद से संगीत में पीजी की उपाधि ली है। श्रुति दूरदर्शन की कथक कलाकार भी हैं। गंधर्व महाविद्यालय मुंबई से मान्यता प्राप्त आरकेपुरम की शास्त्रीय नृत्य संस्था के माध्यम से बच्चों को कथक प्रशिक्षण दे रही हैं। वह संस्कार भारती की मंत्री भी रही हैं।

सीएमपीएफ कॉलोनी में सात दिवसीय कार्यशाला शुरू: संस्कार भारती की सात दिवसीय कथक कार्यशाला की शुरुआत रविवार को सीएमपीएफ कॉलोनी दुर्गा मंडप में हुई। कार्यक्रम में अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कथक नृत्यांगना श्रुति सिन्हा पहुंची हैं जो धनबाद के कला प्रेमियों के समक्ष न केवल कथक नृत्य पेश करेंगी बल्कि उसका प्रशिक्षण भी देंगी। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संस्कार भारती के अध्यक्ष इंद्रजीत प्रसाद सिंह ने कहा कि यह धनबाद के लिए गर्व का विषय है कि ऐसा आयोजन धनबाद में हो रहा है। कार्यक्रम में संयोजक मंडल सरसी चंद्रा, मीना रिटोलिया, बरनाली सेनगुप्ता, अर्पिता चट्टराज, पिंकी गुप्ता, संचिता मजूमदार, रिया सिंह, ईला चौधरी, बाप्पा सरकार, पाजु हरि, संजय सेनगुप्ता, जयंत दत्ता, राणा घोष, अर्पिता चट्टराज, वैशाली सिंह, मोमिता सरकार, ज्योति पॉल, रिसान सेनगुप्ता, रिशिता सेनगुप्ता, जया चटर्जी, इंदु श्रुति साहा, दयानंद शर्मा, सन्निधि प्रिया, धीरज शर्मा, समृद्धि प्रिया व अन्य मौजूद थे।

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